विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने मदरसा शिक्षा को लेकर अपनी सरकार का विजन अत्यंत स्पष्ट और कड़े शब्दों में साझा किया। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि प्रदेश में मदरसा बोर्ड को भंग कर अल्पसंख्यक बच्चों को सीधे तौर पर आधुनिक शिक्षा प्रणाली से जोड़ा जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों के हाथों में केवल पारंपरिक किताबें ही नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक और विज्ञान के सूत्र भी हों।
आधुनिक शिक्षा और तकनीक पर जोर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि शिक्षा के मामले में समाज को अल्पसंख्यक या बहुसंख्यक के आधार पर नहीं बांटा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मदरसे के बच्चों को भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइंस एंड टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और अन्य आधुनिक विषयों का लाभ मिलना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा, “हम चाहते हैं कि हमारे राज्य का हर बच्चा, चाहे वह किसी भी संस्थान में पढ़ रहा हो, विश्वस्तरीय शिक्षा प्राप्त करे और देश के भविष्य में अपना योगदान दे।”
कुप्रथाओं और कबीलाई मानसिकता पर प्रहार सदन में अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने उन पुरानी कुप्रथाओं और ‘कबीलाई मानसिकता’ पर तीखा प्रहार किया जो बच्चों के विकास में बाधा बनती हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में अब ऐसी सोच को कोई स्थान नहीं दिया जाएगा। सरकार का संकल्प ‘सबका साथ, सबका विकास’ है, जिसके तहत मदरसा शिक्षा को मुख्यधारा में लाने के लिए उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया जा रहा है।
1 जुलाई से लागू होगा नया बदलाव धामी सरकार के इस निर्णय के अनुसार, 1 जुलाई 2026 से राज्य के सभी मदरसे उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद (UBSE) के पाठ्यक्रम का पालन करेंगे। मुख्यमंत्री ने साफ संदेश दिया कि जो संस्थान इन नियमों का पालन नहीं करेंगे और बच्चों को आधुनिक शिक्षा से वंचित रखेंगे, उन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह कदम अल्पसंख्यक समाज के बच्चों को समान अवसर प्रदान करने और उन्हें उज्ज्वल भविष्य की ओर ले जाने की दिशा में एक ‘गेम-चेंजर’ माना जा रहा है।
