उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के विजन को धरातल पर उतारने के लिए प्रदेश की राजधानी में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। सचिवालय में सचिव आवास, डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में हुई इस बैठक का मुख्य केंद्र देहरादून की प्रस्तावित पीआरटी (पॉड टैक्सी) परियोजना और मसूरी व नैनीताल की रोपवे परियोजनाओं का फिजिबिलिटी अध्ययन रहा।
देहरादून: पॉड टैक्सी से बदलेगी शहर की रफ्तार
देहरादून में बढ़ते यातायात दबाव को कम करने के लिए उत्तराखंड मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (यूएमआरसी) ने एक महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है। इसे ईबीआरटीएस (EBRTS) के फीडर सिस्टम के रूप में विकसित किया जाएगा।
प्रस्तावित तीन प्रमुख कॉरिडोर:
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क्लेमेंटाउन से बल्लूपुर चौक
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पंडितवाड़ी से रेलवे स्टेशन
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गांधी पार्क से आईटी पार्क
यह परियोजना न केवल यातायात को सुगम बनाएगी, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल होने के कारण शहर के प्रदूषण को कम करने में भी मील का पत्थर साबित होगी।
मसूरी और नैनीताल: रोपवे से जाम से मुक्ति
पर्वतीय क्षेत्रों, विशेषकर मसूरी और नैनीताल में पार्किंग और ट्रैफिक जाम एक बड़ी समस्या रही है। समीक्षा बैठक में बताया गया कि प्रस्तावित रोपवे परियोजनाएं इन समस्याओं का स्थाई समाधान बन सकती हैं। आवास सचिव ने इन परियोजनाओं के लिए भूमि स्वामित्व का स्पष्ट विवरण तैयार करने और विभागों के बीच बेहतर तालमेल बिठाने के निर्देश दिए हैं।
बैठक के मुख्य दिशा-निर्देश
आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने अधिकारियों को निम्नलिखित बिंदुओं पर ठोस कार्रवाई के निर्देश दिए:
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संशोधित डीपीआर: परियोजना की आवश्यकता, पर्यावरणीय प्रभाव (EIA), सामाजिक प्रभाव और वित्तीय व्यवहार्यता को और अधिक स्पष्ट किया जाए।
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स्थलीय निरीक्षण: सचिव ने स्वयं प्रस्तावित पॉड टैक्सी कॉरिडोर के संरेखण (Alignment) का स्थलीय निरीक्षण करने की इच्छा जताई।
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भूमि संबंधी समाधान: रोपवे परियोजनाओं के लिए भूमि हस्तांतरण और स्वामित्व के मामलों को समयबद्ध तरीके से सुलझाने पर जोर दिया गया।
भविष्य की राह
बैठक में उत्तराखंड मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के एमडी सहित मैकेन्जी और सिस्ट्रा जैसी अंतरराष्ट्रीय सलाहकार संस्थाओं के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। इन परियोजनाओं का सफल क्रियान्वयन न केवल स्थानीय निवासियों के जीवन को आसान बनाएगा, बल्कि उत्तराखंड के पर्यटन क्षेत्र को भी एक वैश्विक पहचान दिलाएगा।
