ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (फेज-2): उत्तराखंड ने देश में हासिल किया पांचवा स्थान, अब छोटे उद्योगों के लिए लागू होगी ‘सेल्फ सर्टिफिकेशन’ व्यवस्था

देहरादून: उत्तराखंड में निवेश के अनुकूल वातावरण तैयार करने और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ (Ease of Doing Business) को बढ़ावा देने की दिशा में राज्य सरकार को बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। डी-रेगुलेशन 1.0 कम्प्लायंस रिडक्शन में उत्तराखंड ने देशभर में पांचवा स्थान प्राप्त किया है।

सचिवालय में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की सचिव मीता राजीव लोचन और मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन ने राज्य में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के दूसरे चरण (Phase 2) की प्रगति की समीक्षा की।

फेज-2 के लिए 9 प्राथमिकताएं तय

राष्ट्रीय सचिव मीता राजीव लोचन ने बताया कि दूसरे चरण के तहत राज्य के लिए कुल 9 प्राथमिकताएं निर्धारित की गई हैं। इनका मुख्य उद्देश्य विकास कार्यों को गति देना और निवेश के ढांचे को मजबूत करना है। इन प्राथमिकताओं में शामिल हैं:

  • भूमि उपयोग (Land Use) में सुधार।

  • भवन एवं निर्माण स्वीकृति के लिए सिंगल विंडो सिस्टम

  • पर्यावरण और पर्यटन के क्षेत्र में नवाचार।

  • नागरिकों को बेहतर सुविधाओं की उपलब्धता।

छोटे उद्योगों को बढ़ावा: ‘सेल्फ सर्टिफिकेशन’ का सुझाव

बैठक के दौरान सचिव ने सुझाव दिया कि छोटे निवेशकों को राहत देने के लिए ‘सेल्फ सर्टिफिकेशन’ (स्व-प्रमाणीकरण) की व्यवस्था लागू की जानी चाहिए। साथ ही, उन्होंने उद्योगों से जुड़े प्रस्तावों को एक निश्चित समय सीमा के भीतर मंजूरी देने पर जोर दिया ताकि व्यापारिक सुगमता और बढ़ सके।


उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था में मैन्युफैक्चरिंग का दबदबा

बैठक में राज्य की आर्थिक मजबूती के कुछ महत्वपूर्ण आंकड़े भी साझा किए गए:

  • GSDP में योगदान: उत्तराखंड का विनिर्माण (Manufacturing) क्षेत्र राज्य की जीडीपी में 26% योगदान देता है, जो राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक है।

  • औद्योगिक इकाइयां: इस क्षेत्र का लगभग 65% हिस्सा औपचारिक रूप से पंजीकृत औद्योगिक इकाइयों द्वारा संचालित है।

  • अनुकूल वातावरण: कुशल मानव संसाधन, उच्च साक्षरता दर और बेहतर जीवन स्तर के कारण उत्तराखंड निवेश के लिए एक प्रमुख आकर्षण बन गया है।

मुख्य सचिव के निर्देश: नियमों में सुधार और समयबद्धता

मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन ने कहा कि राज्य में निवेश को बढ़ावा देने के लिए बिजली, श्रम सुधार, अग्निशमन, पर्यटन, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में प्रभावी सुधार किए जा रहे हैं।

“निवेशकों की सुविधा के अनुसार नियमों में लगातार बदलाव किए जा रहे हैं। सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित मानकों का सख्ती से पालन करें और निवेश के वातावरण को और अधिक सरल बनाएं।” — श्री आनंद बर्द्धन, मुख्य सचिव

बैठक में प्रमुख उपस्थिति: इस अवसर पर केंद्रीय अपर सचिव श्री राहुल शर्मा, श्री राजेश शर्मा, सचिव श्री आर. राजेश कुमार, श्री श्रीधर बाबू अद्दांकी, श्री रंजीत सिन्हा सहित शासन के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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