हल्द्वानी/लालकुआं: लालकुआं विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बिंदुखत्ता के हजारों परिवारों के लिए एक बड़ी उम्मीद जगी है। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने स्थानीय विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट के विशेष अनुरोध पर बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम (Revenue Village) बनाए जाने संबंधी घोषणा को पुनः जीवित करने का महत्वपूर्ण अनुमोदन प्रदान कर दिया है।
यह निर्णय न केवल क्षेत्र के विकास के द्वार खोलेगा, बल्कि दशकों से अपने अधिकारों की प्रतीक्षा कर रहे स्थानीय निवासियों को मालिकाना हक दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा।
क्या था पूरा मामला? क्यों विलोपित हुई थी घोषणा?
बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम बनाने की घोषणा पूर्व में मुख्यमंत्री द्वारा की गई थी, लेकिन तकनीकी कारणों से इसे विभागीय सूची से हटा दिया गया था। इसके पीछे मुख्य कारण निम्नलिखित थे:
-
वन भूमि का पेंच: बिंदुखत्ता का क्षेत्र वर्तमान में वन विभाग के अंतर्गत आता है।
-
भारत सरकार की अनुमति: नियमानुसार, वन भूमि को राजस्व भूमि में बदलने के लिए भारत सरकार (केंद्र) से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त करना अनिवार्य है।
-
समय सीमा: इस जटिल नीतिगत प्रक्रिया और वैधानिक प्रावधानों में लगने वाले लंबे समय को देखते हुए, 1 जुलाई 2025 को हुई समीक्षा बैठक में इस घोषणा को राजस्व विभाग की सक्रिय सूची से विलोपित (हटा) दिया गया था।
विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट की पहल और सीएम का निर्णय
घोषणा विलोपित होने के बाद क्षेत्रीय विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट ने मुख्यमंत्री से मिलकर जनता की भावनाओं और क्षेत्र की आवश्यकता को प्रमुखता से रखा। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस घोषणा को पुनः बहाल करने का आग्रह किया, जिस पर त्वरित संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री धामी ने इसे पुनर्जीवित करने की अनुमति दे दी है।
राजस्व ग्राम बनने से क्या बदल जाएगा?
बिंदुखत्ता के राजस्व ग्राम घोषित होने से यहाँ के निवासियों को सीधे तौर पर ये लाभ मिलेंगे:
-
मालिकाना हक: लोगों को अपनी जमीन के पक्के दस्तावेज और खतौनी मिल सकेगी।
-
सरकारी योजनाएं: अभी वन क्षेत्र होने के कारण कई केंद्रीय और राज्य स्तरीय विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में बाधा आती है, जो दूर हो जाएगी।
-
बैंक लोन व सुविधाएं: मालिकाना हक मिलने से ग्रामीण अपनी जमीन पर बैंक ऋण (Loan) प्राप्त कर सकेंगे।
-
स्थायी बुनियादी ढांचा: पक्की सड़कें, बिजली और पानी की लाइनों का विस्तार स्थायी रूप से हो सकेगा।
आगे की राह
मुख्यमंत्री के इस अनुमोदन के बाद अब शासन स्तर पर वन विभाग और केंद्र सरकार के साथ समन्वय की प्रक्रिया फिर से तेज होगी। सरकार का लक्ष्य है कि सभी विधिक अड़चनों को दूर कर बिंदुखत्ता के निवासियों के दशकों पुराने सपने को साकार किया जाए।
मुख्यमंत्री का संदेश: यह निर्णय दर्शाता है कि सरकार जनहित के मुद्दों पर संवेदनशील है और कठिन प्रक्रियाओं के बावजूद विकास के वादों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।
