देहरादून: मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य सेवक सदन में उत्तराखण्ड हथकरघा एवं हस्तशिल्प विकास परिषद द्वारा आयोजित 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह में शिरकत की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने बिच्छू घास (नेटल फाइबर) से निर्मित पारंपरिक वस्त्र खरीदकर स्थानीय कारीगरों का उत्साहवर्धन किया और उत्कृष्ट बुनकरों को सम्मानित किया।
उत्तराखण्ड की समृद्ध लोक विरासत और जीआई टैग
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड के हस्तशिल्प में प्रदेश की संस्कृति और लोकजीवन की आत्मा बसती है। राज्य के पारंपरिक उत्पादों की अपनी विशिष्ट पहचान है:
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प्रमुख उत्पाद: हर्षिल की ऊनी शॉल, मुनस्यारी व धारचूला का थुलमा, अल्मोड़ा की ट्वीड, छिनका की पंखी, रंगवाली पिछौड़ा, रिंगाल शिल्प और बिच्छू घास के उत्पाद।
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वैश्विक पहचान: राज्य के कई पारंपरिक उत्पादों को जीआई टैग (GI Tag) मिलने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्तराखण्ड की ब्रांड वैल्यू मजबूत हुई है।
‘वोकल फॉर लोकल’ और सरकारी योजनाएं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘लोकल टू ग्लोबल’ के विजन को आगे बढ़ाते हुए राज्य सरकार कारीगरों के कल्याण के लिए ठोस कदम उठा रही है:
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मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना: योजना के तहत अब तक 278 बुनकरों और शिल्पियों को लगभग ₹4 करोड़ से अधिक का ऋण और ₹1 करोड़ से अधिक की सब्सिडी दी गई है, जिससे करीब 834 लोगों को रोजगार मिला है।
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तकनीक व विपणन: राष्ट्रीय हथकरघा विकास कार्यक्रम के माध्यम से आधुनिक मशीनें, डिजाइन प्रशिक्षण, कॉमन फैसिलिटी सेंटर और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
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सामाजिक सुरक्षा: वरिष्ठ कारीगरों के लिए ‘शिल्पकार पेंशन योजना’ और उत्कृष्ट कार्य के लिए ‘उत्तराखण्ड राज्य शिल्प रत्न’ जैसे पुरस्कारों से सम्मानित किया जा रहा है।
“जब भी कोई वस्तु खरीदें, तो उसके स्थानीय विकल्प (Local Options) पर अवश्य विचार करें। स्थानीय और स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देने से ही हमारे बुनकर और शिल्पकार आत्मनिर्भर बनेंगे।”— श्री पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री
कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री श्री भरत सिंह चौधरी, विधायक श्रीमती सविता कपूर, सचिव श्री विनय शंकर पाण्डेय सहित बड़ी संख्या में बुनकर, उद्यमी और महिला हस्तशिल्पी उपस्थित रहे।
