देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश के चहुंमुखी विकास और जनमानस की सुविधा के लिए महत्वपूर्ण वित्तीय स्वीकृतियां प्रदान की हैं। सरकार का मुख्य फोकस इस बार जल संरक्षण, पेयजल आपूर्ति, शिक्षा और ग्रामीण कनेक्टिविटी पर रहा है। इन घोषणाओं से हरिद्वार से लेकर सीमांत जिले पिथौरागढ़ तक विकास कार्यों को नई गति मिलेगी।
1. जल जीवन और संरक्षण: ₹93 करोड़ से अधिक का निवेश
मुख्यमंत्री ने राज्य में जल स्रोतों के पुनरुद्धार और पेयजल संकट के समाधान के लिए सबसे बड़ी धनराशि को मंजूरी दी है।
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लोहाघाट टाउन पंपिंग योजना: चम्पावत जिले के लोहाघाट क्षेत्र में पेयजल की किल्लत दूर करने के लिए ₹84.45 करोड़ की भारी-भरकम राशि स्वीकृत की गई है। यह परियोजना क्षेत्र की बढ़ती आबादी के लिए गेम-चेंजर साबित होगी।
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अमृत 2.0 (हरिद्वार): नगर निगम हरिद्वार के सीतापुर सरोवर के पुनरुद्धार (Rejuvenation) के लिए ₹1.68 करोड़ मंजूर किए गए हैं, जिससे जल स्तर और पर्यटन दोनों में सुधार होगा।
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सिंचाई एवं संरक्षण: देहरादून की बांदल नदी में जल संरक्षण कार्यों हेतु ₹2.19 करोड़ और ऐतिहासिक बीजापुर नहर के आधुनिकीकरण के लिए ₹5.00 करोड़ स्वीकृत किए गए हैं।
2. शिक्षा और सामाजिक कल्याण: लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान
धामी सरकार ने सामाजिक सुरक्षा और शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं:
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लोकतंत्र सम्मान पेंशन: हल्द्वानी की श्रीमती देवकी काण्डपाल को 17 मई 2023 से ₹20 हजार प्रतिमाह पेंशन देने का अनुमोदन किया गया है, जो लोकतंत्र के प्रहरी परिवारों के प्रति सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है।
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छात्रावास एवं स्कूल अनुदान: * देहरादून स्थित डॉ. भीमराव अम्बेडकर बालक छात्रावास के रखरखाव हेतु ₹46.56 लाख।
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हरिद्वार के राजा बाबू पब्लिक इंटर कॉलेज और हर्ष पब्लिक जूनियर हाईस्कूल को टोकन अनुदान और प्रोत्साहन राशि के रूप में सहायता प्रदान की गई है।
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3. सीमांत क्षेत्रों में कनेक्टिविटी: पिथौरागढ़ को प्राथमिकता
पहाड़ी क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बढ़ाने के उद्देश्य से पिथौरागढ़ जिले की तीन महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं को हरी झंडी दिखाई गई है:
4. बुनियादी ढांचे का सुदृढ़ीकरण: जिला कारागार देहरादून
सुरक्षा और आधुनिक सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने जिला कारागार, देहरादून के विद्युत तंत्र को आधुनिक बनाने का निर्णय लिया है। पुराने पैनल और केबल्स को बदलकर उच्च क्षमता की Armoured केबल स्थापित करने के लिए ₹85.22 लाख की स्वीकृति दी गई है, जिससे बिजली की निर्बाध आपूर्ति और सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
अंत्योदय’ की ओर बढ़ते कदम
इन वित्तीय मंजूरियों से स्पष्ट है कि राज्य सरकार का लक्ष्य न केवल बड़े शहरों का विकास करना है, बल्कि अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। जल संरक्षण की ये परियोजनाएं पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ भविष्य की पानी की जरूरतों को पूरा करने के लिए ‘अमृत काल’ में एक ठोस नींव का काम करेंगी।
क्या आप इनमें से किसी विशिष्ट परियोजना (जैसे लोहाघाट पेयजल योजना) की वर्तमान प्रगति या इसके कार्यान्वयन की समय सीमा के बारे में और जानकारी चाहते हैं?
