Supersonic Fighter Jet MIG-21: भारत का सुपरसोनिक फाइटर जेट मिग-21 को NATO ने ‘फिशबेड’ का कूल नाम दिया था. मिग-21 ने कई मौकों पर पाकिस्तान के F-104 ‘विडोमेकर’ को हवा में धूल चटाई. मिग-21 के सामने F-104 बेबस हो गया और आखिरकार पाकिस्तान ने इसे रिटायर कर दिया. पढ़ें *मिग-21 से जुड़ी रोचक जानकारी.
Retirement of MiG 21 of Indian Air Force* : करीब 62 साल पहले की बात है, जब पाकिस्तान को अमेरिका से मिला F-104 स्टारफाइटर उसका घमंड का सबब बन गया था. पाकिस्तान इस फाइटर जेट के दम पर भारत को आंखें दिखाने लगा था. लेकिन जब भारत ने अमेरिका से F-104 की बात की, तो अमेरिका ने नाक-भौं सिकोड़ ली. फिर भारत ने ऐसा आसमान का ‘सिकंदर’ खोज निकाला, जिसने अपनी ताकत और चपलता से न सिर्फ पाकिस्तान का गुरूर तोड़ा, बल्कि दुनिया को दिखा दिया कि असली ताकत क्या होती है.
जी हां, हम बात कर रहे हैं भारत के लेजेंडरी सुपरसोनिक फाइटर जेट मिग-21की, जिसने छह दशकों तक आसमान में तिरंगे का परचम लहराया. अब आसमान का यह सिकंदर अपनी आखिरी उड़ान की तैयारी में है, क्योंकि भारतीय वायुसेना अपने आखिरी मिग-21 स्क्वाड्रन को आज यानी 26 सितंबर 2025 को रिटायर करने जा रही है. आइए, इस विदाई के इस मौके पर जानते हैं कि कैसे मिग-21 ने दुश्मनों को धूल चटाई और भारत का नाम रौशन किया.
‘फिशबेड’ जो बना आसमान का बादशाह
1960 के दशक में जब मिग-21 भारतीय वायुसेना में शामिल हुआ, तो ये सोवियत यूनियन (आज का रूस) का बनाया फाइटर जेट एकदम सुपरस्टार बन गया. नाटो ने इसे ‘फिशबेड’ का नाम दिया था, लेकिन भारत के लिए ये था हमारा ‘सिकंदर’. छोटा, हल्का, और मैक 2 की रफ्तार से उड़ने वाला ये जेट उस जमाने का रॉकस्टार था. इसकी खासियत थी इसकी सादगी और ताकत. इसे उड़ाना आसान था, मेंटेनेंस सस्ता था और युद्ध में ये दुश्मन के लिए काल बन जाता था. 1963 में भारत ने इसे अपनी वायुसेना में शामिल किया और फिर हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने इसे लाइसेंस के तहत बनाना शुरू किया. बस, यहीं से मिग-21 की कहानी भारत में हिट हो गई.
