विकसित उत्तराखंड @2047: मुख्य सचिव का विकेंद्रीकरण और जिला नियोजन पर मास्टरप्लान

Dehradun: उत्तराखंड के प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों भविष्य की नींव रखी जा रही है। सचिवालय स्थित वीर चंद्र सिंह गढ़वाली सभागार में मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में आयोजित जनपदवार समीक्षा बैठक ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राज्य अब केवल वार्षिक लक्ष्यों पर नहीं, बल्कि अगले दो दशकों के ‘विज़न डॉक्यूमेंट’ पर काम कर रहा है। मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियों (DMs) को विकास की कमान सीधे पंचायतों और गांवों तक ले जाने का निर्देश दिया है।

1. विज़न 2047: पंचायत से प्रदेश तक का खाका

भारत सरकार के ‘विकसित भारत @2047’ के लक्ष्य की तर्ज पर उत्तराखंड भी अपना विज़न डॉक्यूमेंट तैयार कर रहा है। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए हैं कि यह योजना केवल राज्य स्तर पर सीमित न रहे।

  • निचले स्तर तक नियोजन: प्रत्येक जनपद, ब्लॉक (खण्ड) और ग्राम पंचायत स्तर पर अपना अलग विज़न डॉक्यूमेंट होना चाहिए। इससे यह स्पष्ट होगा कि आने वाले 20-25 वर्षों में एक छोटा गांव भी बुनियादी ढांचे और आर्थिक रूप से खुद को कहां देखता है।

  • कार्यशालाओं का आयोजन: इस प्रक्रिया को गति देने के लिए मुख्य सचिव ने तत्काल राज्य और जिला स्तर पर वर्कशॉप आयोजित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि स्थानीय जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को इस दीर्घकालिक लक्ष्य के लिए प्रशिक्षित किया जा सके।

2. जिला योजना: समयबद्धता और पूर्व तैयारी

मुख्य सचिव ने जिला योजना समितियों की कार्यप्रणाली में सुधार करते हुए “एडवांस प्लानिंग” पर जोर दिया है।

  • मार्च की समयसीमा: सभी जिलों को निर्देश दिए गए हैं कि जिला योजना की बैठकें मार्च माह तक अनिवार्य रूप से संपन्न कर ली जाएं। इससे नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत से ही बजट का आवंटन और काम का क्रियान्वयन शुरू हो सकेगा।

  • एस्टीमेट और होमवर्क: योजनाओं को फाइलों से निकालकर जमीन पर उतारने के लिए मुख्य सचिव ने कहा कि एस्टीमेट (प्राक्कलन) पहले से तैयार होने चाहिए। तकनीकी स्वीकृतियां और विभागीय कागजी कार्रवाई को पहले ही पूर्ण कर लिया जाए ताकि धन मिलते ही टेंडर प्रक्रिया शुरू हो सके।

3. शक्तियों का विकेंद्रीकरण और खरीद प्रक्रिया में सुधार

प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के लिए मुख्य सचिव ने विभागों को अधिक स्वायत्तता देने का सुझाव दिया है।

  • जिला स्तर पर खरीद: कृषि, उद्यान और पशुपालन जैसे महत्वपूर्ण विभागों को खरीद (Procurement) के लिए शक्तियों का विकेंद्रीकरण करना चाहिए। अब तक कई मामलों में राज्य स्तर से होने वाली देरी विकास कार्यों को बाधित करती रही है।

  • मूल्य निर्धारण की नई नीति: मुख्य सचिव ने एक अभिनव सुझाव दिया कि खरीद के लिए हर साल नए रेट तय करने के बजाय 2 से 3 वर्षों के लिए मूल्य निर्धारित किए जा सकते हैं। इससे टेंडर प्रक्रिया में लगने वाले समय की बचत होगी और विभागों को कार्य करने की अधिक स्वतंत्रता मिलेगी।

  • नियमों में लचीलापन: यदि जिला योजना की गाइडलाइंस आम जनता की समस्याओं के समाधान में बाधक बन रही हैं, तो उन नियमों में तत्काल सुधार का प्रस्ताव लाने को कहा गया है।

4. आर्थिक सशक्तिकरण: आजीविका योजनाओं की सघन समीक्षा

उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य के लिए आजीविका मिशन और स्वरोजगार सबसे बड़ी प्राथमिकता है। मुख्य सचिव ने इसके लिए ‘त्रि-स्तरीय समीक्षा तंत्र’ का खाका खींचा है:

  1. जनपद स्तर: डीएम हर महीने आजीविका से जुड़ी योजनाओं (जैसे होमस्टे, मशरूम उत्पादन, बकरी पालन आदि) की समीक्षा करेंगे।

  2. राज्य स्तर: मुख्य सचिव स्वयं हर तीन महीने (त्रैमासिक) में इन योजनाओं की प्रगति का जायजा लेंगे।

  3. एकीकृत विकास: जिला योजना (DP), राज्य सेक्टर और डीएपी (DAP), सीसीएस (CCS) जैसी योजनाओं की मासिक बैठकें अनिवार्य कर दी गई हैं ताकि फंड का शत-प्रतिशत उपयोग सुनिश्चित हो।

5. जन-शिकायतों का योजनाबद्ध समाधान

बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्देश दिया गया कि केवल नई सड़कों या इमारतों का निर्माण ही विकास नहीं है, बल्कि जनता की समस्याओं का समाधान भी योजना का हिस्सा होना चाहिए।

  • समस्या से समाधान का सफर: मुख्य सचिव ने कहा कि जिलों में प्राप्त शिकायतों के पैटर्न का विश्लेषण किया जाए। यदि किसी विशेष क्षेत्र में पानी की समस्या बार-बार आ रही है, तो उसे केवल एक शिकायत न मानकर ‘जिला योजना’ का हिस्सा बनाकर स्थायी समाधान किया जाए।

  • भौतिक सत्यापन: कार्य की प्रकृति के अनुरूप उन्हें जिला या राज्य सेक्टर में शामिल कर उनकी गुणवत्ता की जांच की जाए।

विभाग मुख्य सचिव के प्रमुख निर्देश
कृषि एवं उद्यान खरीद की शक्तियों का जिला स्तर पर विकेंद्रीकरण।
प्रशासन/DMs पंचायत स्तर पर विजन डॉक्यूमेंट 2047 तैयार करना।
नियोजन मार्च तक जिला योजना समितियों की बैठकें पूर्ण करना।
आजीविका मिशन मासिक एवं त्रैमासिक समीक्षा का सख्त ढांचा।

 जवाबदेही और दूरदर्शिता का संगम

मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन की यह समीक्षा बैठक उत्तराखंड के लिए एक ‘प्रशासनिक रिबूट’ की तरह है। विज़न 2047 के जरिए जहां उन्होंने दूरगामी सोच का परिचय दिया है, वहीं मार्च तक जिला योजना की बैठकों के निर्देश देकर तात्कालिक कार्यकुशलता को भी प्राथमिकता दी है। शक्तियों का विकेंद्रीकरण और पंचायत स्तर पर विजन डॉक्यूमेंट तैयार करना यह सुनिश्चित करेगा कि विकास का लाभ केवल शहरों तक सीमित न रहकर उत्तराखंड के अंतिम गांव तक पहुंचे।

प्रमुख सचिवों और सभी जिलाधिकारियों की उपस्थिति में लिए गए ये निर्णय यदि उसी गति से लागू होते हैं, तो उत्तराखंड ‘विकसित राज्य’ बनने की राह पर तेजी से अग्रसर होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *