देहरादून: उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में रेल पहुँचाने का सपना अब तेज़ी से साकार हो रहा है। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने आज सचिवालय में ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना और टनकपुर-बागेश्वर रेललाइन की प्रगति को लेकर एक उच्च स्तरीय बैठक की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि इन परियोजनाओं के कार्यों में और अधिक गति लाई जाए ताकि निर्धारित समय सीमा के भीतर इन्हें पूरा किया जा सके।
📍 रेलवे स्टेशनों को बनाया जाएगा ‘हब’
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल मार्ग पर बनने वाले रेलवे स्टेशनों को केवल स्टॉपेज न मानकर उन्हें स्थानीय विकास का केंद्र बनाया जाए।
-
मूलभूत सुविधाएं: स्टेशनों के आसपास के क्षेत्रों को बिजली, पानी और आधुनिक सड़कों जैसी सुविधाओं से लैस किया जाए।
-
विभागीय समन्वय: उन्होंने लोक निर्माण विभाग (PWD) और रेल विकास निगम (RVNL) को बेहतर तालमेल के साथ कार्य करने के निर्देश दिए ताकि कनेक्टिविटी में कोई बाधा न आए।
एस्केप टनल का होगा ‘बहुउद्देशीय’ उपयोग
मुख्यमंत्री ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण और दूरदर्शी संभावना पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि परियोजना के दौरान बनाई जा रही एस्केप टनल (Escape Tunnel) को समानांतर सड़कों के रूप में विकसित करने की संभावनाओं को तलाशा जाए। यदि यह सफल होता है, तो आपातकालीन स्थिति में यह मार्ग स्थानीय यातायात और सुरक्षा की दृष्टि से मील का पत्थर साबित होगा।
पहाड़ों में रेल विस्तार: कर्णप्रयाग से बागेश्वर तक की तैयारी
मुख्यमंत्री ने केवल मौजूदा काम पर ही संतोष नहीं जताया, बल्कि भविष्य की रणनीति भी तय की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि:
-
कर्णप्रयाग से बागेश्वर तक रेल लाइन के विस्तार की संभावनाओं पर तत्काल कार्य शुरू किया जाए।
-
टनकपुर-बागेश्वर रेललाइन की प्रगति की भी समीक्षा की गई, जो कुमाऊं क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
परियोजना का महत्व:
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना न केवल पर्यटन और तीर्थाटन (चारधाम यात्रा) को आसान बनाएगी, बल्कि सामरिक दृष्टि से भी यह भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह पहाड़ों से होने वाले पलायन को रोकने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा देने का कार्य करेगी।
“हमारा लक्ष्य है कि उत्तराखंड का दुर्गम क्षेत्र रेल सेवा से जुड़े, जिससे न केवल यात्रा सुगम हो, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए द्वार खुलें।” — पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री
