कोलकाता, 4 मई 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे जहाँ एक तरफ राज्य की सत्ता में बड़े बदलाव का संकेत दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बंगाल का मशहूर स्ट्रीट फूड ‘झालमुरी’ इस जीत के जश्न का सबसे बड़ा प्रतीक बनकर उभरा है। भाजपा और एनडीए के नेता देश भर में एक-दूसरे को झालमुरी खिलाकर खुशियां बांट रहे हैं और इसे तृणमूल कांग्रेस (TMC) की हार के ‘तीखे स्वाद’ से जोड़ रहे हैं।
पीएम मोदी के ‘झालमुरी’ प्रेम से शुरू हुआ सफर
झालमुरी के राजनीतिक चर्चा में आने की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस तस्वीर से हुई, जिसमें वे झाड़ग्राम में सड़क किनारे रुककर झालमुरी का आनंद लेते नजर आए थे। यह दृश्य तुरंत सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और इस पर तीखी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं आने लगीं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी इस पर तंज कसा था, जिसका जवाब प्रधानमंत्री ने अपनी एक रैली में बड़े ही रोचक अंदाज में दिया। प्रधानमंत्री ने कहा था, “मैंने तो सिर्फ झालमुरी खाई, लेकिन टीएमसी को असली ‘झाल’ (मिर्च) महसूस हुआ।”
चुनावी रुझान और तीखा जश्न
भारतीय निर्वाचन आयोग के दोपहर बाद के रुझानों के अनुसार, भाजपा बंगाल में 194 सीटों के साथ भारी बढ़त बनाए हुए है, जबकि टीएमसी 89 सीटों पर सिमटती नजर आ रही है। इस प्रचंड बढ़त को देखते हुए एनडीए नेताओं ने झालमुरी को ही अपने जश्न का मुख्य आधार बना लिया है। नेताओं का मानना है कि ‘झाल’ शब्द अब भाजपा की आक्रामक जीत और विरोधियों की चुनावी हार के तीखेपन का प्रतिनिधित्व कर रहा है।
जीतन राम मांझी और एकनाथ शिंदे का प्रहार
केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने झालमुरी खाते हुए अपनी तस्वीरें साझा कीं और चुटकी लेते हुए कहा कि आज बंगाल की जीत पर जलेबी से काम नहीं चलेगा। उन्होंने बड़े चाव से झालमुरी खाते हुए कहा कि आज इसी का दिन है और अगर किसी को इसमें तीखापन महसूस हो रहा है, तो वह इसे बुरा न माने। उन्होंने इस जीत का श्रेय प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन और अमित शाह की बेमिसाल मेहनत को दिया।
वहीं महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने इसे ऐतिहासिक दिन करार दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने ममता दीदी को विफलता की कड़वी ‘झालमुरी’ का स्वाद चखा दिया है। शिंदे ने आगे कहा कि बंगाल की जनता ने गुंडागर्दी और भ्रष्टाचार से तंग आकर विकास, प्रगति और शांति के लिए अपना स्पष्ट जनादेश दिया है। उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह को भाजपा का ‘चाणक्य’ बताते हुए उनके दशकों के प्रयासों की सराहना की।
निष्कर्ष: लोकप्रियता का नया प्रतीक
बंगाल की गलियों से निकलकर झालमुरी अब भारतीय राजनीति के विमर्श में मजबूती से शामिल हो गई है। भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए यह केवल एक व्यंजन नहीं, बल्कि ममता बनर्जी के गढ़ को ध्वस्त करने के आत्मविश्वास का प्रतीक बन गई है। सोशल मीडिया पर भी जश्न की हजारों तस्वीरें छाई हुई हैं, जहाँ कार्यकर्ता ‘झालमुरी’ के तीखेपन के साथ अपनी जीत की मिठास का आनंद ले रहे हैं।
