मुख्यमंत्री धामी ने बनबसा में किया सामूहिक योगाभ्यास, राज्य की पहली योग नीति और शारदा कॉरिडोर से चमकेगा चम्पावत

बनबसा (चम्पावत)। 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर उत्तराखण्ड के चम्पावत जिले के बनबसा में राज्य स्तरीय मुख्य कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस विशेष अवसर पर मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने बड़ी संख्या में उपस्थित योग साधकों, सशस्त्र सीमा बल (SSB) के जवानों, छात्र-छात्राओं, युवाओं, मातृशक्ति और वरिष्ठ नागरिकों के साथ सामूहिक योगाभ्यास किया। माँ शारदा की पावन भूमि पर आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने सभी प्रदेशवासियों को योग दिवस की शुभकामनाएं दीं और जीवन में योग के महत्व को रेखांकित किया।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि योग केवल एक शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह मन, शरीर और आत्मा के बीच सामंजस्य स्थापित करने वाली एक संपूर्ण जीवन पद्धति है। वर्तमान समय की भागदौड़, तनाव, अवसाद और अस्वस्थ जीवनशैली से उत्पन्न चुनौतियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि योग एक बेहद प्रभावी प्राकृतिक उपचार प्रणाली के रूप में काम कर रहा है। नियमित योग और प्राणायाम के अभ्यास से न सिर्फ रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बढ़ती है, बल्कि मानसिक एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का भी संचार होता है।

वैश्विक पहचान और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ का संदेश

मुख्यमंत्री ने देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उनके दूरदर्शी नेतृत्व के कारण ही आज भारतीय संस्कृति के मूल मंत्र “वसुधैव कुटुम्बकम्” और “सर्वे भवन्तु सुखिनः” का संदेश वैश्विक स्तर पर स्थापित हुआ है। आज विश्व के 190 से अधिक देशों में करोड़ों लोग योग को अपनाकर स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं, जिसने पूरी मानवता को एक सूत्र में पिरोने का काम किया है।

देश की पहली योग नीति और वित्तीय प्रोत्साहन

उत्तराखण्ड को योग, अध्यात्म और साधना की प्राचीन भूमि बताते हुए मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार के संकल्पों को साझा किया। उन्होंने घोषणा की कि राज्य सरकार उत्तराखण्ड को योग एवं वेलनेस की वैश्विक राजधानी के रूप में स्थापित करने के लिए निरंतर काम कर रही है। इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए राज्य सरकार द्वारा देश की पहली योग नीति लागू की गई है। इस नीति के तहत:

  • योग एवं ध्यान केंद्रों की स्थापना के लिए: अधिकतम 20 लाख रुपये तक की सब्सिडी का प्रावधान किया गया है।

  • शोध एवं अध्ययन के लिए: योग, ध्यान और प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए 10 लाख रुपये तक का अनुदान दिया जा रहा है।

  • योग हब का विकास: प्रदेश में पांच नए योग हब विकसित किए जा रहे हैं, साथ ही सभी आयुष हेल्थ एवं वेलनेस सेंटरों में योग सेवाओं को अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराया जा रहा है।

3300 करोड़ की शारदा कॉरिडोर परियोजना से विकास

बनबसा में इस राज्य स्तरीय कार्यक्रम को आयोजित करने के पीछे मुख्य उद्देश्य शारदा नदी के तट पर योग और आध्यात्मिक साधना को व्यापक रूप से बढ़ावा देना है। मुख्यमंत्री ने बताया कि क्षेत्र को पर्यटन और अध्यात्म के मानचित्र पर नई पहचान देने के लिए शारदा कॉरिडोर परियोजना पर तेजी से काम चल रहा है। लगभग 3300 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना के अंतर्गत टनकपुर से बनबसा तक शारदा रिवर फ्रंट सहित विभिन्न धार्मिक और पर्यटन स्थलों को संवारा जा रहा है। इसके प्रथम चरण में 179 करोड़ रुपये की लागत से शारदा घाट के पुनर्विकास कार्यों का शुभारंभ भी किया जा चुका है।

युवाओं से नशामुक्त और अनुशासित जीवन की अपील

कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से युवा पीढ़ी से आह्वान किया कि वे योग को केवल एक दिन के उत्सव तक सीमित न रखें, बल्कि इसे अपनी दैनिक जीवनशैली का अभिन्न अंग बनाएं। उन्होंने युवाओं से नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रहने और स्वस्थ, अनुशासित व सकारात्मक जीवन अपनाने की अपील की।

इस भव्य राज्य स्तरीय कार्यक्रम के दौरान कैबिनेट मंत्री व जनपद प्रभारी मंत्री श्री भरत चौधरी, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री आनंद सिंह अधिकारी सहित शासन और प्रशासन के तमाम वरिष्ठ अधिकारी, कुमाऊं कमिश्नर श्री दीपक रावत, सचिव आयुष श्रीमती रंजना राजगुरु, आईजी कुमाऊं श्रीमती निवेदिता कुकरेती, चम्पावत के जिलाधिकारी श्री मनीष कुमार और पुलिस अधीक्षक रेखा यादव सहित कई अन्य जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे।

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