देहरादून: उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध चारधामों में से दो प्रमुख धामों—बद्रीनाथ और केदारनाथ—में अब केवल हिंदुओं को प्रवेश की अनुमति देने की तैयारी की जा रही है। बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने इस दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए स्पष्ट किया है कि भविष्य में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाएगा।
‘केवल हिंदुओं के लिए’ नियम की तैयारी
बीकेटीसी के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने इस निर्णय की पुष्टि करते हुए कहा कि समिति के अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी मंदिरों (बद्रीनाथ और केदारनाथ सहित) में गैर-हिंदुओं की एंट्री को प्रतिबंधित किया जाएगा।
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प्रस्तावित प्रक्रिया: इस फैसले को औपचारिक रूप देने के लिए मंदिर समिति की आगामी बोर्ड बैठक में एक प्रस्ताव रखा जाएगा।
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दायरा: यह नियम केवल मुख्य धामों पर ही नहीं, बल्कि समिति द्वारा संचालित अन्य सभी संबद्ध मंदिरों पर भी लागू होगा।
यात्रा सीजन 2026: कपाट खुलने की तारीखें
यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब उत्तराखंड में चारधाम यात्रा की तैयारियां शुरू हो रही हैं:
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बद्रीनाथ धाम: सर्दियों के अवकाश के बाद कपाट 23 अप्रैल को खुलेंगे।
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गंगोत्री और यमुनोत्री: अक्षय तृतीया के अवसर पर 19 अप्रैल को कपाट खुलने वाले हैं।
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केदारनाथ धाम: कपाट खुलने की तिथि की घोषणा महाशिवरात्रि पर की जाएगी।
विवादों के बीच बढ़ती मांग
हरिद्वार के हर की पौड़ी पर लगे ‘गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित’ वाले पोस्टरों के बाद से यह बहस तेज हो गई है। श्री गंगा सभा द्वारा लगाए गए इन पोस्टरों ने राज्य में कानून-व्यवस्था और धार्मिक अधिकारों पर नई चर्चा छेड़ दी है।
“इन बैनरों का मकसद लोगों को उनके अधिकारों और कर्तव्यों के बारे में जागरूक करना है ताकि कानून-व्यवस्था मजबूत हो और समाज में शांति बनी रहे।” — नितिन गौतम, अध्यक्ष, श्री गंगा सभा
मुख्य चिंताएं और कारण
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धार्मिक शुचिता: हिंदू संगठनों का तर्क है कि तीर्थस्थलों की पवित्रता बनाए रखने के लिए यह कदम जरूरी है।
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सुरक्षा और व्यवस्था: अर्ध कुंभ (2027) और हालिया कुछ विवादित घटनाओं को देखते हुए प्रशासन और समितियां अधिक सतर्क हैं।
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जागरूकता: समितियों का कहना है कि वे केवल पुराने नियमों और धार्मिक मान्यताओं को स्पष्ट कर रहे हैं ताकि भविष्य में टकराव की स्थिति न बने।
इस निर्णय का प्रभाव न केवल श्रद्धालुओं पर, बल्कि राज्य के पर्यटन और सामाजिक ढांचे पर भी पड़ सकता है।
