हरित क्रांति की ओर उत्तराखंड: सौर ऊर्जा क्षमता 1 गीगावाट के पार, बना ऊर्जा आत्मनिर्भरता का नया मॉडल

देहरादून: देवभूमि उत्तराखंड ने अपनी विकास यात्रा में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ते हुए 1 गीगावाट (1027.87 मेगावाट) से अधिक स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता का आंकड़ा पार कर लिया है। यह उपलब्धि राज्य को न केवल ‘ऊर्जा प्रदेश’ के रूप में नई पहचान दे रही है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दिशा में भारत के लक्ष्यों को भी मजबूती प्रदान कर रही है।

प्रधानमंत्री के विजन और मुख्यमंत्री के नेतृत्व का प्रतिफल

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने इस सफलता का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “आत्मनिर्भर भारत” और हरित ऊर्जा विजन को दिया है। उन्होंने कहा कि केंद्र की नीतियों और राज्य की सक्रियता के समन्वय से उत्तराखंड में सौर ऊर्जा अब एक ‘जनांदोलन’ का रूप ले चुकी है।

“यह उपलब्धि प्रधानमंत्री जी के दूरदर्शी नेतृत्व का परिणाम है। हमने सौर ऊर्जा को केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे युवाओं के लिए स्वरोजगार का सशक्त माध्यम बनाया है।” — श्री पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री


आंकड़ों की जुबानी: कहाँ से आ रही है बिजली?

राज्य की कुल 1027.87 मेगावाट क्षमता विभिन्न क्षेत्रों के संतुलित योगदान का परिणाम है। नीचे दिए गए आंकड़ों से स्पष्ट है कि बड़े प्लांट के साथ-साथ घरेलू और सरकारी स्तर पर भी सौर ऊर्जा को अपनाया गया है:

श्रेणी (Category) स्थापित क्षमता (मेगावाट)
ग्राउंड माउंटेड सोलर प्लांट 397 MW
रूफटॉप सोलर (PM सूर्यघर) 241 MW
मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना 137 MW
कॉमर्शियल नेट मीटरिंग 110 MW
कैप्टिव सोलर पावर प्लांट 51 MW
कनाल टॉप एवं कनाल बैंक 37 MW
सरकारी भवनों पर सोलर प्लांट 26 MW

भविष्य की योजनाएं: अभी और बढ़ेगी रफ्तार

राज्य सरकार इस उपलब्धि पर रुकने वाली नहीं है। वर्तमान में कई परियोजनाओं पर तेजी से काम चल रहा है:

  • मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना: 100 मेगावाट से अधिक के नए संयंत्रों की स्थापना।

  • कैप्टिव सोलर: 30 मेगावाट की अतिरिक्त क्षमता पर कार्य।

  • सरकारी भवन: 13.5 मेगावाट के नए सोलर प्लांट की प्रक्रिया जारी।

UREDA की अहम भूमिका

इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे उत्तराखंड अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (UREDA) का विशेष योगदान रहा है। उरेडा ने न केवल तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया, बल्कि दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों तक सौर समाधान पहुँचाने और सब्सिडी प्रक्रियाओं को सरल बनाने में सेतु का कार्य किया है।

इस उपलब्धि के बड़े लाभ

  1. स्वरोजगार: हजारों स्थानीय युवाओं और उद्यमियों को अपने गाँव-कस्बों में ही आय के साधन मिले।

  2. कार्बन उत्सर्जन में कमी: हरित ऊर्जा के प्रयोग से हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण में मदद मिल रही है।

  3. ऊर्जा सुरक्षा: बिजली के लिए बाहरी राज्यों पर निर्भरता कम हुई है।

  4. Vocal for Local: स्थानीय स्तर पर निर्मित ऊर्जा संसाधनों को प्रोत्साहन।

अनुकूल नीतिगत वातावरण, सरल अनुमोदन प्रक्रिया और सरकारी प्रोत्साहन ने उत्तराखंड को सौर ऊर्जा के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों की पंक्ति में खड़ा कर दिया है। 1 गीगावाट का यह मील का पत्थर राज्य की ऊर्जा सुरक्षा और ‘नेट जीरो’ (Net Zero) लक्ष्य की दिशा में एक सशक्त कदम है।

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