पौड़ी/श्रीनगर: उत्तराखंड की प्रसिद्ध चारधाम यात्रा शुरू होने से पहले श्रद्धालुओं के लिए एक बड़ी और उत्साहजनक खबर है। अलकनंदा नदी के तट पर स्थित आस्था के प्रमुख केंद्र सिद्धपीठ धारी देवी मंदिर को अब आधुनिक और रंग-बिरंगी वॉल वॉशर लाइटिंग (Wall Washer Lighting) से सजाया गया है। इस नई पहल के बाद रात के समय मंदिर परिसर का दृश्य न केवल अलौकिक लग रहा है, बल्कि दूर-दूर से आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का मुख्य केंद्र बन गया है।
आधुनिक तकनीक और आध्यात्मिकता का संगम
जिला प्रशासन द्वारा स्थापित की गई यह लाइटिंग व्यवस्था प्रोग्रामिंग आधारित है। शाम ढलते ही मंदिर का पूरा परिसर दूधिया और सतरंगी रोशनी में नहा जाता है।
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भव्यता: आधुनिक तकनीक की मदद से मंदिर की दीवारों और कलाकृतियों को इस तरह रोशन किया गया है कि उनकी सुंदरता रात के अंधेरे में भी स्पष्ट दिखाई देती है।
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अनुभव: यह सजावट मंदिर की आध्यात्मिक गरिमा को बनाए रखते हुए उसे एक वैश्विक पर्यटन स्थल जैसा स्वरूप प्रदान कर रही है।
पर्यटन और सुविधाओं पर जिला प्रशासन का जोर
जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने इस परियोजना के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि धारी देवी मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि उत्तराखंड की संस्कृति और आस्था का पौराणिक स्तंभ है।
“हमारा उद्देश्य चारधाम यात्रा पर आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को एक यादगार और सुखद अनुभव प्रदान करना है। पूर्व में उपजिलाधिकारी और पर्यटन विभाग को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि यात्रा मार्ग पर स्थित प्रमुख स्थलों का सौंदर्यीकरण किया जाए। धारी देवी मंदिर में की गई यह लाइटिंग इसी योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।” — स्वाति एस. भदौरिया, जिलाधिकारी, पौड़ी
श्रद्धालुओं के लिए क्या है खास?
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आकर्षक वातावरण: यात्रा मार्ग पर स्थित होने के कारण अब श्रद्धालु रात के समय भी मंदिर की सुंदरता का आनंद ले सकेंगे।
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बेहतर सुविधाएं: लाइटिंग के साथ-साथ परिसर में अन्य बुनियादी सुविधाओं को भी सुधारा जा रहा है।
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फोटोग्राफी और पर्यटन: मंदिर का नया ‘नाइट व्यू’ सोशल मीडिया और पर्यटन की दृष्टि से भी इसे नई पहचान दिला रहा है।
चारधाम यात्रा की तैयारी तेज
धारी देवी को चारधाम की रक्षक देवी माना जाता है। ऐसे में यात्रा शुरू होने से ठीक पहले मंदिर परिसर का यह कायाकल्प श्रद्धालुओं के उत्साह को दोगुना करने वाला है। जिला प्रशासन का मानना है कि इस तरह के सौंदर्यीकरण से न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा, बल्कि उत्तराखंड की ‘धार्मिक पर्यटन’ (Religious Tourism) की छवि भी वैश्विक स्तर पर सुधरेगी।
