इतनी बड़ी तबाही से कैसे निपटी उत्तराखंड की धामी सरकार, रिकॉर्ड तोड़ काम ने कर दिया विपक्ष का मुंह बंद

Uttarakhand  न्यूज़: जुलाई-अगस्त 2025 के दौरान उत्तराखंड में भारी वर्षा, बादल फटने और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं ने राज्य के कई जिलों जैसे उत्तरकाशी (धराली, थराली), चमोली, रुद्रप्रयाग, पौड़ी और उत्तरकाशी में व्यापक तबाही मचाई। इन घटनाओं में कई जानें गईं, गांव-बाजार मलबे में दब गए, सड़कें अवरुद्ध हो गईं और सैकड़ों लोग लापता हो गए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने तत्काल राहत, बचाव और पुनर्वास के लिए बहुआयामी रणनीति अपनाई। केंद्र सरकार (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह) का भी पूर्ण सहयोग रहा।

1.तत्काल बचाव और राहत कार्य (रिस्क्यू ऑपरेशंस)

**एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सेना और आईटीबीपी की तैनाती**: आपदा की खबर मिलते ही राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा मोचन बल (SDRF), भारतीय सेना, इंडो-तिब्बती बॉर्डर पुलिस (ITBP) और स्थानीय प्रशासन को सक्रिय किया गया। उदाहरण के लिए, 5 अगस्त 2025 को धराली (उत्तरकाशी) में बादल फटने के बाद NDRF की टीमें हेलीकॉप्टरों से प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचीं। मलबे हटाने के लिए भारी मशीनरी (जैसे जेसीबी, बुलडोजर) और ड्रोन का उपयोग किया गया। 28 अगस्त को रुद्रप्रयाग के छेनागाड़ गांव में भी इसी तरह का ऑपरेशन चलाया गया, जहां स्वयंसेवक संगठनों (जैसे RSS) के साथ मिलकर काम किया गया।

– **हेलीकॉप्टर और हवाई सर्वेक्षण**:

सीएम धामी के निर्देश पर चंडीगढ़, सरसावा और आगरा से दो चिनूक और दो एमआई-17 हेलीकॉप्टर जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर तैनात किए गए। इनका उपयोग सड़कें अवरुद्ध होने पर लोगों को निकालने, राहत सामग्री पहुंचाने और हवाई सर्वेक्षण के लिए किया गया। 6 अगस्त को धराली में सीएम ने खुद हवाई सर्वेक्षण कर स्थिति का जायजा लिया।

– **चिकित्सा और मनोवैज्ञानिक सहायता**:

घायलों के लिए देहरादून और ऋषिकेश के अस्पतालों में आईसीयू बेड आरक्षित किए गए। धराली जैसे क्षेत्रों में तीन मनोचिकित्सकों को तैनात किया गया ताकि पीड़ितों को मानसिक सहायता मिल सके। खाद्य पैकेट, दवाइयां और अस्थायी आश्रय स्थल स्थापित किए गए।

2. **आर्थिक सहायता और मुआवजा पैकेज**
– **राहत पैकेज की घोषणा**: 10 अगस्त 2025 को धराली आपदा के बाद सीएम धामी ने प्रभावित परिवारों के लिए बड़ा राहत पैकेज घोषित किया। मृतकों के परिजनों को 5 लाख रुपये का मुआवजा, घायलों को 1 लाख रुपये और घर-दुकान क्षतिग्रस्त होने पर 50 हजार से 2 लाख रुपये तक की सहायता दी गई। पौड़ी जिले के लिए धराली-थराली मॉडल पर आधारित राहत पैकेज की घोषणा 26 अगस्त को की गई। हालांकि, कुछ स्थानीय रिपोर्ट्स में मुआवजे में देरी या कम राशि (जैसे 5 हजार रुपये) देने के आरोप लगे, लेकिन सरकार ने इसे सुधारने के निर्देश दिए।

– **अनुपूरक बजट**:

19 अगस्त 2025 को राज्य सरकार ने 53,115 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट पेश किया, जिसमें आपदा प्रबंधन पर विशेष जोर दिया गया। इसमें राहत, पुनर्वास और बुनियादी ढांचे की मरम्मत के लिए फंड आवंटित किए गए।

 

3. **प्रशासनिक और नीतिगत कदम**
– **सीएम का फील्ड विजिट और समीक्षा बैठकें**:

सीएम धामी ने 6 अगस्त को धराली का दौरा किया, जहां उन्होंने पीड़ित परिवारों से मुलाकात की, उनका दुख साझा किया और तत्काल सहायता का आश्वासन दिया। उन्होंने आपदा प्रबंधन बैठकें आयोजित कीं, जिसमें सेना, NDRF और स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वय किया। 12 अगस्त को उन्होंने अधिकारियों को लापरवाही पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए, जैसे आपदा प्रबंधन में देरी करने वालों पर सख्ती।

– **दीर्घकालिक योजना**:

सरकार ने आपदा प्रबंधन मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर मिसाल बनाने की योजना बनाई। इसमें सिविल इमरजेंसी प्लान, स्थानीय प्रशिक्षण और हिमालयी क्षेत्रों में जोखिम मूल्यांकन शामिल है। 21 अगस्त को चंपावत में दो दिवसीय आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण आयोजित किया गया। केंद्रीय सहायता के लिए पीएम मोदी और गृह मंत्री शाह ने फोन पर सीएम से बात की और हर संभव मदद का वादा किया।

– **सड़क और संपर्क बहाली**:

प्रभावित क्षेत्रों में सड़कें जल्द बहाल करने के लिए इंजीनियरिंग टीमों को तैनात किया गया। उदाहरण के लिए, गंगोत्री तीर्थ से धराली तक की 18 किमी सड़क को प्राथमिकता दी गई।

सरकार की कार्यप्रणाली का मूल्यांकन
सरकार की प्रतिक्रिया त्वरित और समन्वित रही, जो हिमालयी क्षेत्र की चुनौतियों (जैसे दुर्गम इलाके, भारी मलबा) को ध्यान में रखते हुए थी। सीएम धामी की सक्रिय भूमिका (फील्ड विजिट, हवाई सर्वे) ने विश्वास बढ़ाया, और केंद्र-राज्य सहयोग ने बचाव को तेज किया। RSS जैसे स्वयंसेवक संगठनों और जमीयत उलमा-ए-हिंद जैसे समुदायों ने भी राहत में योगदान दिया, जिससे सामाजिक एकजुटता दिखी। हालांकि, कुछ आलोचनाएं हैं जैसे मुआवजे में देरी, लापता लोगों की तलाश में धीमापन और कुछ AI-जनरेटेड फोटोज के वायरल होने से भ्रम। कुल मिलाकर, ये कदम प्रभावितों के पुनर्वास की दिशा में सकारात्मक साबित हुए, और राज्य सरकार ने इसे “उत्तराखंड राइजिंग” का हिस्सा बनाया। अधिक अपडेट के लिए आधिकारिक स्रोत जैसे उत्तराखंड सरकार की वेबसाइट या CMO हैंडल देखें।

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