देहरादून | 24 फरवरी, 2026
उत्तराखण्ड की बढ़ती भूकंपीय संवेदनशीलता और हिमालयी क्षेत्र की विशिष्ट भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए राज्य सरकार ने एक बड़ा सुरक्षात्मक निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर, राज्य के भवन निर्माण नियमों (Building Bylaws) को अब भारतीय मानक ब्यूरो के नवीनतम संस्करण ISO 1893-2025 के अनुरूप ढाला जाएगा।
पुराने मानकों से नई तकनीक की ओर
वर्तमान में उत्तराखण्ड में भवन निर्माण के नियम ISO 1893-2002 (23 साल पुराने संस्करण) पर आधारित हैं। चूंकि अब पूरा राज्य उच्च भूकंपीय संवेदनशीलता वाले जोन-6 (संशोधित मानकों के अनुसार) के रडार पर है, इसलिए पुराने नियमों में व्यापक संशोधन अनिवार्य हो गया है।
विशेषज्ञ समिति का गठन
मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन ने इस कार्य हेतु CSIR-CBRI रुड़की के निदेशक प्रो. आर. प्रदीप कुमार की अध्यक्षता में 14 सदस्यीय उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है।
समिति की संरचना:
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संयोजक: डॉ. शांतनु सरकार (निदेशक, ULMMC)।
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प्रतिनिधि: CBRI रुड़की, भारतीय मानक ब्यूरो (BIS), IIT, ब्रिडकुल, PWD, सिंचाई विभाग और भू-वैज्ञानिक विशेषज्ञ।
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परामर्शदाता: समिति वास्तुविदों (Architects) और वरिष्ठ अभियंताओं से भी फीडबैक लेगी।
आपदा-सुरक्षित निर्माण की नई संस्कृति
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य भवन निर्माण को केवल कानूनी प्रक्रिया तक सीमित रखना नहीं, बल्कि इसे व्यावहारिक, प्रभावी और आपदा-रोधी बनाना है।
“संशोधित नियमों से न केवल शहरी बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी सुरक्षित निर्माण को बढ़ावा मिलेगा, जिससे भविष्य में आने वाली किसी भी आपदा के जोखिम को न्यूनतम किया जा सके।” — आनंद बर्द्धन, मुख्य सचिव
नए बायलॉज की मुख्य विशेषताएं
सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास, श्री विनोद कुमार सुमन के अनुसार, नए नियमों में निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा:
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भूकंप-रोधी डिजाइन: आधुनिकतम इंजीनियरिंग तकनीकों का समावेश।
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स्ट्रक्चरल सेफ्टी और विंड लोड: तेज हवाओं और संरचनात्मक भार की वैज्ञानिक जांच।
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पारंपरिक बनाम आधुनिक: उत्तराखण्ड की पारंपरिक पहाड़ी निर्माण शैली (जैसे कोटि-बनाल) को आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़ना।
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जलवायु अनुकूलन: पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए निर्माण प्रावधान।
समिति के प्रमुख कार्य और उत्तरदायित्व
यह उच्चस्तरीय समिति केवल रिपोर्ट तैयार नहीं करेगी, बल्कि एक पूर्ण कार्ययोजना प्रस्तुत करेगी:
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वर्तमान बायलॉज का गहन विश्लेषण और कमियों की पहचान।
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भूस्खलन और भूकंप जोखिमों को समाहित करते हुए नया मसौदा (Draft) तैयार करना।
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इंजीनियरों और योजनाकारों के लिए प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण के सुझाव।
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रिपोर्ट को उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) और आवास विभाग को सौंपना।
एक सुरक्षित भविष्य की नींव
उत्तराखण्ड जैसे संवेदनशील राज्य में सुरक्षित निर्माण अब विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता है। नए बिल्डिंग बायलॉज लागू होने से न केवल भवनों की मजबूती बढ़ेगी, बल्कि यह सतत विकास की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। सरकार का यह कदम भविष्य की पीढ़ियों को एक सुरक्षित और टिकाऊ बुनियादी ढांचा प्रदान करने का वादा है।
