1320 मेगावाट थर्मल पावर करार पर कांग्रेस के सवालों का महेंद्र भट्ट ने दिया जवाब, बोले—तेलंगाना-कर्नाटक में अदाणी से करार तो उत्तराखंड में विरोध क्यों?

देहरादून। उत्तराखंड में 1320 मेगावाट कोयला आधारित बिजली खरीद के करार को लेकर कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा द्वारा उठाए गए सवालों पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने पलटवार किया है। भट्ट ने कांग्रेस से उसके शासनकाल में किए गए ऊर्जा क्षेत्र के समझौतों का हिसाब मांगते हुए कहा कि तेलंगाना और कर्नाटक जैसे कांग्रेस शासित राज्यों में अदाणी समूह के साथ निवेश और ऊर्जा से जुड़े करार किए गए हैं, तो उत्तराखंड में इसी समूह से जुड़े बिजली समझौते का विरोध किस आधार पर किया जा रहा है, यह कांग्रेस को स्पष्ट करना चाहिए।

हाल ही में उत्तराखंड कैबिनेट ने 1320 मेगावाट कोयला आधारित बिजली की 25 वर्षों के लिए खरीद को मंजूरी दी है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार बिजली की दर करीब ₹5.746 प्रति यूनिट तय की गई है और यूपीसीएल को अदाणी पावर के साथ पावर सप्लाई एग्रीमेंट समेत आवश्यक प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए अधिकृत किया गया है।

कांग्रेस के शासनकाल के बिजली करार पर उठाए सवाल

महेंद्र भट्ट ने कहा कि कांग्रेस शासन के दौरान गैस आधारित बिजली के लिए ₹31.71 प्रति यूनिट तक की दर तय की गई थी। उनके मुताबिक यह व्यवस्था महंगी और अल्पकालिक थी।

भट्ट ने दावा किया कि इसके विपरीत वर्तमान भाजपा सरकार ने करीब ₹5.74 प्रति यूनिट की दर से 25 वर्षों के लिए कोयला आधारित बिजली की दीर्घकालिक व्यवस्था सुनिश्चित की है। उन्होंने कहा कि इससे राज्य की भविष्य की बिजली जरूरत को स्थिर और भरोसेमंद आधार मिल सकेगा।

हालांकि उपलब्ध रिपोर्टों में ₹5.746 प्रति यूनिट की दर और 25 साल की अवधि की पुष्टि होती है, जबकि ₹31.71 प्रति यूनिट का आंकड़ा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के वर्तमान बयान में किए गए दावे के रूप में सामने आया है।

25 वर्षों के लिए ऊर्जा सुरक्षा का दावा

भट्ट ने कहा कि 1320 मेगावाट बिजली की दीर्घकालिक व्यवस्था का उद्देश्य राज्य की भविष्य की बिजली मांग को पूरा करना है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में बिजली व्यवस्था का बड़ा हिस्सा जल विद्युत पर निर्भर है, लेकिन मानसून, सूखे और प्राकृतिक आपदाओं जैसी परिस्थितियों में हाइड्रो पावर के उत्पादन में उतार-चढ़ाव हो सकता है।

उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा भी मौसम पर निर्भर है। ऐसे में बेस-लोड के रूप में थर्मल पावर बिजली आपूर्ति को स्थिरता देने में भूमिका निभा सकती है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के मुताबिक सरकार किसी एक ऊर्जा स्रोत पर निर्भर रहने के बजाय हाइड्रो, सोलर, स्मॉल हाइड्रो, पंप स्टोरेज और थर्मल सहित अलग-अलग स्रोतों का संतुलन बनाने पर काम कर रही है।

उत्तराखंड में नहीं लगेगा पावर प्लांट

भट्ट ने कहा कि प्रस्तावित 1320 मेगावाट बिजली उत्पादन की व्यवस्था उत्तराखंड में थर्मल पावर प्लांट लगाने के बजाय बाहर स्थित संयंत्र से बिजली खरीदने के माध्यम से की जा रही है। सरकार की ओर से पहले भी कहा गया है कि खरीद का उद्देश्य राज्य की बढ़ती बिजली मांग और दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

उन्होंने दावा किया कि इससे उत्तराखंड पर थर्मल पावर प्लांट के लिए जमीन और पर्यावरण संबंधी अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा।

अदाणी समूह को लेकर कांग्रेस से सवाल

महेंद्र भट्ट ने कांग्रेस के आरोपों पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक ओर कांग्रेस उत्तराखंड में अदाणी समूह से जुड़े पावर करार का विरोध कर रही है, वहीं कांग्रेस शासित राज्यों में इसी समूह के साथ निवेश और ऊर्जा परियोजनाओं को लेकर समझौते किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस को यह स्पष्ट करना चाहिए कि यदि अदाणी समूह के साथ किसी अन्य कांग्रेस शासित राज्य में करार हो सकता है, तो उत्तराखंड में बिजली खरीद के इस समझौते को लेकर अलग रुख क्यों अपनाया जा रहा है।

महेंद्र भट्ट ने कहा

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस को तथ्यहीन राजनीतिक आरोप लगाने के बजाय यह बताना चाहिए कि उसके शासनकाल में महंगी गैस आधारित बिजली के करार किन परिस्थितियों में किए गए और आज उन्हीं फैसलों का आर्थिक भार राज्य को क्यों उठाना पड़ रहा है।

गौरतलब है कि 1320 मेगावाट बिजली खरीद को लेकर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने निविदा प्रक्रिया में बदलाव और अदाणी पावर को लाभ पहुंचाने के आरोप लगाए हैं। खेड़ा ने 25 वर्षों में संभावित वित्तीय दायित्व को लेकर भी सवाल उठाए हैं। ये कांग्रेस के आरोप हैं, जबकि राज्य सरकार और भाजपा ने प्रक्रिया को प्रतिस्पर्धी निविदा और दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ा निर्णय बताया है।