देहरादून। उत्तराखंड की विकास यात्रा में पिछले कुछ वर्ष ऐतिहासिक बदलावों के साक्षी रहे हैं। एक समय था जब राज्य की बड़ी परियोजनाएं केवल सरकारी फाइलों के अंबार और फाइलों पर जमी धूल तक सीमित थीं। लेकिन आज तस्वीर बदल चुकी है। 25 वर्षों के सफर में उत्तराखंड ने कई उतार-चढ़ाव देखे, लेकिन वर्तमान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दृढ़ संकल्प ने इन लंबित योजनाओं को नई ऊर्जा दी है।
जानकार कहते हैं कि 40-50 सालों से लोग किसी ऐसे ‘भगीरथ’ का इंतजार कर रहे थे जो इन योजनाओं को धरातल पर उतारे, और आज धामी सरकार ने अपनी इच्छाशक्ति से यह कर दिखाया है।
1. जमरानी बांध: कुमाऊं के सपनों को मिली नई उड़ान
नैनीताल जिले में गोला नदी पर प्रस्तावित जमरानी बांध परियोजना दशकों से राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी के कारण अटकी हुई थी। मुख्यमंत्री धामी ने न केवल इसके लिए केंद्र से भारी बजट स्वीकृत कराया, बल्कि इसे ‘प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना’ में शामिल करवाकर इसके निर्माण का रास्ता साफ किया।
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लाभ: इस परियोजना से हल्द्वानी और आसपास के क्षेत्रों को पर्याप्त पेयजल मिलेगा।
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प्रभाव: लाखों हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई की सुविधा मिलेगी और भविष्य में बिजली संकट भी दूर होगा।
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रोजगार: परियोजना के शुरू होने से स्थानीय स्तर पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं।
2. सौंग बांध: देहरादून की ‘लाइफलाइन’ का पुनर्जन्म
राजधानी देहरादून में पेयजल संकट एक बड़ी चुनौती रहा है। सौंग बांध परियोजना की शुरुआत भले ही 2003 में हुई हो, लेकिन फाइलों से निकलकर इसका वास्तविक काम सितंबर 2024 में शुरू हुआ।
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भविष्य का विजन: इसे साल 2050 तक की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया जा रहा है।
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विदेशी निवेश: इस प्रोजेक्ट के लिए फ्रांस की विकास एजेंसी (AFD) 80% वित्तीय सहायता दे रही है।
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मुख्य आकर्षण: इस बांध से रोजाना 150 मिलियन लीटर (MLD) पानी मिलेगा और बिजली उत्पादन के साथ-साथ यह पर्यटन का भी बड़ा केंद्र बनेगा। इसका लक्ष्य 2030 तक पूरा होने का है।
3. लखवाड़ बांध: 6 राज्यों की प्यास बुझाएगा उत्तराखंड
यमुना नदी पर बनने वाली लखवाड़ परियोजना उत्तराखंड की शक्ति का प्रतीक है। 1976 में स्वीकृत होने के बाद 1992 में यह काम ठप हो गया था। पीएम मोदी की पहल और सीएम धामी के फॉलोअप के बाद अब यह प्रोजेक्ट तेजी से आगे बढ़ रहा है।
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राष्ट्रीय महत्व: यह 300 मेगावाट की परियोजना उत्तर भारत के छह राज्यों (उत्तराखंड, यूपी, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और हिमाचल) को फायदा पहुँचाएगी।
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डेडलाइन: सरकार ने इसे 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है।
विकास के अन्य स्तंभ: एम्स से लेकर हवाई सेवाओं तक
मुख्यमंत्री धामी की विकास नीति केवल बांधों तक सीमित नहीं है। राज्य के दुर्गम क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए कई मोर्चों पर काम हो रहा है:
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स्वास्थ्य क्रांति: ऋषिकेश एम्स की सफलता के बाद, उधमसिंह नगर (किच्छा) में एम्स के सैटेलाइट सेंटर का काम युद्धस्तर पर जारी है।
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हवाई कनेक्टिविटी: सीमांत जिला पिथौरागढ़ अब हवाई सेवा से जुड़ चुका है। नैनी सैनी एयरपोर्ट से नियमित उड़ानें शुरू होना पहाड़ के लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।
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रेलवे: ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन का काम अब अपने अंतिम चरणों की ओर है, जो पहाड़ की आर्थिकी को पूरी तरह बदल देगा।
“अभी तो धामी शुरू हुए हैं…”
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि धामी सरकार ने अपने कार्यकाल में ‘पेंडिंग प्रोजेक्ट्स’ को ‘प्रोग्रेसिव प्रोजेक्ट्स’ में तब्दील कर दिया है। पिछले 25 वर्षों में उत्तराखंड ने जो रफ्तार नहीं देखी थी, वह अब धरातल पर दिख रही है। फाइलों से धूल झाड़कर योजनाओं को लागू करना यह दर्शाता है कि उत्तराखंड अब एक “विकसित राज्य” बनने की दिशा में अग्रसर है।
