विधानसभा सत्र: मुख्यमंत्री धामी ने तथ्यों के साथ विपक्ष को घेरा, विकास और सुधार का दिया मंत्र

विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी एक अलग ही तेवर में नजर आए। सदन की कार्यवाही के दौरान उन्होंने विपक्ष के विधायकों द्वारा उठाए गए विभिन्न सवालों का न केवल बेबाकी से जवाब दिया, बल्कि तथ्यों के साथ अपनी सरकार का पक्ष भी मजबूती से रखा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार जनहित के मुद्दों पर पूरी तरह संवेदनशील है और राज्य के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है।

आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रीयों के प्रति संवेदनशीलता

आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रीयों के वेतन वृद्धि के सवाल पर मुख्यमंत्री ने सकारात्मक रुख अपनाते हुए कहा कि उनकी सरकार ने पूर्व में भी मानदेय बढ़ाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। उन्होंने स्वीकार किया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रीयों की सरकार से हमेशा अपेक्षाएं रहती हैं, जो स्वाभाविक भी है। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि भविष्य में भी उनकी जायज मांगों और मानदेय वृद्धि की दिशा में सरकार ठोस और सकारात्मक निर्णय लेगी, ताकि जमीनी स्तर पर काम करने वाली इन बहनों को उचित सम्मान और आर्थिक संबल मिल सके।

शिक्षा में सुधार और ‘कबीलाई मानसिकता’ पर प्रहार

मदरसा शिक्षा और अल्पसंख्यक बच्चों के भविष्य पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि प्रदेश में पुरानी कुप्रथाओं और ‘कबीलाई मानसिकता’ को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ना है। इसी क्रम में, उन्हें भी नई शिक्षा नीति (NEP) के दायरे में लाया जाएगा ताकि वे आधुनिक शिक्षा प्राप्त कर सकें और उन्हें जीवन में समान अवसर मिलें। मुख्यमंत्री ने विपक्षी जनप्रतिनिधियों को भी उनके दायित्व की याद दिलाते हुए कहा कि समाज में सही संदेश पहुंचाना हम सबकी जिम्मेदारी है, जबकि सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र पर अडिग है।

चारधाम यात्रा पर राजनीति को बताया दुर्भाग्यपूर्ण

चारधाम यात्रा को लेकर मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस अपने संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थ की पूर्ति के लिए विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा की छवि को धूमिल करने का प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सनातन आस्था के इन महान केंद्रों और यात्रा की व्यवस्थाओं पर बेवजह की राजनीति करना न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि यह राज्य की आर्थिक और सांस्कृतिक पहचान को चोट पहुँचाने जैसा है। उन्होंने विपक्ष को नसीहत दी कि आस्था के प्रतीकों पर राजनीति करने के बजाय वे राज्य के विकास में रचनात्मक सहयोग दें।

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