केदारनाथ: श्री केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के बाद पहले शनिवार, 25 अप्रैल को धाम के क्षेत्र रक्षक देवता श्री भकुंट भैरवनाथ मंदिर के कपाट भी विधि-विधान और भारी श्रद्धा के साथ तीर्थयात्रियों के लिए खोल दिए गए हैं। इस पावन अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर में जयकारों के साथ बाबा भैरव के दर्शन किए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भैरवनाथ जी के कपाट खुलने के साथ ही अब केदारनाथ मंदिर में भगवान की नित्य सायंकालीन आरती का भी शुभारंभ हो जाएगा।
विधि-विधान और पूजा-अर्चना
शनिवार दोपहर को परंपरा के अनुसार श्री केदारनाथ धाम के पुजारी टी. गंगाधर लिंग, श्री बदरी-केदार मंदिर समिति (BKTC) के पदाधिकारियों और श्री केदार सभा के सदस्यों के साथ भैरवनाथ मंदिर पहुंचे। वहां मंत्रोच्चारण और हवन-यज्ञ के बाद मंदिर के कपाट खोले गए। बीकेटीसी के अध्यक्ष श्री हेमंत द्विवेदी ने इस अवसर पर देश-विदेश के श्रद्धालुओं को बधाई देते हुए कहा कि भैरवनाथ जी की अनुमति और सुरक्षा के साथ ही केदारपुरी की यात्रा पूर्ण मानी जाती है।
रक्षक देवता का धार्मिक महत्व
भकुंट भैरवनाथ को केदारनाथ धाम का रक्षक देवता माना जाता है। पौराणिक मान्यता है कि शीतकाल के दौरान जब मुख्य मंदिर के कपाट बंद रहते हैं, तब पूरे क्षेत्र की सुरक्षा का दायित्व भैरवनाथ जी ही संभालते हैं। यही कारण है कि धाम पहुंचने वाला प्रत्येक श्रद्धालु मुख्य मंदिर के दर्शन के साथ भैरवनाथ मंदिर के दर्शन को विशेष महत्व देता है। शनिवार को कपाट खुलने के दौरान जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग श्री विशाल मिश्रा और केदार सभा के अध्यक्ष श्री राजकुमार तिवारी सहित कई प्रमुख तीर्थ पुरोहित और अधिकारी मौजूद रहे।
श्रद्धालुओं का उत्साह और सुव्यवस्थित यात्रा
इस वर्ष केदारनाथ यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में अभूतपूर्व उत्साह देखा जा रहा है। प्रशासन और मंदिर समिति ने यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं। भैरवनाथ मंदिर के कपाट खुलने से अब यात्रा में आध्यात्मिक रौनक और बढ़ गई है। टोकन व्यवस्था और सुचारू दर्शन प्रणाली के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद हर श्रद्धालु सुरक्षित और सुगम तरीके से दर्शन कर सके।
