उत्तराखंड में रिवर्स पलायन का बड़ा संदेश: कर्नल और महिला आईजी शहर छोड़ गाँव लौटे बन गए प्रधान जी!

देहरादून: पिछले 4 सालों में उत्तराखंड की बदलती तस्वीर में पलायान किस तरह से रुक रहा है उसका जीता जागता उदाहरण है प्रदेश में चल रहे पंचायत चुनाव में दो रिटायर्ड़ बड़े अधिकारियों का ग्राम पंचायत के लिए निर्विरोध चुना जाना।

लोग अब गांव की ओर अब लो लौट रहे हैं और ऐसा संभव इसलिए हो पा रहा है कि धामी सरकार ने देवभूमि के गांव को संवारने और वहां के लोगों को वापस बुलाने के लिए नई नीतियों और प्रयासों पर जोर दिया।

सीएम धामी की दूदर्शिता कि अगर गांव समृ्द्ध होगा तो राज्य समृद्ध होगा और फिर देश समृद्ध होगा, अब धरातल पर दिखने लगा है

युवा शहरों से अपने गांव लौट रहे हैं, सरकार द्वारा दी जा रही सुविधाओं का लाभ लेकर व्यवसायिक खेती कर रहे हैं,तो कुछ टूरिज्म से जुड़कर अपना व्यवसाय खड़ा कर रहे हैं। 

  • सेना रिटायर्ड कर्नल यशपाल नेगी पौड़ी गढ़वाल ज़िले के बीरोंखाल ब्लॉक गांव बिरगण से निर्विरोध प्रधान चुने गए हैं।
  • रिटायर्ड IPS अधिकारी विमला गुंज्याल धारचूला में भारत-चीन सीमा से सटे गांव गुंजी के लिए निर्विरोध चुनी गई प्रधान इस गांव को बेस्ट वाइब्रेंट विलेज का भी अवॉर्ड मिल चुका है

विमला गुंज्याल का मानना है कि प्रदेश में कुछ हदतक सकारात्मक माहौल बन चुका है। गांव में अब तमाम सुविधाएं देखने को मिल रही है। सड़कें पानी बिजली की सुविधाएं धरातल पर दिख रही हैं। ऐसे में हमने सोचा क्यों ना चल कर गांव में रहा जाए।

ग्रामीणों को समृध किया जाए। सरकार कि योजनाओं को लेकर उन्हें जागरुक किया जाए और तमाम सरकारी लाभकारी योजना से उन्हें जोड़कर राज्य से बाहर गए लोगो को राज्य में वापिस आने के लिए प्रेरित करें।

दरअसल, उत्तराखंड में इन दिनों पंचायत चुनाव का प्रचार अभियान जोरों पर है. जगह-जगह पोस्टर, प्रचार, जनसभाएं और चुनावी रणनीतियां देखने को मिल रही हैं और कुर्सी के लिए खूब जद्दोजेहद चल रही है.

लेकिन इस भीड़-भाड़, होड़ और सत्ता की चाह से दूर दो ऐसे नाम सामने आए हैं, जिन्होंने सादगी, सेवा और सच्चे नेतृत्व की मिसाल पेश की है।

उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान देश के कई हिस्सों में सेवाएं दी हैं, लेकिन गांव हमेशा उनके दिल में रहा. दिल्ली में तैनाती के दौरान वे हर माह अपने गांव की बैठक में शामिल होते थे ताकि लोगों से मुलाकात हो सके. कर्नल नेगी बताते हैं, ‘पहाड़ का अपनाअपन, लोगों का प्यार तो उन्हें अपनी तरफ खींच ही लाया, साथ में पलायन एक मुद्दा था जो मुझे कचोटता था। अब वो बात नहीं है। हर तरह की सुविधाएं हैं बस ग्रामीणों के उससे जोड़ना है।

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