देहरादून। उत्तराखण्ड सरकार राज्य में योग और वेलनेस (Wellness) पर्यटन को एक नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए पूरी तरह तैयार है। इस क्षेत्र को बढ़ावा देने और निजी निवेशकों को आकर्षित करने के उद्देश्य से राज्य सरकार एक नई योग पॉलिसी लेकर आई है, जिसके तहत होटल, होम स्टे और वेलनेस सेंटर खोलने वालों को भारी सब्सिडी और वित्तीय मदद दी जाएगी। जैसा कि आपके द्वारा साझा की गई फाइल IMG_1891.jpeg की रिपोर्ट में सामने आया है, इन सभी सुविधाओं का लाभ आसानी से पहुंचाने के लिए सरकार आगामी जुलाई महीने में एक समर्पित पोर्टल भी लॉन्च करने जा रही है।
युवाओं को रोजगार और निजी क्षेत्र को प्रोत्साहन
इस नई योग नीति का मुख्य फोकस राज्य के युवाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर पैदा करना और राज्य की आर्थिकी को मजबूत करना है। सरकार न केवल नए सेंटर स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता देगी, बल्कि वहां योग प्रशिक्षकों (Trainers) की तैनाती में भी बड़ा सहयोग करेगी। इसके तहत नए वेलनेस व योग केंद्र खोलने के लिए निवेशकों को प्रोत्साहित करने का बड़ा निर्णय लिया गया है।
भौगोलिक स्थिति के आधार पर मिलेगी सब्सिडी
नीति के तहत नए योग और वेलनेस सेंटर स्थापित करने के लिए प्रोजेक्ट लागत के आधार पर मिलने वाले अनुदान (Grant) को दो हिस्सों में विभाजित किया गया है:
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पर्वतीय क्षेत्रों के लिए: पहाड़ के दुर्गम और ग्रामीण इलाकों में नए सेंटर खोलने पर प्रोजेक्ट लागत का 50 प्रतिशत या अधिकतम ₹20 लाख तक का अनुदान दिया जाएगा।
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मैदानी क्षेत्रों के लिए: मैदानी इलाकों में प्रोजेक्ट लगाने पर लागत का 25 प्रतिशत या अधिकतम ₹10 लाख तक की वित्तीय सहायता (अनुदान) दी जाएगी।
होम स्टे और होटलों को वेलनेस सेंटर बनाने में मदद
उत्तराखण्ड आने वाले पर्यटकों को उनके ठहरने के स्थान पर ही योग की प्रामाणिक सुविधा मिले, इसके लिए निजी होम स्टे और होटलों को भी वेलनेस सेंटर में तब्दील करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
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प्रशिक्षकों के लिए वित्तीय मदद: इसके तहत निवेशकों को न केवल बुनियादी ढांचे के लिए सब्सिडी मिलेगी, बल्कि रिसॉर्ट्स, होटल, होम स्टे, स्कूलों और कॉलेजों में नियुक्त किए जाने वाले योग प्रशिक्षकों के लिए प्रति सत्र (Session) ₹250 तक की प्रतिपूर्ति सरकार द्वारा की जाएगी।
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रिसर्च के लिए ₹10 लाख का ग्रांट: योग, ध्यान और प्राकृतिक चिकित्सा (Naturopathy) के क्षेत्र में रिसर्च और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालयों, स्वास्थ्य संगठनों और गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) को प्रति परियोजना ₹10 लाख तक का अनुदान देने की व्यवस्था की गई है।
अलग आयुर्वेद निदेशालय का होगा गठन
सचिव आयुष, रंजना राजगुरु का बयान:
“योग नीति को धरातल पर उतारने के लिए जुलाई में पोर्टल लॉन्च किया जा रहा है। इसके साथ ही राज्य में एक अलग आयुर्वेद निदेशालय भी गठित किया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि सरकारी और निजी दोनों सेक्टरों में योग व वेलनेस को संयुक्त रूप से बढ़ावा देकर राज्य में स्वरोजगार और आर्थिकी को तेजी से बढ़ाया जाए।”
सेहत के लिए क्यों जरूरी है योग और वेलनेस?
IMG_1891.jpeg में नियमित योग और ध्यान के कई महत्वपूर्ण शारीरिक व मानसिक लाभ भी साझा किए गए हैं, जो इस नीति के महत्व को और बढ़ाते हैं:
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शारीरिक मजबूती: योगासन करने से मांसपेशियां फैलती हैं, जिससे शरीर का लचीलापन, संतुलन और मजबूती बढ़ती है।
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बेहतर ब्लड सर्कुलेशन: नियमित अभ्यास से रक्त संचार बेहतर होता है, जिससे ब्लड प्रेशर और शरीर की सूजन को कम करने में मदद मिलती है।
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जोड़ों के दर्द से राहत: पीठ दर्द और गठिया जैसी जोड़ों की गंभीर समस्याओं में योग बेहद फायदेमंद साबित होता है।
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तनाव और चिंता से मुक्ति: गहरी सांस लेने और मेडिटेशन (ध्यान) लगाने से मानसिक तनाव और चिंता पूरी तरह दूर होती है।
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मानसिक स्पष्टता: योग मस्तिष्क को शांत करता है, जिससे काम में फोकस और मानसिक स्पष्टता बढ़ती है।
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सकारात्मक ऊर्जा: यह दिमाग में सेरोटोनिन के स्तर को बढ़ाता है, जिससे शरीर का ऊर्जा स्तर ऊंचा रहता है और सकारात्मक भावनाएं पैदा होती हैं।
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अनिद्रा और वजन पर नियंत्रण: शांत मन के कारण अनिद्रा (Insomnia) की समस्या दूर होती है और एक सक्रिय जीवनशैली से वजन घटाने में भी आसानी होती है।
यह नई नीति न केवल देवभूमि उत्तराखण्ड को वैश्विक पटल पर एक प्रमुख ‘वेलनेस डेस्टिनेशन’ के रूप में स्थापित करेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर युवाओं और आर्थिकी के लिए गेम-चेंजर साबित होगी।
