Dehradun: केंद्रीय बजट 2026-27 के प्रस्तुत होने के बाद उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने इसे ‘आत्मनिर्भर उत्तराखंड’ के स्वप्न को साकार करने वाला एक ऐतिहासिक दस्तावेज बताया है। देहरादून में आयोजित प्रेस वार्ता में मुख्यमंत्री ने बजट के दूरगामी प्रभावों की चर्चा करते हुए कहा कि यह बजट केवल एक वित्तीय विवरण नहीं है, बल्कि यह ‘विकसित भारत @2047’ के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए तैयार किया गया एक सशक्त रोडमैप है।
1. रणनीतिक स्वायत्तता और पूंजीगत व्यय: विकास की नई परिभाषा
मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से बजट में पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) में की गई वृद्धि की सराहना की। अर्थशास्त्र के सिद्धांतों के अनुसार, पूंजीगत व्यय में वृद्धि का ‘मल्टीप्लायर इफेक्ट’ (गुणक प्रभाव) होता है, जो न केवल तत्काल रोजगार पैदा करता है बल्कि भविष्य की उत्पादकता की नींव भी रखता है।
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बुनियादी ढांचे का विस्तार: उत्तराखंड जैसे हिमालयी राज्य के लिए सड़क, रेल और हवाई संपर्क जीवन रेखा के समान हैं। पूंजीगत व्यय बढ़ने से ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना और चारधाम ऑल-वेदर रोड जैसे प्रोजेक्ट्स को नई गति मिलेगी।
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रणनीतिक मजबूती: मुख्यमंत्री ने जोर दिया कि यह बजट भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और संप्रभुता को सुदृढ़ करता है, जो विशेष रूप से उत्तराखंड जैसे सीमांत (Border) राज्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
2. समावेशी विकास के तीन स्तंभ
मुख्यमंत्री धामी ने बजट को तीन प्रमुख स्तंभों पर आधारित बताया है, जो सीधे तौर पर देवभूमि के हर वर्ग को लाभान्वित करेंगे:
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संतुलित एवं समावेशी विकास: यह सुनिश्चित करना कि विकास का लाभ केवल महानगरों तक सीमित न रहे, बल्कि पहाड़ों के अंतिम गांव तक पहुंचे।
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वंचित वर्गों का क्षमता निर्माण: अनुसूचित जाति, जनजाति और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए कौशल विकास के विशेष प्रावधान।
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सबका साथ-सबका विकास: महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों के लिए विशेष सुरक्षा और सहायता तंत्र।
3. शहरी पुनरुद्धार: टियर-2 और टियर-3 शहरों का कायाकल्प
बजट 2026-27 में टियर-2 और टियर-3 शहरों के विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि इससे उत्तराखंड के प्रमुख शहर जैसे देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश, हल्द्वानी और रुद्रपुर को आधुनिक शहरी बुनियादी ढांचे (Urban Infrastructure) के लिए विशेष फंड मिलेगा।
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शहरी अवसंरचना: बेहतर ड्रेनेज सिस्टम, स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट और सार्वजनिक परिवहन में सुधार।
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महिला छात्रावास: मुख्यमंत्री ने प्रत्येक जनपद में महिला छात्रावास बनाने की घोषणा का स्वागत किया। यह कदम उच्च शिक्षा और कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा एवं सशक्तिकरण के लिए मील का पत्थर साबित होगा।
4. ग्रीन इकोनॉमी और पर्यटन: उत्तराखंड की प्राकृतिक संपदा का लाभ
नवीनतम शोध और आर्थिक रुझान बताते हैं कि भविष्य ‘ग्रीन इकोनॉमी’ का है। बजट में ग्रीन एनर्जी पर विशेष फोकस उत्तराखंड के लिए वरदान साबित हो सकता है।
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सतत पर्यटन (Sustainable Tourism): पर्यटन क्षेत्र के नीतिगत प्रावधानों से स्थानीय युवाओं के लिए ‘होमस्टे’ और ‘इको-टूरिज्म’ के क्षेत्र में व्यापक अवसर खुलेंगे।
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स्थानीय उत्पाद और आयुष: आयुष, फार्मा, हथकरघा और खादी को प्रोत्साहन मिलने से राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। शोध बताते हैं कि वैश्विक बाजार में ‘ऑर्गेनिक’ और ‘आयुष’ उत्पादों की मांग प्रतिवर्ष 15% से अधिक की दर से बढ़ रही है। उत्तराखंड के ‘मंडुआ’, ‘झंगोरा’ और औषधीय पौधों को अब वैश्विक बाजार मिलने का मार्ग प्रशस्त होगा।
5. ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और विश्वास आधारित शासन
मुख्यमंत्री ने ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ और ‘विश्वास आधारित शासन’ (Trust-based Governance) की सराहना की। इसका अर्थ है कि अब उद्यमियों और आम नागरिकों पर संदेह करने के बजाय, उन पर भरोसा किया जाएगा और अनुपालन (Compliance) के बोझ को कम किया जाएगा।
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निवेश और रोजगार: नियमों के सरलीकरण से उत्तराखंड में निवेश बढ़ेगा, जिससे पलायन जैसी बड़ी समस्या पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।
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कौशल विकास: युवाओं को उभरती प्रौद्योगिकियों जैसे AI, रोबोटिक्स और डेटा एनालिटिक्स में प्रशिक्षित करने के लिए बजट में विशेष प्रावधान हैं।
6. सहयोगात्मक संघवाद (Cooperative Federalism) और 16वां वित्त आयोग
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों में उत्तराखंड के विशिष्ट भौगोलिक परिस्थितियों (कठिन भूभाग और वन क्षेत्र) का ध्यान रखा गया है।
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राज्य के प्रस्तावों को मिली जगह: राज्य सरकार ने समय-समय पर केंद्र को जो सुझाव दिए थे, उन्हें प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से बजट में शामिल किया गया है। यह केंद्र और राज्य के बीच मजबूत तालमेल का प्रमाण है।
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राजस्व साझाकरण: हिमालयी राज्यों को मिलने वाले विशेष अनुदान और केंद्रीय योजनाओं में 90:10 के अनुपात का जारी रहना राज्य के वित्तीय स्वास्थ्य के लिए सुखद है।
आत्मनिर्भर उत्तराखंड का संकल्प
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अनुसार, केंद्रीय बजट 2026-27 उत्तराखंड को रोजगार, निवेश और निर्यात के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। यह बजट राज्य की ‘ग्रीन इकोनॉमी’ को गति देने के साथ-साथ ‘वाइब्रेंट विलेज’ कार्यक्रम के तहत सीमांत गांवों के विकास को भी सुनिश्चित करेगा।
उत्तराखंड अब केवल एक पर्यटन गंतव्य नहीं, बल्कि निवेश और नवाचार का केंद्र बनने की दिशा में अग्रसर है। मुख्यमंत्री का विजन और केंद्र का सहयोग मिलकर ’21वीं सदी का तीसरा दशक उत्तराखंड का दशक’ बनाने की घोषणा को चरितार्थ कर रहे हैं।
