जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार: उत्तराखंड में न्याय पंचायत स्तर पर गूँज रही सुशासन की धमक

देहरादून: उत्तराखंड के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों के लिए अब सरकारी सेवाएं और योजनाओं का लाभ पाना सपना नहीं, बल्कि एक हकीकत बन गया है। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के विजनरी नेतृत्व में संचालित ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान ने शासन और प्रशासन को सीधे ग्रामीणों की चौखट तक पहुँचाकर सुशासन की नई मिसाल पेश की है।

एक सप्ताह में बड़ी उपलब्धि: आँकड़ों की जुबानी सफलता

अभियान की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मात्र एक सप्ताह के भीतर राज्यभर में 93 बहुद्देश्यीय शिविरों का आयोजन किया गया। इन शिविरों के माध्यम से शासन ने अपनी कार्यक्षमता और पारदर्शिता का लोहा मनवाया है:

  • त्वरित निस्तारण: 6,396 शिकायतों का मौके पर ही समाधान किया गया।

  • योजनाओं का लाभ: 28,959 ग्रामीणों को विभिन्न जन-कल्याणकारी योजनाओं से सीधे जोड़ा गया।

  • प्रमाणपत्रों का वितरण: सरकारी सेवाओं की सुलभता सुनिश्चित करते हुए 9,061 आवश्यक प्रमाणपत्र मौके पर ही निर्गत किए गए।

मुख्यमंत्री का औचक निरीक्षण: धरातल पर फीडबैक की अहमियत

मुख्यमंत्री धामी स्वयं इस अभियान की कमान संभाल रहे हैं। सोमवार को उन्होंने अल्मोड़ा जिले के रानीखेत में ग्रामीणों से संवाद किया और विकासखंड ताड़ीखेत की न्याय पंचायत जैनोली में आयोजित शिविर का औचक निरीक्षण किया।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार का लक्ष्य केवल कागजी खानापूर्ति नहीं, बल्कि हर पात्र व्यक्ति तक लाभ पहुँचाना है। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि शिकायतों का निस्तारण केवल समयबद्ध ही नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण भी होना चाहिए।

“यह अभियान ग्रामीण जनता के लिए शासन-प्रशासन के दरवाजे खोलने और उनके समस्याओं का समाधान उनके घर-द्वार पर ही सुनिश्चित करने की एक अनूठी पहल है।” — मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी

कैबिनेट मंत्रियों की सक्रिय भागीदारी

यह अभियान केवल मुख्यमंत्री तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी कैबिनेट इसमें सक्रिय है। सोमवार को राज्य की 10 न्याय पंचायतों में शिविर लगे, जिनमें 1,572 शिकायतों का निस्तारण हुआ। पिथौरागढ़ के मोस्टामानू मेला स्थल पर आयोजित शिविर में कैबिनेट मंत्री श्री सतपाल महाराज ने प्रतिभाग कर ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और योजनाओं का लाभ वितरित किया।

डेढ़ माह तक चलेगा सुशासन का यह उत्सव

बीते 17 दिसंबर से शुरू हुआ यह अभियान अगले डेढ़ माह तक अनवरत जारी रहेगा। मुख्यमंत्री ने अपने मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे क्षेत्रों में जाकर जनता से सीधे जुड़ें। सरकार का प्रयास है कि कोई भी पात्र व्यक्ति सूचना के अभाव में योजनाओं से वंचित न रहे।


मुख्य आकर्षण:

  • पारदर्शिता: बिचौलियों की भूमिका खत्म, सीधे संवाद।

  • त्वरित सेवा: आय, जाति, निवास जैसे प्रमाणपत्रों का मौके पर वितरण।

  • स्वास्थ्य एवं कल्याण: शिविरों में स्वास्थ्य जाँच और कृषि-बागवानी योजनाओं की जानकारी।

इस अभियान ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो ‘पहाड़ का पानी और पहाड़ की जवानी’ के साथ-साथ ‘पहाड़ का प्रशासन’ भी जनता के काम आ सकता है।

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