Uttarakhand : खाद्य सुरक्षा के लिए धामी सरकार का ‘कवच’, SEOC में विशेषज्ञों की तैनाती से होगी सीधी निगरानी

देहरादून: वैश्विक परिस्थितियों और भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए उत्तराखंड की धामी सरकार ने प्रदेश की खाद्य एवं रसद व्यवस्था को अभेद्य बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर अब राज्य में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति और वितरण की चौबीसों घंटे निगरानी की जाएगी। इसके लिए उत्तराखंड राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) में विशेष अधिकारियों और विशेषज्ञों की तैनाती तत्काल प्रभाव से कर दी गई है।

निगरानी का नया ढांचा: SEOC बनेगा कंट्रोल रूम

राज्य सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुसार, देहरादून स्थित राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र अब केवल आपदा प्रबंधन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह खाद्य एवं रसद आपूर्ति का मुख्य केंद्र (नोडल पॉइंट) भी होगा।

मुख्य उद्देश्य और कार्यप्रणाली:

  • सतत निगरानी: तैनात अधिकारी प्रदेश के हर कोने में खाद्यान्न, एलपीजी और अन्य आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता पर पैनी नजर रखेंगे।

  • डेटा विश्लेषण: विशेषज्ञों द्वारा रसद से संबंधित सूचनाओं का नियमित संकलन और वैज्ञानिक विश्लेषण किया जाएगा ताकि किसी भी संभावित कमी को पहले ही भांपा जा सके।

  • विभागीय समन्वय: यह केंद्र विभिन्न विभागों के मध्य सेतु का कार्य करेगा, जिससे वितरण प्रणाली (PDS) में कोई बाधा न आए।

  • रोस्टर आधारित तैनाती: अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए एक सख्त रोस्टर बनाया गया है, जिसके तहत विशेषज्ञ प्रतिदिन स्थिति की समीक्षा करेंगे।

मुख्यमंत्री का संकल्प: “अभाव मुक्त होगा उत्तराखंड”

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस कदम को प्रदेशवासियों की बुनियादी सुविधाओं की सुरक्षा से जोड़ा है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि:

  1. निर्बाध आपूर्ति: किसी भी परिस्थिति में खाद्यान्न और एलपीजी जैसे आवश्यक संसाधनों की चेन नहीं टूटनी चाहिए।

  2. अफवाहों पर लगाम: मुख्यमंत्री ने जनता से अपील की है कि प्रदेश में खाद्यान्न का पर्याप्त भंडार मौजूद है, अतः किसी भी प्रकार की जमाखोरी या अफवाहों पर ध्यान न दें।

  3. त्वरित कार्रवाई: यदि कहीं भी आपूर्ति बाधित होती है, तो खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के साथ समन्वय कर तत्काल समाधान निकाला जाए।

जनता को क्या होगा लाभ?

इस विशेष तैनाती से न केवल रसद व्यवस्था सुदृढ़ होगी, बल्कि आपातकालीन स्थितियों (जैसे भारी वर्षा या बर्फबारी) के दौरान दुर्गम क्षेत्रों में भी राशन की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी। यह कदम प्रदेश की खाद्य सुरक्षा (Food Security) को एक डिजिटल और रणनीतिक मजबूती प्रदान करेगा।

धामी सरकार का यह निर्णय “प्रो-एक्टिव गवर्नेंस” का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जहाँ संकट आने का इंतज़ार करने के बजाय, उससे निपटने की पूर्व तैयारी को प्राथमिकता दी गई है।