देहरादून। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पंजाब के आदमपुर हवाई अड्डे का नाम बदलकर ‘श्री गुरु रविदास जी महाराज हवाई अड्डा’ करने के निर्णय को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक ‘ऐतिहासिक और प्रेरणादायी’ कदम बताया है। संत रविदास जी की 649वीं जयंती के पावन अवसर पर लिए गए इस फैसले को उन्होंने भारत की सांस्कृतिक और सामाजिक एकता को मजबूती देने वाला बताया।
1. मानवता और समानता को सच्ची श्रद्धांजलि
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि संत रविदास जी ने जीवन भर भेदभाव और ऊँच-नीच के विरुद्ध आवाज़ उठाई। उनके विचार आज के आधुनिक समाज के लिए भी उतने ही प्रासंगिक हैं। आदमपुर एयरपोर्ट को उनके नाम पर समर्पित करना उनके महान विचारों, सामाजिक चेतना और मानवता के प्रति उनके योगदान को एक सच्ची श्रद्धांजलि है।
2. सामाजिक समरसता का प्रतीक
मुख्यमंत्री के अनुसार, यह निर्णय केवल नाम बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र को चरितार्थ करता है।
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नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा: हवाई अड्डे का नया नाम युवाओं को संत रविदास जी के जीवन और उनके द्वारा दिखाए गए समानता के मार्ग से जोड़ने का काम करेगा।
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सांस्कृतिक गौरव: यह कदम राष्ट्रीय गौरव और सांस्कृतिक चेतना को और अधिक सशक्त करेगा।
3. महापुरुषों के सम्मान की परंपरा
श्री धामी ने उल्लेख किया कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश के महापुरुषों, संतों और समाज सुधारकों को वह सम्मान मिल रहा है, जिसके वे हकदार हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा संतों के आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाने का यह प्रयास सराहनीय है।
4. समतामूलक समाज की परिकल्पना
संत रविदास जी ने जिस समतामूलक समाज (जहाँ कोई छोटा-बड़ा न हो) की परिकल्पना की थी, मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि समाज उसी मार्ग पर आगे बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार भी इन महान आदर्शों को आत्मसात करते हुए राज्य के विकास और सामाजिक सद्भाव के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री का संदेश: > “संत रविदास जी की करुणा, सेवा और समानता का संदेश आज भी हमें प्रेरित करता है। प्रधानमंत्री जी का यह निर्णय सामाजिक एकता और समरसता की दिशा में एक मिल का पत्थर साबित होगा।”
इस आदमपुर एयरपोर्ट के नामकरण और संत रविदास जी के सम्मान पर आधारित चर्चा को देखें, जहाँ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विरासत और प्रतीकों के महत्व को विस्तार से समझाया है। यह वीडियो भारत में महापुरुषों के सम्मान में किए जा रहे बदलावों और सामाजिक प्रभाव पर मुख्यमंत्री के दृष्टिकोण को दर्शाता है।
