देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कुशल, संवेदनशील और परिणामोन्मुख नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार द्वारा संचालित “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रम प्रदेश में सुशासन का एक प्रभावी मॉडल बनकर उभरा है। यह अभियान न केवल समस्याओं का समाधान कर रहा है, बल्कि सरकार और जनता के बीच की दूरी को समाप्त कर शासन को सीधे नागरिकों की चौखट तक पहुँचा रहा है।
संवाद और समाधान: एक नजर आंकड़ों पर
मुख्यमंत्री धामी की इस पहल ने राज्य के सभी 13 जनपदों में अपनी गहरी पैठ बना ली है। अब तक आयोजित किए गए शिविरों के माध्यम से शासन की सक्रियता के स्पष्ट प्रमाण देखने को मिले हैं:
त्वरित सेवा और धरातल पर निस्तारण
इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता इसकी त्वरित निस्तारण प्रणाली है। प्राप्त 33,529 शिकायतों में से 22,675 का सफलतापूर्वक समाधान किया जा चुका है। आज आयोजित 13 शिविरों में भी 502 मामलों का समाधान मौके पर ही सुनिश्चित किया गया, जो सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
इसके अलावा, विभिन्न सरकारी प्रमाण-पत्रों और सेवाओं के लिए अब तक कुल 43,975 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिन्हें सरल और पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से आगे बढ़ाया जा रहा है।
“संवाद, समाधान और सेवा” – मुख्यमंत्री का संकल्प
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी का मानना है कि लोकतंत्र में सरकार की सार्थकता तभी है जब वह जनता के द्वार पर जाकर उनकी पीड़ा को समझे। मुख्यमंत्री के अनुसार:
“जब सरकार स्वयं जनता के पास जाकर उनकी समस्याएं सुनती है और समाधान करती है, तो शासन के प्रति जनता का विश्वास स्वतः ही मजबूत होता है। हमारा लक्ष्य उत्तराखंड को सुशासन के क्षेत्र में एक आदर्श राज्य बनाना है।”
भविष्य की राह
यह कार्यक्रम राज्य में एक नई कार्यसंस्कृति को जन्म दे रहा है, जहाँ फाइलों के बोझ और दफ्तरों के चक्कर काटने के बजाय समाधान को प्राथमिकता दी जा रही है। मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में यह अभियान आने वाले समय में और अधिक व्यापक रूप से जारी रहेगा, जिससे उत्तराखंड के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुँच सके।
