उत्तराखंड में सुशासन और सुरक्षा का नया रोडमैप: मुख्य सचिव के कड़े निर्देश

Dehradun: उत्तराखंड की प्रशासनिक मशीनरी को और अधिक चुस्त-दुरुस्त बनाने की दिशा में मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। हाल ही में सचिवालय में आयोजित गृह विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदेश की कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वाले किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा। यह बैठक न केवल अपराध नियंत्रण पर केंद्रित थी, बल्कि इसमें तकनीकी सुधार, जन-शिकायत निवारण और सामाजिक बुराइयों जैसे ड्रग्स के खिलाफ एक निर्णायक रणनीति भी तैयार की गई।

1. कठोर कानून व्यवस्था और प्रभावी मॉनिटरिंग

मुख्य सचिव ने पुलिस विभाग को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि शांति व्यवस्था बिगाड़ने वाले तत्वों पर कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। केवल एफआईआर दर्ज करना ही काफी नहीं है, बल्कि अपराधियों को सजा दिलाने तक मामले की पैरवी मजबूती से होनी चाहिए।

  • निरंतर निगरानी: महत्वपूर्ण और संवेदनशील मामलों की मॉनिटरिंग केवल थानों तक सीमित न रहकर जनपद और पुलिस मुख्यालय (PHQ) स्तर पर भी की जाएगी।

  • शीघ्र निस्तारण: लंबित मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए समयसीमा तय करने पर जोर दिया गया है, ताकि न्याय प्रक्रिया में देरी न हो।

2. फॉरेंसिक और अभियोजन प्रणाली का सुदृढ़ीकरण

अपराध की जांच और न्यायालय में उसे सिद्ध करने के लिए वैज्ञानिक साक्ष्य (Forensic Evidence) की भूमिका सर्वोपरि होती है।

  • सिस्टम को मजबूती: मुख्य सचिव ने विभागीय सिस्टम को और अधिक आधुनिक और मजबूत बनाने की आवश्यकता जताई। फॉरेंसिक जांचों में तेजी लाने के लिए संसाधनों के विस्तार पर बल दिया गया।

  • ई-समन व्यवस्था: न्यायालय की प्रक्रिया को डिजिटल बनाने के उद्देश्य से ‘ई-समन’ (Electronic Summons) व्यवस्था को और अधिक व्यापक बनाने के निर्देश दिए गए। इससे गवाहों और संबंधित पक्षों को समय पर सूचना मिल सकेगी और न्यायिक प्रक्रिया की गति बढ़ेगी।

3. जन-शिकायत निवारण: थाना और तहसील दिवस की पहल

जनता की समस्याओं को सीधे सुनने और उनका समाधान करने के लिए मुख्य सचिव ने एक अभिनव प्रस्ताव रखा है।

  • कैम्प और एसओपी: गृह, पुलिस और राजस्व विभाग मिलकर ‘थाना और तहसील दिवस’ के आयोजन के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करेंगे।

  • नियमित आयोजन: महीने में 2 से 3 बार कैम्प आयोजित कर जमीनी स्तर पर शिकायतों का निपटारा किया जाएगा।

  • हेल्पलाइन 1905: 1905 हेल्पलाइन पर प्राप्त होने वाली शिकायतों की समीक्षा स्वयं जिलाधिकारी (DM) और एसएसपी (SSP) स्तर पर की जाएगी ताकि ‘जीरो पेंडेंसी’ (शून्य लंबित मामले) का लक्ष्य हासिल हो सके।

4. बुनियादी ढांचा और लंबित संपत्ति का प्रबंधन

अक्सर देखा जाता है कि पुलिस थानों में जब्त किए गए वाहन और अन्य सामान वर्षों तक सड़ते रहते हैं, जिससे जगह की कमी और गंदगी बढ़ती है।

  • वाहनों की नीलामी: मुख्य सचिव ने थानों में जमा जब्त वाहनों की नीलामी कर परिसर को खाली कराने के निर्देश दिए।

  • न्यायिक डिस्पोजल: न्यायालयों में लंबित मामलों से जुड़े वाहनों के निपटारे के लिए नए कानूनी रास्ते तलाशने पर जोर दिया गया है, जिससे सरकारी संपत्ति का नुकसान न हो।


5. साइबर क्राइम और पॉक्सो: वर्तमान की बड़ी चुनौतियां

तकनीक के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराध की चुनौतियां भी बढ़ी हैं। मुख्य सचिव ने इस पर विशेष ध्यान देने की बात कही।

  • साइबर जागरूकता: जनता को साइबर ठगी से बचाने के लिए व्यापक स्तर पर जन जागरूकता कार्यक्रम चलाने के निर्देश दिए गए।

  • पॉक्सो (POCSO) मामले: महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध होने वाले अपराधों, विशेषकर पॉक्सो एक्ट के तहत आने वाले मामलों में पुलिस को तत्काल कार्रवाई करने और संवेदनशीलता बरतने को कहा गया है।

चुनौती प्रस्तावित कार्ययोजना
साइबर क्राइम सिस्टम को मजबूत करना और व्यापक जन जागरूकता।
महिला सुरक्षा वन स्टॉप सेंटर्स का सुदृढ़ीकरण।
पॉक्सो मामले त्वरित विवेचना और त्वरित न्याय की प्रक्रिया।

6. ‘नशा मुक्त उत्तराखंड’ और ड्रग्स के खिलाफ जंग

ड्रग्स के खिलाफ राज्य की जंग अब एक नए चरण में है। मुख्य सचिव ने NCORD (नेशनल कॉर्डिनेटेड ड्रग्स कंट्रोल) की बैठकों को निर्धारित समय पर अनिवार्य रूप से करने के निर्देश दिए।

  • मानस (MANAS) हेल्पलाइन: ‘मानस नेशनल नारकोटिक्स हेल्पलाइन’ को कॉलेज, विश्वविद्यालय और सार्वजनिक स्थानों पर अधिक से अधिक प्रचारित किया जाएगा।

  • ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल: नशामुक्ति केंद्रों की कार्यप्रणाली की निगरानी की जाएगी ताकि वे केवल व्यावसायिक केंद्र बनकर न रह जाएं, बल्कि मानक उपचार (Standard Treatment) प्रदान करें।

  • अस्पतालों में आरक्षण: मुख्य सचिव ने बड़े सरकारी अस्पतालों में नशामुक्ति के लिए कुछ बेड आरक्षित करने की संभावनाओं पर काम करने का निर्देश दिया है।

एक सुरक्षित देवभूमि का संकल्प

मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन की यह समीक्षा बैठक उत्तराखंड के प्रशासनिक ढांचे को और अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। पुलिसिंग में मानवीय चेहरा और अपराधियों के लिए कठोरता, यही इस बैठक का मूल मंत्र रहा। ‘मानस’ हेल्पलाइन का प्रचार और थाना दिवस जैसे कार्यक्रमों से आम जनता का भरोसा सरकार पर और अधिक मजबूत होगा।

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