देहरादून: मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने आज मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में उत्तराखण्ड कृषि उत्पादन विपणन बोर्ड की महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से कई दूरगामी निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से स्पष्ट कहा कि कृषि और बागवानी के क्षेत्र में राज्य को नई पहचान दिलाने के लिए आधुनिक पद्धतियों और पारंपरिक ज्ञान का समन्वय आवश्यक है।
प्रत्येक विकासखंड में विकसित होगा ‘आदर्श गांव’
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राज्य के प्रत्येक विकासखंड से कम से कम एक गांव का चयन किया जाए और उसे कृषि एवं उद्यान के क्षेत्र में ‘आदर्श गांव’ के रूप में विकसित किया जाए। इन गांवों में स्थानीय संसाधनों और आधुनिक तकनीक के माध्यम से मॉडल तैयार किया जाएगा, ताकि अन्य ग्रामीण भी इससे प्रेरणा ले सकें। उन्होंने कहा कि क्षेत्र विशेष की भौगोलिक परिस्थितियों और भूमि की गुणवत्ता का अध्ययन कर ही वहां विशिष्ट फलों या सब्जियों के उत्पादन की योजना बनाई जाए।
तीन वर्षों की कार्ययोजना और किसानों के हित
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने बोर्ड को आगामी तीन वर्षों की विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी योजना के निर्माण में किसानों के हित सर्वोपरि होने चाहिए। सरकार का मुख्य लक्ष्य खेती की लागत को कम करना, उत्पादन में वृद्धि करना और अंततः किसानों की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाना है।
तिलहनी फसलों और उन्नत तकनीक पर विशेष जोर
मुख्यमंत्री ने प्रदेश में सरसों, तिल, सूरजमुखी और सोयाबीन जैसी तिलहनी फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रयास करने को कहा। उन्होंने निर्देश दिए कि गोविन्द बल्लभ पंत कृषि विश्वविद्यालय, पंतनगर जैसे संस्थानों के सहयोग से बड़े स्तर पर कृषि गोष्ठियों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किया जाए। इन कार्यक्रमों के जरिए किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीज, पौध और खाद के साथ-साथ उन्नत कृषि तकनीक भी उपलब्ध कराई जाएगी।
मार्केटिंग, डिजिटल सपोर्ट और लैब टू लैंड कनेक्टिविटी
किसानों की उपज की बेहतर मार्केटिंग सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को डिजिटल माध्यमों का उपयोग करने और किसानों को इस हेतु प्रशिक्षित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि तकनीक को केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित न रखकर सीधे खेतों तक पहुँचाया जाए (लैब टू लैंड)। साथ ही, कृषि कार्यों में बायो गैस संयंत्र और सौर ऊर्जा संचालित पंपों के उपयोग को प्रोत्साहित करने पर भी बल दिया गया।
बैठक में उपस्थिति: इस महत्वपूर्ण बैठक में उत्तराखण्ड मंडी परिषद के अध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार डब्बू, सचिव डॉ. एस.एन. पाण्डेय, अपर सचिव श्री बंशीधर तिवारी सहित कृषि एवं विपणन बोर्ड के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री का संदेश: “उत्तराखंड की भौगोलिक विविधता हमारी सबसे बड़ी ताकत है। यदि हम जलवायु और भूमि के अनुरूप योजनाबद्ध तरीके से कार्य करें, तो हमारा राज्य कृषि और बागवानी के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बन सकता है।”
