“विकास भी और विरासत भी”: दिल्ली में गूँजी देवभूमि की संस्कृति, सीएम धामी ने ‘उत्तराखण्ड के सितारों’ को किया सम्मानित

नई दिल्ली/रोहिणी: देश की राजधानी दिल्ली का रोहिणी क्षेत्र उस समय लघु उत्तराखण्ड के रूप में तब्दील हो गया जब मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने ‘हम सबका उत्तराखण्ड’ संस्था द्वारा आयोजित ‘उत्तराखण्ड महोत्सव रोहिणी सीजन–02’ में शिरकत की। प्रवासी उत्तराखण्डियों के भारी हुजूम के बीच मुख्यमंत्री ने देवभूमि की लोक संस्कृति, परंपरा और विरासत के संरक्षण का पुरजोर आह्वान किया।

‘उत्तराखण्ड के सितारे’ सम्मान से विभूषित हुईं हस्तियाँ

समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने विभिन्न क्षेत्रों में राज्य का मान बढ़ाने वाली तीन प्रमुख हस्तियों को ‘उत्तराखण्ड के सितारे’ सम्मान से नवाजा:

  • श्री सौरभ जोशी: सुप्रसिद्ध सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर।

  • डॉ. मनोज गोरखेला: हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य एवं वरिष्ठ चिकित्सक।

  • श्रीमती कल्पना चौहान: प्रख्यात लोक गायिका।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे आयोजन न केवल कलाकारों को मंच देते हैं, बल्कि युवा पीढ़ी को अपनी बोली और संस्कारों से जोड़ने का एक जीवंत माध्यम भी बनते हैं।

विकास और सांस्कृतिक चेतना का संगम

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विकास भी और विरासत भी” के मंत्र को दोहराया। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड आज अपनी जड़ों को सुरक्षित रखते हुए आधुनिकता की ओर तेजी से बढ़ रहा है।

मुख्य आकर्षण और सरकारी पहल:

  • पुनर्निर्माण और संरक्षण: केदारनाथ-बदरीनाथ का भव्य पुनर्निर्माण और ‘मंदिर माला मिशन’ के जरिए धार्मिक स्थलों का कायाकल्प।

  • नया डेस्टिनेशन हब: उत्तराखण्ड अब केवल तीर्थाटन नहीं, बल्कि वेडिंग डेस्टिनेशन, एडवेंचर टूरिज्म और फिल्म शूटिंग के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित हो रहा है।

  • आर्थिक सशक्तिकरण: ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ ब्रांड के जरिए स्थानीय उत्पादों को ग्लोबल पहचान और ‘लखपति दीदी’ योजना से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है।

सुशासन और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम

मुख्यमंत्री ने राज्य की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद उत्तराखण्ड की प्रति व्यक्ति आय और बजट में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उन्होंने विशेष रूप से इन बिंदुओं पर जोर दिया:

  1. सख्त कानून और पारदर्शिता: राज्य में भ्रष्टाचार विरोधी कदम और समान नागरिक संहिता (UCC) का प्रभावी क्रियान्वयन।

  2. ग्रामीण आजीविका: होम-स्टे, दुग्ध उत्पादन और मधु उत्पादन के जरिए पलायन पर लगाम।

  3. युवाओं को अवसर: पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया और स्वरोजगार के नए अवसर।

“स्वयं पहाड़ की मिट्टी से जुड़ा होने के कारण लोक संस्कृति मेरे जीवन का हिस्सा है। हमारी सरकार संकल्पबद्ध है कि 21वीं सदी का यह तीसरा दशक वास्तव में ‘उत्तराखण्ड का दशक’ साबित हो।”श्री पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

सांस्कृतिक धरोहर की जीवंत प्रस्तुति

कार्यक्रम के दौरान लोक कलाकारों ने पारंपरिक वेशभूषा में लोकगीतों और नृत्यों की मंत्रमुग्ध कर देने वाली प्रस्तुतियाँ दीं। मुख्यमंत्री ने कलाकारों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि प्रवासी उत्तराखण्डी दुनिया के किसी भी कोने में रहें, वे अपनी संस्कृति के सबसे बड़े एंबेसडर (दूत) हैं.

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