उत्तराखंड में ईंधन माफियाओं पर बड़ी स्ट्राइक: 3 दिन में 280 ठिकानों पर छापेमारी, 74 सिलेंडर जब्त

देहरादून: प्रदेश में एलपीजी और ईंधन की सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए ‘खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग’ ने प्रदेशव्यापी महाभियान छेड़ दिया है। 10 से 12 मार्च 2026 तक चली इस विशेष प्रवर्तन कार्रवाई में विभाग ने रिकॉर्ड छापेमारी करते हुए कड़ा संदेश दिया है कि उपभोक्ताओं के हक पर डाका डालने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

तीन दिवसीय अभियान का रिपोर्ट कार्ड

आयुक्त (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले 72 घंटों में विभाग ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।

मुख्य आंकड़े विवरण
कुल निरीक्षण 280
छापेमारी के स्थान 58
दर्ज एफआईआर (FIR) 04
जब्त गैस सिलेंडर 74
अन्य जब्ती 01 कांटा (वजन उपकरण), 02 रिफिलिंग किट
वसूला गया जुर्माना ₹4600

कैसे चल रहा था अवैध खेल?

जांच में सामने आया कि कई स्थानों पर घरेलू गैस सिलेंडरों का व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा था। साथ ही, अवैध रिफिलिंग किट के जरिए छोटे सिलेंडरों में गैस भरकर ऊंचे दामों पर बेची जा रही थी। विभाग ने न केवल सिलेंडर जब्त किए हैं, बल्कि उन उपकरणों को भी कब्जे में लिया है जिनसे यह अवैध कारोबार संचालित हो रहा था।

सरकार की प्रतिबद्धता: ‘जीरो टॉलरेंस’

खाद्य आयुक्त ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशानुसार विभाग उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा:

  • सख्ती जारी रहेगी: यह अभियान केवल तीन दिनों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में भी सघन जांच जारी रहेगी।

  • कठोर कार्रवाई: कालाबाजारी और जमाखोरी के मामलों में सीधे कानूनी कार्रवाई (FIR) और जेल भेजने का प्रावधान किया जा रहा है।

  • उचित दर सुनिश्चित करना: सरकार का लक्ष्य है कि हर घर को निर्धारित दर पर ही ईंधन प्राप्त हो।

आम जनता से अपील

विभाग ने प्रदेश की जनता से भी इस अभियान में सहभागी बनने का आह्वान किया है। यदि आपके आस-पास कहीं भी:

  1. एलपीजी की कालाबाजारी हो रही हो,

  2. अवैध रूप से गैस की रिफिलिंग की जा रही हो,

  3. या निर्धारित दर से अधिक पैसे वसूले जा रहे हों,

तो इसकी सूचना तत्काल संबंधित जिला पूर्ति अधिकारी या विभागीय हेल्पलाइन पर दें। आपकी पहचान गुप्त रखी जाएगी और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

विभाग की इस सक्रियता ने यह साफ कर दिया है कि उत्तराखंड में अब उपभोक्ताओं का शोषण करने वालों की राह आसान नहीं होगी।

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