देहरादून, 7 सितंबर: उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की जनसभा के बाद सामने आए कथित ‘शुद्धिकरण’ विवाद को लेकर राजनीति गरमाई हुई थी, जिस पर अदालत के रुख के बाद विराम लगता दिख रहा है। नैनीताल स्थित उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने इस मामले में दायर जनहित याचिका को निस्तारित कर दिया है। राज्य सरकार और पुलिस की ओर से दी गई जानकारियों और जारी निष्पक्ष जांच के आश्वासन से संतुष्ट होते हुए कोर्ट ने माना कि इस मामले में फिलहाल किसी न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।
अदालत के इस रुख को राजनीतिक विश्लेषक कांग्रेस के लिए एक बड़े झटके के रूप में देख रहे हैं। आरोप लग रहे हैं कि कांग्रेस इस घटना को आधार बनाकर राज्य में दलित और सवर्ण समुदायों के बीच जातीय विभाजन पैदा करने और अपने राजनीतिक हितों को साधने की कोशिश कर रही थी, जिस पर अब पानी फिर गया है।
क्या था पूरा विवाद?
बीती 8 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की एक बड़ी जनसभा आयोजित की गई थी। इसके कुछ दिनों बाद, 11 अगस्त को ‘श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास’ नामक संगठन के सदस्यों ने आयोजन स्थल पर गंगाजल छिड़ककर और धार्मिक अनुष्ठान कर सफाई का काम किया।
आयोजकों और स्थानीय लोगों का स्पष्ट कहना था कि सभा के दौरान कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा धार्मिक स्थल की मर्यादा के विपरीत आचरण और बयानबाजी की गई थी। चूंकि रामलीला मैदान एक पवित्र सांस्कृतिक स्थान है, इसलिए वहां सामान्य सफाई और धार्मिक मर्यादा बनाए रखने के लिए अनुष्ठान किया गया था। इसका किसी जाति विशेष या कांग्रेस अध्यक्ष की पृष्ठभूमि से कोई लेना-देना नहीं था।
कांग्रेस के ‘चुनावी स्टंट’ पर फिरा पानी
स्थानीय स्तर पर मामला शांत होने के बावजूद कांग्रेस पार्टी ने इसे राष्ट्रीय स्तर पर तूल देने की कोशिश की। पार्टी के शीर्ष नेताओं ने इसे सीधे तौर पर दलित समाज के अपमान से जोड़ते हुए संसद (राज्यसभा) से लेकर दिल्ली तक जमकर बयानबाजी की और राजनीतिक माहौल गरमाने का प्रयास किया।
हालांकि, उत्तराखंड पुलिस द्वारा पूरे प्रकरण की निष्पक्षता से की जा रही जांच और उस पर हाईकोर्ट की मुहर के बाद यह साफ हो गया है कि कानून अपना काम कर रहा है। अदालत के रुख के बाद कांग्रेस द्वारा इस मुद्दे के जरिए राज्य का सामाजिक ताना-बाना बिगाड़ने और चुनावी रोटियां सेंकने के मंसूबों पर पूरी तरह विराम लग गया है।
