उत्तराखण्ड पर्यटन में ऐतिहासिक ‘छह हजारी’ छलांग: एक साल में 6 करोड़ पर्यटकों का नया कीर्तिमान

देहरादून। देवभूमि उत्तराखण्ड के इतिहास में वर्ष 2025 एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विजन और ‘वेडिंग डेस्टिनेशन’ से लेकर ‘आध्यात्मिक पर्यटन’ तक के रोडमैप ने राज्य को एक ऐसी ऊंचाई पर खड़ा कर दिया है, जहां पहली बार पर्यटकों और तीर्थयात्रियों का वार्षिक आंकड़ा 6 करोड़ के पार पहुंच गया है।

यह केवल एक संख्या नहीं है, बल्कि उत्तराखण्ड की बदलती आर्थिकी, बेहतर कनेक्टिविटी और सुरक्षित पर्यटन का जीता-जागता प्रमाण है।

आंकड़ों की जुबानी: 2021 से 2025 तक का सफर

राज्य गठन के बाद यह पहली बार है जब उत्तराखण्ड ने पर्यटन के क्षेत्र में इतनी विशाल उपलब्धि हासिल की है। पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों का विश्लेषण करें तो विकास की गति स्पष्ट दिखाई देती है:

वर्ष पर्यटकों/तीर्थयात्रियों की संख्या वृद्धि का रुझान
2021 2,00,18,115 महामारी के बाद पुनरुद्धार
2022 5,39,81,338 भारी उछाल
2023 5,96,36,601 स्थिरता और विस्तार
2024 5,95,50,277 सतत विकास
2025 6,03,21,194 ऐतिहासिक रिकॉर्ड

जनपदवार विश्लेषण: हरिद्वार और देहरादून बने मुख्य आकर्षण

वर्ष 2025 के आंकड़ों के अनुसार, आस्था की नगरी हरिद्वार ने एक बार फिर बाजी मारी है। वहीं, देहरादून और टिहरी भी पर्यटकों की पसंदीदा सूची में शीर्ष पर रहे हैं:

  • हरिद्वार (3.42 करोड़): गंगा आरती और कुंभ क्षेत्र होने के कारण यहाँ सर्वाधिक 3,42,49,380 श्रद्धालु पहुंचे।

  • देहरादून (67.35 लाख): राजधानी होने के साथ-साथ मसूरी और ऋषिकेश जैसे केंद्रों ने भारी भीड़ को आकर्षित किया।

  • टिहरी (53.29 लाख): टिहरी झील और एडवेंचर स्पोर्ट्स ने इसे नई पहचान दी है।

  • विदेशी सैलानी: कुल आंकड़ों में 1,92,533 विदेशी पर्यटक भी शामिल हैं, जो दर्शाता है कि उत्तराखण्ड अब ग्लोबल मैप पर चमक रहा है।

धामी सरकार की रणनीतियां: क्यों टूटा रिकॉर्ड?

1. शीतकालीन यात्रा (Winter Tourism) को बढ़ावा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मुखबा’ प्रवास और शीतकालीन चारधाम यात्रा के प्रोत्साहन ने पर्यटकों को साल के 12 महीने पहाड़ों की ओर मोड़ने में मदद की है। पहले पर्यटन केवल गर्मियों तक सीमित था, लेकिन अब स्कीइंग (औली) और विंटर ट्रेकिंग ने सर्दियों में भी रौनक बनाए रखी है।

2. बुनियादी ढांचे का विकास (Infrastructure)

  • ऑल वेदर रोड: चारधाम यात्रा मार्गों को सुगम और सुरक्षित बनाया गया।

  • ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना: इस रेल लाइन के काम ने भविष्य की उम्मीदें बढ़ाई हैं और वर्तमान में सड़क कनेक्टिविटी को बेहतर किया है।

  • होमस्टे योजना: स्थानीय निवासियों को पर्यटन से जोड़ने के लिए 5,000 से अधिक होमस्टे को बढ़ावा दिया गया, जिससे पर्यटकों को ‘पहाड़ी संस्कृति’ का अनुभव मिला।

3. सुरक्षा और डिजिटल सुविधा

मुख्यमंत्री धामी ने पर्यटकों की सुरक्षा को “सर्वोच्च प्राथमिकता” दी है। यात्रा पंजीकरण के लिए डिजिटल पोर्टल, क्यूआर कोड आधारित ट्रैकिंग और बेहतर पुलिसिंग ने यात्रियों में विश्वास जगाया है।

रिसर्च और भविष्य की संभावनाएं

पर्यटन विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तराखण्ड में पर्यटकों की यह संख्या केवल धार्मिक यात्रा (Pilgrimage) तक सीमित नहीं है। राज्य अब निम्नलिखित क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहा है:

  1. वेलनेस और योग: ऋषिकेश और अल्मोड़ा जैसे क्षेत्रों में आयुष और ध्यान केंद्रों की मांग में 25% की वृद्धि हुई है।

  2. वेडिंग डेस्टिनेशन: त्रियुगीनारायण और जिम कॉर्बेट जैसे स्थान अब शादियों के लिए पहली पसंद बन रहे हैं।

  3. ईको-टूरिज्म: हाल ही में 83 नई चोटियों को खोलने और ईको-फ्रेंडली माउंटेन ट्रेल्स के विकास से ‘साहसिक पर्यटन’ में निवेश की भारी संभावनाएं हैं।

स्थानीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

पर्यटन उत्तराखण्ड की जीडीपी (GDP) का लगभग 15-20% हिस्सा साझा करता है। 6 करोड़ पर्यटकों के आने का सीधा अर्थ है:

  • स्थानीय टैक्सी चालकों, गाइडों और पोर्टर्स की आय में वृद्धि।

  • हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों (जैसे मंडुआ, झंगोरा) की मांग में इजाफा।

  • पहाड़ों से होने वाले पलायन में कमी, क्योंकि युवाओं को अपने गांव के पास ही रोजगार मिल रहा है।

चुनौतियां और जिम्मेदार पर्यटन (Responsible Tourism)

इतनी भारी संख्या में पर्यटकों के आगमन के साथ पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है।

“हिमालय की नाजुक पारिस्थितिकी को बचाए रखना हमारी जिम्मेदारी है। ‘लीव नो ट्रेस’ के सिद्धांत को अपनाना और प्लास्टिक मुक्त पर्यटन को बढ़ावा देना अब अनिवार्य हो गया है।” – पर्यावरण विशेषज्ञ

सरकार द्वारा वेस्ट मैनेजमेंट (कचरा प्रबंधन) और ट्रैफिक नियंत्रण के लिए ‘स्मार्ट कंट्रोल रूम’ की स्थापना की जा रही है ताकि प्रकृति और प्रगति के बीच संतुलन बना रहे।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखण्ड ने यह साबित कर दिया है कि यदि बुनियादी ढांचा और सुरक्षा मजबूत हो, तो देवभूमि दुनिया का सबसे बड़ा पर्यटन हब बन सकती है। 6 करोड़ का यह आंकड़ा केवल एक शुरुआत है; आने वाले वर्षों में ‘नव्य और भव्य उत्तराखण्ड’ पर्यटन की वैश्विक परिभाषा बदलने के लिए तैयार है।

क्या आप उत्तराखण्ड के किसी विशिष्ट क्षेत्र (जैसे केदारनाथ धाम या जिम कॉर्बेट) के लिए पर्यटन विकास की विशिष्ट योजनाओं के बारे में जानना चाहेंगे?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *