देहरादून: “बातें कम और काम ज्यादा”— मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की इसी कार्यशैली ने आज उत्तराखंड की महिलाओं के जीवन में खुशहाली की एक नई सुबह ला दी है। देवभूमि की दुर्गम पहाड़ियों से लेकर मैदानों तक, आज महिलाएं केवल घर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनकर उभर रही हैं। मुख्यमंत्री धामी का स्पष्ट विजन है: “आत्मनिर्भर नारी से ही बनेगा आत्मनिर्भर उत्तराखंड।”
आरक्षण बना सुरक्षा कवच: 30% क्षैतिज आरक्षण का ऐतिहासिक फैसला
धामी सरकार ने उत्तराखंड की महिलाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सरकारी नौकरियों में 30% क्षैतिज आरक्षण (Horizontal Reservation) को कानूनी अधिकार बना दिया है। यह एक ऐसा ऐतिहासिक कदम है जिसने प्रदेश की बेटियों को सरकारी सेवाओं में आगे बढ़ने के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच प्रदान किया है।
लखपति दीदी: पीएम मोदी के सपनों को पंख दे रहे हैं सीएम धामी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘लखपति दीदी’ अभियान को धरातल पर उतारते हुए मुख्यमंत्री धामी ने प्रदेश की करीब डेढ़ लाख से ज्यादा बहनों को लखपति बनाने का लक्ष्य हासिल किया है। स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के माध्यम से आज हस्तशिल्प से लेकर डेयरी उत्पादों तक, हर क्षेत्र में महिलाएं स्वरोजगार के जरिए अपनी पहचान बना रही हैं।
“बिना ब्याज के 5 लाख तक का ऋण, उन्नत प्रशिक्षण और बाजार तक पहुंच। आज हमारी बहनें सिर्फ गृहिणी नहीं, सफल उद्यमी (Entrepreneurs) बन रही हैं।” — मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी
नंदा गौरा से लखपति दीदी तक का सफर
बेटियों के जन्म से लेकर उनकी पढ़ाई और उनके आर्थिक रूप से स्वतंत्र होने तक, सरकार हर कदम पर साथ खड़ी है:
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नंदा गौरा योजना: बेटियों के जन्म और उनकी शिक्षा के लिए मिलने वाली आर्थिक सहायता ने अभिभावकों की चिंता को दूर किया है।
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उज्ज्वला योजना: अंत्योदय परिवारों को साल में 3 मुफ्त गैस रिफिल देकर महिलाओं को धुएं से मुक्ति और सम्मान दिलाया गया है।
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बिना ब्याज का ऋण: बिना ब्याज के ऋण और कौशल विकास की योजनाओं ने घर-घर में खुशहाली का संचार किया है।
पहाड़ों की मुस्कान: बदलती तस्वीर
आज जब आप उत्तराखंड के सुंदर पहाड़ों और खेतों की ओर रुख करेंगे, तो वहां काम करती महिलाओं के चेहरों पर एक अलग आत्मविश्वास और मुस्कान दिखेगी। पिछले 4 सालों में सरकार की मदद ने उन्हें आर्थिक रूप से इतना सबल बना दिया है कि वे अब गर्व से सिर उठाकर अपना स्वरोजगार चला रही हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का मानना है कि सशक्त मातृशक्ति के बिना विकसित उत्तराखंड की कल्पना अधूरी है। आज की पहाड़ी बहनें आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रही हैं, जो इस बात का प्रमाण है कि देवभूमि अब सही दिशा में आगे बढ़ रही है।
