देहरादून: उत्तराखंड में खनन को लेकर दशकों से चली आ रही नकारात्मक धारणा अब सकारात्मकता में बदल रही है। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के ‘पारदर्शी शासन’ और ‘अवैध खनन पर प्रहार’ की नीति का परिणाम है कि राज्य के खनन राजस्व में महज डेढ़ साल के भीतर 400% की ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है।
राजस्व में रिकॉर्ड उछाल: एक नजर में
सितंबर 2024 से पहले तक राज्य को खनन से सालाना लगभग ₹300 करोड़ का राजस्व प्राप्त होता था। नई नीतियों और तकनीक के समावेश के बाद यह आंकड़ा अब ₹1200 करोड़ के पार पहुँच गया है।
नई खनन नीति 2024: पारदर्शिता की नई इबारत
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के विजन के अनुरूप सितंबर 2024 में लागू की गई नई खनन नीति ने पूरे तंत्र को बदल कर रख दिया है। इसकी प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
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ई-नीलामी (E-Auction): खनन लॉट के आवंटन में मानवीय हस्तक्षेप खत्म कर पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन ई-नीलामी के जरिए पारदर्शी बनाया गया।
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सैटेलाइट निगरानी: खनन क्षेत्रों की निगरानी अब उपग्रहों के माध्यम से की जा रही है, जिससे अवैध खनन की गुंजाइश खत्म हो गई है।
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डिजिटल ट्रैकिंग: माइनिंग सर्विलांस सिस्टम और डिजिटल निरीक्षण के जरिए खनन परिवहन की रीयल-टाइम ट्रैकिंग सुनिश्चित की गई है।
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सख्त निर्देश: मुख्यमंत्री ने पुलिस और प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अवैध खनन में संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा न जाए।
देश भर में बजा उत्तराखंड का डंका
खनन सुधारों को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए उत्तराखंड को पूरे देश में दूसरा स्थान प्राप्त हुआ है। इस उपलब्धि के कारण केंद्र सरकार ने राज्य को विशेष प्रोत्साहन भी दिया है:
SASCI योजना के तहत सौगात: खनन सुधारों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 हेतु “पूंजी निवेश के लिए राज्यों को विशेष सहायता योजना (SASCI)” के अंतर्गत ₹200 करोड़ की अतिरिक्त विशेष सहायता स्वीकृत की है।
विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी का मानना है कि खनन सामग्री आम जनता की आवासीय जरूरतों और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए अनिवार्य है। उन्होंने कहा:
“हमने यह सुनिश्चित किया है कि खनन की प्रक्रिया पर्यावरण के मानकों के अनुरूप हो। पारदर्शी तंत्र विकसित होने से न केवल राजस्व बढ़ा है, बल्कि इस धन का उपयोग अब जनकल्याणकारी योजनाओं में किया जा रहा है।”
उत्तराखंड सरकार ने यह साबित कर दिया है कि यदि तकनीक और इच्छाशक्ति का सही तालमेल हो, तो किसी भी बदनाम क्षेत्र को सुधारकर उसे राज्य की आर्थिकी का मुख्य आधार बनाया जा सकता है। ₹1200 करोड़ का यह राजस्व राज्य के स्कूलों, अस्पतालों और सड़कों के निर्माण में नई ऊर्जा फूंकेगा।
