पटना | बिहार सरकार ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने और सरकारी स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता सुधारने के लिए एक बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। नीतीश सरकार ने सरकारी विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों द्वारा कोचिंग, निजी ट्यूशन और किसी भी प्रकार के व्यावसायिक संस्थानों में पढ़ाने की गतिविधियों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है।
इस संबंध में माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने गुरुवार (11 जून) को राज्य के सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) को एक आधिकारिक पत्र जारी कर ऐसे शिक्षकों के विरुद्ध कठोर अनुशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
पर्याप्त शिक्षकों की तैनाती के बाद जवाबदेही तय
शिक्षा विभाग द्वारा जारी निर्देश में कहा गया है कि पिछले कुछ वर्षों के भीतर राज्य के प्रारंभिक (Primary) से लेकर उच्च माध्यमिक (Higher Secondary) विद्यालयों तक रिकॉर्ड संख्या में नए शिक्षकों की नियुक्ति की गई है।
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शिक्षकों की कमी दूर: वर्तमान में बिहार के अधिकांश सरकारी विद्यालयों में पर्याप्त संख्या में शिक्षक उपलब्ध हैं।
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पूरी जवाबदेही जरूरी: शिक्षकों की संख्या पर्याप्त होने के बाद अब यह बेहद आवश्यक है कि सभी शिक्षक अपने-अपने विद्यालयों के विद्यार्थियों की पढ़ाई के प्रति पूरी तरह जवाबदेह रहें और उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करें।
पूरी ऊर्जा केवल स्कूली शिक्षा पर केंद्रित करें शिक्षक
निदेशक ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि सरकार द्वारा शिक्षकों की शैक्षणिक गुणवत्ता को लगातार अपग्रेड करने के लिए समय-समय पर विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण (Training) कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। ऐसे में बच्चों के सर्वांगीण विकास और स्कूलों में बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार करने के लिए यह बेहद जरूरी है कि शिक्षक अपनी पूरी ऊर्जा और समय केवल और केवल विद्यालयी शिक्षा पर ही केंद्रित करें।
शिकायतें मिलने के बाद शिक्षा विभाग का सख्त एक्शन
क्यों लिया गया यह फैसला?
शिक्षा विभाग के पास लगातार ऐसी शिकायतें सामने आ रही थीं कि कई सरकारी शिक्षक विद्यालय परिसर के भीतर अथवा बाहरी स्थानों पर संचालित कोचिंग सेंटरों, निजी ट्यूशन और अन्य व्यावसायिक संस्थानों से जुड़े हुए हैं। इस व्यावसायिक संलिप्तता के कारण उनके मूल विद्यालयों में अध्ययनरत गरीब विद्यार्थियों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही थी और पूरी शिक्षा व्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ रहा था।
इसी को ध्यान में रखते हुए सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को अपने-अपने जिलों में औचक निरीक्षण करने और यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि कोई भी सरकारी शिक्षक किसी भी रूप में निजी शिक्षण कार्य न करे।
आचार संहिता का उल्लंघन माना जाएगा: सीधे निलंबन की तैयारी
माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने पत्र के जरिए स्पष्ट और दो टूक चेतावनी दी है:
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कोड ऑफ कंडक्ट का उल्लंघन: यदि कोई भी सरकारी शिक्षक स्कूल के समय या स्कूल के बाद किसी कोचिंग या निजी ट्यूशन में पढ़ाता हुआ पाया जाता है, तो इसे शिक्षकों के लिए निर्धारित ‘आचार संहिता’ (Code of Conduct) का सीधा उल्लंघन माना जाएगा।
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कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई: ऐसे मामलों में बिना किसी ढिलाई के संबंधित शिक्षक के खिलाफ सेवा नियमावली के तहत कठोर विभागीय और अनुशासनात्मक कार्रवाई (Disciplinary Action) की जाएगी।
विशेषज्ञों की राय: शिक्षा व्यवस्था में आएगा सुधार
बिहार शिक्षा विभाग के इस कड़े निर्देश को सरकारी विद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता, शिक्षकों की उपस्थिति और बच्चों के प्रति उनकी जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण और क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है। जानकारों का मानना है कि इस रोक के बाद शिक्षक अब अपना पूरा समय सरकारी स्कूलों के बच्चों को दे पाएंगे, जिससे सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों के नतीजों में व्यापक सुधार देखने को मिलेगा।
