देहरादून: उत्तराखंड देश का ऐसा पहला राज्य बन गया है जिसने अपनी समान नागरिक संहिता को और अधिक सख्त और व्यावहारिक बनाने के लिए इसमें बड़े दंडात्मक बदलाव किए हैं। नए संशोधनों का मुख्य केंद्र ‘धोखाधड़ी, बल प्रयोग और पहचान छिपाकर’ बनाए गए रिश्तों पर अंकुश लगाना है।
1. बल या धोखाधड़ी से रिश्ते बनाने पर कठोर सजा
संशोधित कानून के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति बल (Force), दबाव (Coercion) या धोखाधड़ी (Fraud) का सहारा लेकर किसी को शादी या लिव-इन रिलेशनशिप के लिए मजबूर करता है, तो उसे अब 7 साल तक की जेल की सजा हो सकती है। पहले के मूल कानून में सजा के प्रावधान इतने कड़े नहीं थे, जिन्हें अब ‘भारतीय न्याय संहिता’ (BNS) के अनुरूप सख्त बनाया गया है।
2. पहचान छिपाना अब गंभीर अपराध
हाल के वर्षों में अपनी धार्मिक पहचान या नाम छिपाकर युवाओं को प्रेम जाल या लिव-इन में फँसाने के बढ़ते मामलों को देखते हुए, पहचान छिपाकर (Misrepresentation of identity) की गई शादी को अब विवाह निरस्तीकरण (Annulment) का एक वैध आधार माना जाएगा। इसके साथ ही ऐसे मामलों में भारी जुर्माने और कारावास का भी प्रावधान है।
3. लिव-इन और दूसरी शादी के लिए नए नियम
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अवैध लिव-इन: यदि कोई व्यक्ति पहले से ही किसी के साथ लिव-इन में है और उसी दौरान किसी दूसरे व्यक्ति के साथ लिव-इन रिलेशनशिप शुरू करता है, तो इसे अपराध माना जाएगा और इसके लिए 7 साल की जेल हो सकती है।
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बिना तलाक दूसरी शादी: कानूनी तलाक लिए बिना दूसरी शादी करना या किसी अन्य के साथ लिव-इन में रहना अब आपराधिक श्रेणी में आएगा, जिसमें अधिकतम सजा का प्रावधान किया गया है।
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नाबालिग के साथ लिव-इन: किसी बालिग व्यक्ति का नाबालिग के साथ लिव-इन में रहना अपराध होगा। इसके लिए 6 महीने की कैद और 50,000 रुपये तक का जुर्माना लग सकता है।
4. प्रशासनिक और डिजिटल बदलाव
सरकार ने न केवल सजा बढ़ाई है, बल्कि प्रक्रिया को भी पारदर्शी बनाया है:
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ऑनलाइन पंजीकरण: अब उत्तराखंड में 100% विवाह पंजीकरण ऑनलाइन हो रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक साल में 4.7 लाख से अधिक शादियाँ पोर्टल पर पंजीकृत की गई हैं।
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टर्मिनेशन सर्टिफिकेट: लिव-इन रिश्ता खत्म होने पर अब रजिस्ट्रार की ओर से आधिकारिक ‘टर्मिनेशन सर्टिफिकेट’ जारी करने का प्रावधान किया गया है।
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शब्दावली में बदलाव: ‘विडो’ (Widow) शब्द के स्थान पर अब जेंडर न्यूट्रल शब्द ‘स्पाउज’ (Spouse) का उपयोग किया जाएगा।
5. तलाक और पुनर्विवाह पर सख्ती
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अवैध तरीकों से (जैसे हलाला या बिना कानूनी प्रक्रिया के) तलाक देने या पुनर्विवाह से पहले निषिद्ध शर्तों (जैसे हलाला) को मानने के लिए मजबूर करने पर 3 साल की कैद और 1 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का संदेश: “UCC की एक वर्ष की यात्रा ने यह साबित किया है कि उत्तराखंड ने केवल एक कानून लागू नहीं किया, बल्कि समानता और गरिमा पर आधारित एक नई सामाजिक चेतना को जन्म दिया है।”
