उत्तराखंड की राजनीति में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की कुर्सी को लेकर अफवाहें कोई नई बात नहीं हैं। 2021 से अब तक (अगस्त 2025 तक) वे लगातार में, इन अफवाहों का दौर तेज हो गया है। ये अफवाहें मुख्य रूप से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर फैल रही हैं, जहां कुछ राजनीतिक विश्लेषक, पत्रकार और विपक्षी समर्थक इन्हें बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहे हैं। आइए, इसकी वजहों और तरीकों को विस्तार से समझते हैं।
अफवाहें कैसे फैलाई जा रही हैं?
1. **सोशल मीडिया पर मासिक अफवाहें (X पोस्ट्स के माध्यम से):**
– धामी के हर दिल्ली दौरे को अफवाहों का आधार बनाया जाता है। वे राज्य के विकास मुद्दों (जैसे चारधाम यात्रा, मेट्रो प्रोजेक्ट, या मंदिर विकास) पर केंद्रीय नेताओं से मिलने जाते हैं, लेकिन अफवाहबाज इसे “इस्तीफा देने का दौरा” बता देते हैं।
उदाहरण के लिए, 27 अगस्त 2025 को एक पोस्ट में कहा गया कि “धामी दिल्ली जाते हैं तो लोग पूछते हैं—मुलाकात करने गए हैं या इस्तीफा देने?” इसी तरह, 23 अगस्त 2025 की एक पोस्ट में लिखा गया कि “हर दिल्ली दौरे पर अफवाहें शुरू हो जाती हैं, मानो कुर्सी हिल रही हो।” ये पोस्ट्स वायरल हो जाती हैं, क्योंकि वे ड्रामा और सस्पेंस पैदा करती हैं।
मार्च 2025 में एक पोस्ट ने सीधे दावा किया कि “भाजपा नेतृत्व धामी को हटा सकता है, क्योंकि 2027 चुनाव से 2 साल पहले सत्ता विरोधी लहर को काबू करने के लिए CM बदलना पड़ता है।” यह पुरानी घटनाओं (जैसे त्रिवेंद्र सिंह रावत और तीरथ सिंह रावत को हटाना) का हवाला देकर अफवाह को विश्वसनीय बनाता है।
2. पार्टी आंतरिक कलह और विपक्षी प्रचार:
– भाजपा के कुछ असंतुष्ट नेता (जिनकी महत्वाकांक्षाएं पूरी नहीं हुईं, जैसे मंत्रिमंडल विस्तार में जगह न मिलना) खुद इन अफवाहों को हवा देते हैं। एक पोस्ट में उल्लेख है कि “पार्टी के भीतर कुछ नेता सरकार को घेर रहे हैं, दिल्ली वाले हमदर्द ने चाभी भर दी है कि मंत्रिमंडल विस्तार में शोर मचाओ तो CM निपट जाएगा।” ये नेता सोशल मीडिया पर या निजी बातचीत में सरकार की आलोचना करते हैं, जो जल्दी फैल जाती है।
विपक्ष (मुख्य रूप से कांग्रेस) के समर्थक भी इसमें शामिल हैं। उदाहरणस्वरूप, 26 अगस्त 2025 को एक पोस्ट में धामी के थराली दौरे के वीडियो शेयर कर कहा गया कि “ग्रामीणों ने रौद्र रूप दिखाया,” जो असल में आपदा राहत से जुड़ा था, लेकिन इसे सरकार के खिलाफ मोड़ दिया गया। इसी तरह, बाढ़ और अवैध खनन के आरोपों (6 अगस्त 2025 की पोस्ट) को जोड़कर अफवाहें जोड़ी जाती हैं।
3. मीडिया और अनौपचारिक चैनल:
– कुछ स्थानीय मीडिया या व्हाट्सएप ग्रुप्स में ये अफवाहें शुरू होती हैं, फिर एक्स पर वायरल हो जाती हैं। उदाहरण के लिए, मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलों (जो 2023 से चल रही हैं) को CM बदलाव से जोड़ा जाता है।
अफवाहें क्यों फैलाई जा रही हैं?
ये अफवाहें बिना ठोस आधार के हैं, लेकिन राजनीतिक मकसद से फैलाई जा रही हैं। जिसके कई कारण हैं ।
1. पार्टी आंतरिक प्रतिस्पर्धा और असंतोष:
– धामी की लोकप्रियता (विकास कार्यों जैसे UCC लागू करना, अवैध मजारें हटाना, चारधाम यात्रा सुधार, और हिंदुत्व एजेंडा) से कुछ भाजपा नेता जलते हैं। वे खुद CM बनना चाहते थे, लेकिन दिल्ली ने धामी को चुना। एक पोस्ट में कहा गया कि “ये नेता सदमे से बाहर नहीं आ पाए कि युवा चेहरा चुना गया।” मंत्रिमंडल विस्तार (जो जल्द हो सकता है) को हथियार बनाकर वे दबाव बनाते हैं।
2. **2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति:**
– उत्तराखंड में भाजपा की मजबूत पकड़ है (2022 में 47/70 सीटें), लेकिन विपक्ष सत्ता विरोधी लहर पैदा करना चाहता है। अफवाहें फैलाकर वे जनता में असंतोष पैदा करने की कोशिश करते हैं। एक पोस्ट में दावा किया गया कि “जनता भाजपा से परेशान है, 2027 में सूपड़ा साफ होगा।” साथ ही, भाजपा के आंतरिक गुट इसे कमजोर करने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं।
3. **धामी के सख्त फैसलों से परेशान**
– धामी के कार्य जैसे अवैध निर्माण हटाना (मजारें, मदरसे), नकलरोधी कानून, मतांतरण रोक, और पर्यावरण संरक्षण (बाढ़ के बाद कार्रवाई) से कुछ समूह नाराज हैं। एक पोस्ट में कहा गया कि “खनन माफिया के तोर पर कुख्यात हैं धामी।” विपक्ष इन्हें बढ़ा-चढ़ाकर पेश करता है, जैसे बाढ़ को “सरकार की लापरवाही” बताना। हिंदुत्व एजेंडा (जैसे ऑपरेशन कालनेमि ढोंगी बाबाओं पर) से अल्पसंख्यक वोट बैंक प्रभावित होता है, जो अफवाहों को ईंधन देता है।
4. **केंद्र का समर्थन नजरअंदाज करना:**
– अफवाहें ज्यादातर झूठी हैं। एक हालिया पोस्ट (27 अगस्त 2025) में साफ कहा गया कि “सभी अफवाहें बकवास हैं, धामी को पूरा समर्थन है, वे 2027 का चेहरा हो सकते हैं।” धामी के दिल्ली दौरे विकास पर केंद्रित हैं, न कि इस्तीफे पर। उनकी लोकप्रियता (जैसे 15 करोड़ पर्यटक सीजन में) और संघ-भाजपा का समर्थन अफवाहों को हवा को कर देता है
अफवाहें मजबूत करती हैं धामी की पोजीशन
ये अफवाहें धामी को कमजोर करने के बजाय मजबूत कर रही हैं। हर बार (जैसे 2022 में चुनाव हारने के बाद भी CM बने) वे उभरकर आए हैं। जानकारों का कहना है कि केंद्र (पीएम मोदी, अमित शाह) उनसे संतुष्ट हैं, क्योंकि उन्होंने UCC, डेमोग्राफी सुधार, और पर्यटन विकास जैसे बड़े काम किए। 2027 चुनाव में वे ही चेहरा होंगे। जनता को सलाह है कि अफवाहों पर भरोसा न करें—विकास कार्यों (जैसे देहरादून मेट्रो, मंदिर विकास) पर नजर रखें। अगर कोई ठोस खबर आएगी, तो आधिकारिक स्रोतों से ही पता चलेगी।
