रामनवमी के पावन पर्व पर मुख्यमंत्री आवास में भक्ति और शक्ति के संगम का एक अनुपम दृश्य देखने को मिला। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने न केवल प्रदेशवासियों को मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव की बधाई दी, बल्कि कन्या पूजन के माध्यम से मातृशक्ति के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा भी व्यक्त की।
देहरादून: चैत्र नवरात्रि के पावन समापन और रामनवमी के शुभ अवसर पर मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने अपनी परंपरा को जारी रखते हुए मुख्यमंत्री आवास में विधि-विधान से कन्या पूजन किया। देवी स्वरूपा छोटी बालिकाओं का सम्मान करते हुए मुख्यमंत्री ने उन्हें पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार भोजन कराया और उपहार भेंट कर उनके चरण स्पर्श किए।
मातृशक्ति का सम्मान: कन्या पूजन और सामाजिक समरसता
मुख्यमंत्री ने कन्या पूजन को भारतीय संस्कृति का एक अनिवार्य और पवित्र अंग बताया। उन्होंने कहा कि कन्याएं देवी का साक्षात स्वरूप होती हैं और उनका पूजन नारी सम्मान व सामाजिक समरसता का एक सशक्त संदेश देता है। मुख्यमंत्री आवास में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने स्वयं बालिकाओं की सेवा की, जो उनकी सादगी और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति अटूट आस्था को प्रदर्शित करता है।

भगवान राम का जीवन: कर्तव्यनिष्ठा और धर्म का मार्ग
प्रदेशवासियों को रामनवमी की शुभकामनाएं देते हुए मुख्यमंत्री ने मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के आदर्शों का स्मरण किया। उन्होंने कहा, “भगवान श्रीराम का संपूर्ण जीवन चरित्र हमें विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य, कर्तव्यनिष्ठा और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। रामनवमी का यह पर्व हमारे भीतर नैतिक मूल्यों और आदर्शों के प्रति विश्वास को और अधिक सुदृढ़ करता है।”
प्रदेश की खुशहाली और प्रगति की कामना
इस पावन अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रभु श्रीराम से समस्त उत्तराखंड वासियों के सुख, समृद्धि और आरोग्य की प्रार्थना की। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भगवान राम के आशीर्वाद से प्रदेश निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर रहेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राम राज्य की संकल्पना ही सुशासन का आधार है और राज्य सरकार इसी मार्ग पर चलते हुए अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति के उत्थान के लिए कार्य कर रही है।
सांस्कृतिक गौरव और उत्सव का माहौल
रामनवमी के उपलक्ष्य में मुख्यमंत्री आवास सहित पूरे प्रदेश में उत्सव का माहौल देखा गया। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में दोहराया कि ऐसे त्योहार हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संजोने और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण जरिया हैं। उन्होंने सभी प्रदेशवासियों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की मंगलकामना की।
