नई दिल्ली/देहरादून: मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली स्थित उत्तराखण्ड निवास में लैंड पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (LPAI) के अध्यक्ष श्री जयंत सिंह एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु भारत-नेपाल सीमा पर बुनियादी ढांचे का विकास और सीमावर्ती क्षेत्रों में व्यापारिक सुगमता को बढ़ाना रहा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सीमावर्ती क्षेत्रों का विकास न केवल सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह स्थानीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ भी है।
बनबसा लैंड पोर्ट: अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी का नया अध्याय
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने चम्पावत जनपद के बनबसा (गुदमी) क्षेत्र में निर्माणाधीन आधुनिक लैंड पोर्ट परियोजना की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे एशियन हाईवे से जोड़ा जा रहा है।
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महत्व: इसे अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी को सशक्त बनाने की दिशा में एक गेम-चेंजर माना जा रहा है।
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प्रभाव: एशियन हाईवे से जुड़ने के बाद नेपाल के साथ व्यापारिक रिश्ते और अधिक सुदृढ़ होंगे और माल की आवाजाही में समय की बचत होगी।
पिथौरागढ़ सीमा क्षेत्र का सुदृढ़ीकरण
मुख्यमंत्री ने पिथौरागढ़ जनपद के सीमावर्ती क्षेत्रों धारचूला और झूलाघाट में सीमा व्यापार और आवागमन को सुगम बनाने पर भी विशेष चर्चा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि इन क्षेत्रों में आधारभूत ढांचे (Infrastructure) को इस प्रकार विकसित किया जाए कि आम जनता को आवाजाही में कोई असुविधा न हो। मुख्यमंत्री ने जोर दिया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में सुदृढ़ ढांचा न केवल सुरक्षा के लिए आवश्यक है, बल्कि यह पर्यटन और स्थानीय व्यापार के लिए भी द्वार खोलता है।
स्थानीय उत्पादों और अर्थव्यवस्था पर जोर
मुख्यमंत्री श्री धामी ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि विकास कार्यों को स्थानीय आवश्यकताओं और जनहितों को प्राथमिकता देते हुए आगे बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा:
“जब हम सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं विकसित करते हैं, तो उसका सीधा लाभ स्थानीय उत्पादों को मिलना चाहिए। इससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और हमारे स्थानीय उत्पादों को एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय बाजार उपलब्ध हो सकेगा।”
समयबद्धता और गुणवत्ता के निर्देश
बैठक के अंत में मुख्यमंत्री ने लैंड पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया को निर्देशित किया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थानीय निवासियों की सुविधा हेतु चल रहे सभी कार्यों को समयबद्ध और सुव्यवस्थित ढंग से पूर्ण किया जाए। उन्होंने कहा कि कार्यों में देरी से न केवल लागत बढ़ती है, बल्कि स्थानीय जनता को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, जिसे स्वीकार नहीं किया जाएगा।
इस बैठक के माध्यम से उत्तराखण्ड सरकार ने एक बार फिर सीमावर्ती क्षेत्रों के एकीकृत विकास और भारत-नेपाल मैत्री संबंधों को व्यापारिक स्तर पर नई ऊंचाइयों पर ले जाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।
