विकसित उत्तराखंड का संकल्प: गणतंत्र दिवस पर मुख्यमंत्री धामी ने स्वतंत्रता सेनानियों को किया नमन

देहरादून, 26 जनवरी: गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए देश की एकता और संविधान के प्रति सम्मान व्यक्त किया। देहरादून में आयोजित मुख्य कार्यक्रम के दौरान उन्होंने महान स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को याद किया और न्यायपूर्ण समाज के निर्माण पर जोर दिया।

विकसित भारत और ‘उत्तराखंड का दशक’

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को साझा करते हुए कहा कि हमें ‘विकसित भारत’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के सपने को धरातल पर उतारना है। उन्होंने बाबा केदार की पावन भूमि से प्रधानमंत्री द्वारा कही गई बात को दोहराया:

“21वीं सदी का यह तीसरा दशक उत्तराखंड का दशक होगा।”

सीएम धामी ने इसे एक ‘रोडमैप’ बताते हुए कहा कि हर उत्तराखंडवासी को राज्य की तरक्की में अपना योगदान देना चाहिए ताकि उत्तराखंड को हिंदुस्तान का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाया जा सके।

राज्य आंदोलनकारियों को दी श्रद्धांजलि

मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड के गठन के लिए हुए लंबे संघर्ष और आंदोलनकारियों की तपस्या को याद किया। उन्होंने कहा कि आज हम जिस अलग राज्य की पहचान के साथ खड़े हैं, वह उन अनगिनत बलिदानों का परिणाम है।

गैर-हिंदुओं के प्रवेश विवाद पर सरकार का रुख

हरिद्वार और अन्य चारधाम क्षेत्रों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक को लेकर चल रहे विवाद पर मुख्यमंत्री ने पहली बार स्पष्ट रूप से सरकार का रुख सामने रखा।

  • धार्मिक संस्थाओं को स्वायत्तता: मुख्यमंत्री ने कहा कि गंगा सभा, तीर्थ सभा, बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति और पूजनीय संत समुदाय इन प्राचीन स्थलों के प्रबंधन के लिए जिम्मेदार हैं।

  • सहमति आधारित निर्णय: सीएम ने स्पष्ट किया कि सरकार इन धार्मिक संगठनों की राय और विचारों के अनुसार ही आगे बढ़ेगी।

  • कानूनी अध्ययन: उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि इस विषय से जुड़े सभी कानूनी पहलुओं का गहन अध्ययन किया जाएगा ताकि परंपरा और संविधान के बीच संतुलन बना रहे।

मुख्यमंत्री के संबोधन के मुख्य बिंदु

विषय संकल्प/संदेश
विकास मंत्र सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास।
लक्ष्य उत्तराखंड को देश का श्रेष्ठ राज्य बनाना।
अपील मेहनत, ईमानदारी और सामूहिक सहभागिता के साथ काम करना।
सांस्कृतिक संरक्षण धार्मिक स्थलों के प्रबंधन में संतों और धार्मिक सभाओं के विचारों को प्राथमिकता।

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