उत्तराखंड में ‘रिवर्स पलायन’ की बयार: सीएम धामी के विजन से 44% प्रवासियों की हुई घर वापसी

देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में पिछले चार वर्षों (2022-2026) का समय उत्तराखंड के इतिहास में बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी के ‘स्वर्ण युग’ के रूप में दर्ज किया गया है। अपनी युवा ऊर्जा और ‘विकल्प रहित संकल्प’ के ध्येय वाक्य के साथ सीएम धामी ने राज्य की भौगोलिक बाधाओं को विकास के अवसरों में बदल दिया है। आज उत्तराखंड की पहाड़ियों में केवल सड़कें नहीं बिछ रही हैं, बल्कि खुशहाली का नया मार्ग प्रशस्त हो रहा है, जिसका सबसे बड़ा प्रमाण राज्य में दर्ज की गई 44% रिवर्स पलायन की वृद्धि है।

कनेक्टिविटी ने बदली पहाड़ की तस्वीर

मुख्यमंत्री धामी की दूरदर्शी नीतियों और ‘डबल इंजन’ सरकार के तालमेल ने सुदूर पर्वतीय क्षेत्रों तक विकास की धमक पहुँचाई है। सड़क और मूलभूत सुविधाओं में हुए क्रांतिकारी सुधारों के कारण ही पिछले चार वर्षों में राज्य में 20,000 से अधिक नए उद्योग और स्टार्टअप स्थापित हुए हैं। अब दिल्ली से देहरादून का सफर केवल ढाई घंटे का रह गया है, क्योंकि दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे का ट्रायल शुरू हो चुका है। यह एक्सप्रेस-वे न केवल पर्यटन को गति देगा, बल्कि व्यापारिक गतिविधियों के लिए भी एक नई लाइफलाइन साबित होगा।

बजट और निवेश: विकास की ठोस नींव

मार्च 2026 के ताजा आंकड़े बताते हैं कि धामी सरकार का फोकस केवल शहरों तक सीमित नहीं है। ग्रामीण विकास के लिए ₹1,642 करोड़और पीएमजीएसवाई (PMGSY) के तहत ₹1,050 करोड़ का आवंटन इस बात का गवाह है कि सरकार हर सुदूर पहाड़ी गांव को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। हाल ही में मार्च 2026 में ही मुख्यमंत्री ने सड़कों, पुलों और शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए ₹242 करोड़ की अतिरिक्त वित्तीय मंजूरी दी है, जो राज्य की बुनियादी संरचना को और मजबूती प्रदान करेगी।

चारधाम यात्रा और आधुनिक परिवहन

‘चारधाम ऑल वेदर रोड’ परियोजना ने न केवल तीर्थयात्रियों की यात्रा को सुरक्षित और तेज बनाया है, बल्कि ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन के साथ मिलकर यह राज्य के आर्थिक भूगोल को भी बदल रही है। तराई क्षेत्रों में भी, जैसे ऊधमसिंह नगर में ₹55 करोड़ की लागत से सड़कों का चौड़ीकरण, दो लाख से अधिक लोगों के जीवन को सुगम बना रहा है। आधुनिक परिवहन की दिशा में कदम बढ़ाते हुए, जनवरी 2026 में 100 नई बसें बेड़े में शामिल की गईं और 13 नए बस अड्डों का निर्माण कार्य पूरा किया गया।

2030 का लक्ष्य: ‘लास्ट-माइल’ कनेक्टिविटी

मुख्यमंत्री धामी का लक्ष्य स्पष्ट है—2030 तक 50 या उससे अधिक की जनसंख्या वाले हर गांव को पक्की सड़क से जोड़ना। भूस्खलन-प्रवण क्षेत्रों में वैली ब्रिज और आधुनिक पुलों के निर्माण पर विशेष जोर दिया जा रहा है ताकि आपदा के समय भी संपर्क न टूटे। इन चार वर्षों में केवल नई सड़कों का निर्माण ही नहीं हुआ, बल्कि पुराने मार्गों के सुधारीकरण ने भी जनजीवन को सुलभ बनाया है।

आज उत्तराखंड का युवा और प्रवासी अपने गांव लौटकर नए स्टार्टअप और उद्योग लगा रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की इच्छाशक्ति का ही परिणाम है कि कल तक जो पहाड़ ‘पानी और जवानी’ को रोकने के लिए संघर्ष कर रहा था, आज वही पहाड़ विकास की नई गाथा लिख रहा है।

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