“सक्षम अधिकारी, सशक्त उत्तराखंड: विजन 2047 के जरिए मुख्यमंत्री ने खींची विकास की नई लकीर”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को धरातल पर उतारने के लिए उत्तराखंड ने अपनी कमर कस ली है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रशासनिक अधिकारियों को “टीम उत्तराखंड” की भावना से काम करने का आह्वान किया है।

1. विजन 2047: केवल आंकड़े नहीं, मानवीय विकास

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि ‘विकसित भारत’ का लक्ष्य केवल आर्थिक आंकड़ों तक सीमित नहीं है। यह एक ऐसा व्यापक दृष्टिकोण है जिसमें:

  • समावेशी विकास: समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक लाभ पहुँचे।

  • समान अवसर: प्रत्येक नागरिक, विशेषकर महिलाओं और युवाओं को प्रगति के समान अवसर मिलें।

  • पारदर्शी शासन: तकनीक के माध्यम से भ्रष्टाचार मुक्त और संवेदनशील प्रशासन सुनिश्चित हो।

2. विकास के तीन मुख्य स्तंभ

मुख्यमंत्री के अनुसार, विकसित उत्तराखंड की नींव निम्नलिखित तीन स्तंभों पर टिकी है:

  1. सुशासन (Good Governance): नीतियों का निर्धारण जन-केंद्रित और लक्ष्य-आधारित होना चाहिए।

  2. तकनीक एवं नवाचार: ई-गवर्नेंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा एनालिटिक्स का उपयोग शासन को प्रभावी बनाने के लिए किया जाए।

  3. सतत एवं संतुलित विकास: विकास ऐसा हो जो पर्यावरण और स्थानीय संस्कृति के अनुकूल हो।

3. प्रशासनिक सुधार: “सोलो प्लेयर” नहीं, “टीम उत्तराखंड”

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को अपनी कार्यशैली में बड़े बदलाव लाने के निर्देश दिए:

  • विभागीय समन्वय: विभागों को अपनी सीमाओं से बाहर निकलकर एक-दूसरे के साथ तालमेल बिठाना होगा।

  • आउटपुट बनाम आउटकम: केवल बजट खर्च करना सफलता का पैमाना नहीं है; योजना का वास्तविक लाभ जनता को कितना मिला (आउटकम), यह महत्वपूर्ण है।

  • क्षेत्रीय जुड़ाव: अधिकारियों को अपने सेवा क्षेत्र के विकास पर विशेष ध्यान देने और जन-समस्याओं को व्यक्तिगत रूप से डायरी में नोट कर उनका समाधान करने की सलाह दी गई।

“आपका प्रत्येक निर्णय केवल आज को प्रभावित नहीं करता, बल्कि आने वाले भविष्य की दिशा भी तय करता है।” — श्री पुष्कर सिंह धामी

4. तकनीक का लोकतंत्रीकरण

मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि तकनीक केवल शहरों तक सीमित न रहे। आधुनिक सेवाओं का लाभ राज्य के दूरस्थ और सीमांत गांवोंतक पहुँचना चाहिए। इसके लिए ई-गवर्नेंस को और अधिक सुदृढ़ बनाया जाएगा।

5. चिंतन से समाधान की ओर

कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि संबोधन के बाद मुख्यमंत्री स्वयं पहली पंक्ति में बैठकर विशेषज्ञों और अधिकारियों के सुझाव सुनते रहे और मुख्य बिंदुओं के नोट्स भी बनाए। यह दर्शाता है कि सरकार केवल निर्देश देने में नहीं, बल्कि जमीन से जुड़े सुझावों को नीति में शामिल करने में विश्वास रखती है।

इस अवसर पर सेतु आयोग के CEO शत्रुघ्न सिंह, नीति आयोग की प्रोग्राम डायरेक्टर डॉ. नीलम पटेल और अन्य वरिष्ठ IAS अधिकारी मौजूद रहे, जिन्होंने विभिन्न विषयों पर गहन मंथन किया।

उत्तराखंड सरकार का यह विजन 2047 एक उज्ज्वल भविष्य की ओर इशारा करता है। यदि नीति स्पष्ट, नीयत साफ और संकल्प अडिग रहे, तो हिमालयी राज्य उत्तराखंड निश्चित रूप से विकसित भारत के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाएगा।

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