हरिद्वार। हरिद्वार पुलिस द्वारा अपराध और अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत कोतवाली श्यामपुर पुलिस को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। पुलिस ने देश की अर्थव्यवस्था को कड़ा नुकसान पहुंचाने वाले एक बेहद शातिर और संगठित नकली नोट छापने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई के तहत पुलिस टीम ने गिरोह के तीन सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से भारी मात्रा में छपे हुए जाली नोट, दो आधुनिक प्रिंटर, लैपटॉप और नकली नोट बनाने के अन्य उपकरण बरामद किए हैं।
पिछले एनकाउंटर और सुराग से मिली बड़ी कामयाबी
इस बड़े खुलासे की कड़ी दो दिन पहले ही जुड़ गई थी, जब 27 जून 2026 को श्यामपुर पुलिस ने 52,500 रुपये के नकली नोटों के साथ तीन आरोपियों को दबोचा था। पकड़े गए उन आरोपियों से हुई गहन पूछताछ और विवेचना के दौरान पुलिस को गिरोह के मुख्य नेटवर्क और उनके अगले कदम के कई अहम सुराग मिले। इसी जांच को आगे बढ़ाते हुए 29 जून 2026 को पुलिस टीम को एक और पुख्ता सूचना मिली कि गिरोह के कुछ सदस्य एक क्विड कार (संख्या UK-08BG-6798) में नकली नोट छापने के सारे उपकरण और तैयार जाली नोटों को ठिकाने लगाने के उद्देश्य से बड़ापुर, बिजनौर (उत्तर प्रदेश) की तरफ भागने की फिराक में हैं।
सूचना को गंभीरता से लेते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हरिद्वार के सख्त निर्देशों पर पुलिस टीम ने तत्काल लालढांग तिराहे के पास अपनी घेराबंदी मजबूत की। जैसे ही संदिग्ध क्विड कार वहां पहुंची, पुलिस ने उसे रोककर तलाशी ली। कार के अंदर सवार तीनों आरोपियों को मौके पर ही हिरासत में ले लिया गया और उनके पास से नोट छापने का पूरा सेटअप बरामद हुआ।
छापने के लिए असली नोट और सॉफ्टवेयर का करते थे इस्तेमाल
बरामदगी के विवरण के अनुसार, पुलिस ने मौके से एक लैपटॉप मय चार्जर, एक एचपी कंपनी का प्रिंटर, एक कैनन कंपनी का प्रिंटर और पांच मोबाइल फोन जब्त किए हैं। इसके अलावा जाली नोट तैयार करने के लिए मास्टर कॉपी के रूप में इस्तेमाल किए जाने वाले 500 रुपये के चार असली नोट भी बरामद हुए। सबसे बड़ी बरामदगी 25 पेपरशीट की रही, जिस पर करीब 50 से 52 हजार रुपये के मूल्य के 500-500 के नकली नोट छपे हुए थे, जिनकी केवल कटिंग होनी बाकी थी। इसके साथ ही गांधी जी के 200 वॉटरमार्क पेपर भी बरामद किए गए हैं।
पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने नकली नोट छापने के अपने हाईटेक तरीके का सनसनीखेज खुलासा किया। गिरोह का मुख्य सदस्य गुलजार ऑनलाइन माध्यम से नकली नोट छापने वाला विशेष पेपर मंगवाता था। इसके बाद शगुन जोशी असली नोट की फोटो खींचकर विभिन्न सॉफ्टवेयर और मोबाइल ऐप्स की मदद से उसकी क्वालिटी और पिक्सल को बढ़ाता था ताकि प्रिंट होने पर नकली नोट का लुक बिल्कुल असली जैसा आए।
आरोपी देवेंद्र ने कुबूल किया कि इससे पहले भी उसने और गुलजार ने मिलकर बड़ापुर (बिजनौर) में करीब एक लाख रुपये के नकली नोट छापे थे, जिनमें से कुछ नोट खराब हो गए थे लेकिन करीब 60 हजार रुपये के नकली नोट वे बाजार में सफलतापूर्वक खपा चुके थे। इस कामयाबी से जब उनका लालच और बढ़ा, तो उन्होंने बड़े पैमाने पर काम करने के लिए देवेंद्र के जीजा शिवम और सॉफ्टवेयर एक्सपर्ट शगुन जोशी को भी अपने गैंग में शामिल कर लिया।
वन कर्मियों से मारपीट की जांच में खुला राज
इस पूरे मामले पर हरिद्वार की एसपी क्राइम निशा यादव ने बताया कि हाल ही में हरिद्वार के श्यामपुर क्षेत्र में वन कर्मियों के साथ मारपीट की एक घटना सामने आई थी। उस दौरान कुछ संदिग्ध नकली नोट भी बरामद हुए थे। जब पुलिस ने इस मामले की गहराई से जांच शुरू की तो पता चला कि यह कोई साधारण मारपीट नहीं बल्कि एक बड़े संगठित जाली नोट छापने वाले गिरोह से जुड़ी कड़ी है। जब ये लोग कार में नोट छापने का सारा सामान समेटकर उत्तर प्रदेश भाग रहे थे, तभी टीम ने इन्हें रंगे हाथों दबोच लिया।
पुलिस की गिरफ्त में आए इन आरोपियों की पहचान देवेंद्र कुमार (उम्र 31 वर्ष) पुत्र अशोक कुमार निवासी सरदारपुर छांमली, बिजनौर (यूपी), गुलजार अहमद (उम्र 30 वर्ष) पुत्र अब्दुल हमीद निवासी टांडा सिक्कावाला, बिजनौर (यूपी) और स्थानीय मददगार शगुन जोशी (उम्र 26 वर्ष) पुत्र पवन जोशी निवासी लालढांग, श्यामपुर (हरिद्वार) के रूप में हुई है। हरिद्वार पुलिस अब इस गिरोह के बाकी बचे सदस्यों और बाजार में सप्लाई हो चुके नोटों के नेटवर्क को खंगालने में जुट गई है।
