सुशासन और सख्त कानून व्यवस्था: मुख्यमंत्री धामी का ‘मिशन उत्तराखंड’

उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने शासन-प्रशासन को एक स्पष्ट और कड़ा संदेश दिया है: “देवभूमि में लापरवाही के लिए कोई स्थान नहीं है।” सचिवालय में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री ने राज्य की कानून व्यवस्था, प्रशासनिक कार्यशैली और जनसेवा के मानकों को नए सिरे से परिभाषित किया। अखिल भारतीय डीजी/आईजी सम्मेलन के निष्कर्षों पर आधारित इस समीक्षा बैठक का उद्देश्य उत्तराखंड को सुरक्षित, व्यवस्थित और प्रगतिशील बनाना है।

1. प्रशासनिक कार्यशैली: फाइल से धरातल तक का सफर

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रशासन की सफलता फाइलों के निस्तारण में नहीं, बल्कि धरातल पर दिखने वाले परिणामों में है। उन्होंने ‘वर्क कल्चर’ (कार्य संस्कृति) में आमूल-चूल परिवर्तन की आवश्यकता पर बल दिया।

  • संवेदनशीलता और जवाबदेही: पुलिस और प्रशासन के हर विभाग को आम जनता के प्रति संवेदनशील होने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री का मानना है कि सरकारी तंत्र को केवल आदेश देने वाला नहीं, बल्कि जनता का सहायक होना चाहिए।

  • परिणामोन्मुखी दृष्टिकोण: “मुख्यमंत्री घोषणाओं” के 100 प्रतिशत क्रियान्वयन पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि योजनाओं का नियमित भौतिक सत्यापन अनिवार्य है। गुणवत्ता और समयबद्धता से समझौता किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

2. पर्यटन और बुनियादी ढांचा: नए द्वार, नई चुनौतियाँ

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे के जल्द ही शुरू होने के साथ, उत्तराखंड में पर्यटकों की आमद में भारी वृद्धि की उम्मीद है। मुख्यमंत्री ने इसे एक अवसर और चुनौती दोनों के रूप में देखा है।

  • यातायात प्रबंधन: पर्यटकों की संख्या बढ़ने पर अव्यवस्था न हो, इसके लिए समयबद्ध ट्रैफिक प्लान, पार्किंग और सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं।

  • कैंची धाम बाईपास: श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कैंची धाम बाईपास का कार्य जून माह तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है, जो चारधाम यात्रा और पर्यटन सीजन के दौरान यातायात को सुगम बनाएगा।

3. कानून व्यवस्था और पुलिसिंग में सुधार

मुख्यमंत्री ने पुलिसिंग को लेकर “जीरो टॉलरेंस” की नीति अपनाई है। उन्होंने थाना और चौकी स्तर पर पुलिस के व्यवहार को सुधारने पर विशेष बल दिया।

  • मानवीय व्यवहार: निर्दोष नागरिकों को परेशान करने की शिकायतों को मुख्यमंत्री ने अत्यंत गंभीरता से लिया है। उन्होंने निर्देश दिए कि पुलिस का व्यवहार जनता के प्रति सम्मानजनक होना चाहिए।

  • सघन पेट्रोलिंग: अपराध नियंत्रण के लिए रात्रि गश्त और निरंतर पेट्रोलिंग को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए हैं। लंबित विवेचनाओं का शीघ्र निस्तारण पुलिस की प्राथमिकता होनी चाहिए।

  • शांति व्यवस्था: राज्य की शांति भंग करने वाले तत्वों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करने की छूट पुलिस को दी गई है।

4. लैंड फ्रॉड और अवैध अतिक्रमण पर प्रहार

उत्तराखंड की शांत वादियों में ‘लैंड माफिया’ के लिए कोई जगह नहीं है। मुख्यमंत्री ने भूमि संबंधी अपराधों को रोकने के लिए कठोर कानून बनाने के निर्देश दिए हैं।

  • जवाबदेही तय: सरकारी भूमि और नदी-नालों पर हो रहे अवैध निर्माणों के लिए अब केवल कब्जा करने वाले ही नहीं, बल्कि संबंधित क्षेत्र के एसडीएम, लेखपाल और पटवारी भी जवाबदेह होंगे।

  • तहसील स्तर पर समाधान: भूमि विवादों के त्वरित निस्तारण के लिए तहसील स्तर की समितियों को सक्रिय करने और लंबित मामलों को तत्काल निपटाने का आदेश दिया गया है।

5. नशा मुक्त उत्तराखंड: एक जन आंदोलन

मुख्यमंत्री ने ‘नशा मुक्त उत्तराखंड’ के संकल्प को केवल सरकारी कार्यक्रम न मानकर एक ‘जन आंदोलन’ बनाने का आह्वान किया है।

विषय निगरानी तंत्र
रिपोर्टिंग प्रत्येक जनपद से मासिक रिपोर्ट सीधे शासन को।
समीक्षा गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक द्वारा नियमित मॉनिटरिंग।
लक्ष्य युवाओं को नशे के जाल से बचाना और तस्करों पर नकेल कसना।

6. राजस्व वृद्धि और आर्थिक अनुशासन

राज्य की आत्मनिर्भरता के लिए मुख्यमंत्री ने राजस्व के वैकल्पिक स्रोतों को बढ़ाने पर चर्चा की। उन्होंने सरकारी सब्सिडी योजनाओं के ‘आउटकम’ (परिणाम) के मूल्यांकन का निर्देश दिया ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि सरकारी धन का सही उपयोग हो रहा है। राजस्व मामलों में होने वाली देरी को कम करने के लिए भी कड़े निर्देश जारी किए गए हैं।

7. न्याय और सुधार: अभियोजन और कारागार

न्याय व्यवस्था को मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री ने अभियोजन विभाग (Prosecution) के ‘परफॉर्मेंस ऑडिट’ की बात कही। उनका मानना है कि कमजोर पैरवी के कारण अपराधी बच निकलने नहीं चाहिए। वहीं, कारागार विभाग को निर्देश दिए गए कि वे बंदियों के कौशल विकास (Skill Development) और पुनर्वास पर ध्यान दें, ताकि वे समाज की मुख्यधारा में लौट सकें।

एक सशक्त उत्तराखंड की ओर

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी का यह कड़ा रुख दर्शाता है कि वे उत्तराखंड के भविष्य को लेकर बेहद गंभीर हैं। सुरक्षा, सुशासन और विकास के इस त्रिकोण पर चलकर ही उत्तराखंड को देश का अग्रणी राज्य बनाया जा सकता है। “1905 हेल्पलाइन” की समीक्षा और “जीरो पेंडेंसी” का लक्ष्य यह सुनिश्चित करता है कि सरकार की नजर हर अंतिम व्यक्ति की समस्या पर है।

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