New Delhi: 13 सितंबर 2013 को जब भारतीय जनता पार्टी के संसदीय बोर्ड ने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया था, तब देश के राजनीतिक हालात आज से बिल्कुल अलग थे। उस समय भाजपा और उसके सहयोगी दल केवल कुछ गिने-चुने राज्यों तक ही सीमित थे और कई राज्यों में तो पार्टी की उपस्थिति भी नगण्य थी। लेकिन पिछले 13 वर्षों में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व ने एक ऐसा राजनीतिक परिवर्तन लाया है कि आज भारत का नक्शा काफी हद तक भगवा रंग में रंगा नजर आता है।
सत्ता का अभूतपूर्व विस्तार
4 मई 2026 के ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश के 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में से 22 में भाजपा या एनडीए गठबंधन की सरकारें काबिज हैं। यह उपलब्धि केवल हिंदी पट्टी के राज्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि भाजपा ने उन दुर्गों को भी फतह किया है जहाँ जीत की कल्पना करना भी कठिन था। ओडिशा के बाद अब पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले शासन की विदाई और भाजपा की जीत इस विस्तार की सबसे बड़ी मिसाल है। बंगाल जैसे राज्य में, जहाँ पार्टी ने लंबे समय तक संघर्ष और कार्यकर्ताओं का बलिदान देखा, वहाँ आज बहुमत के साथ सरकार बनाना मोदी लहर की व्यापकता को दर्शाता है।
विधायकों की संख्या में रिकॉर्ड वृद्धि
पार्टी की असली ताकत उसके निर्वाचित प्रतिनिधियों की संख्या से आंकी जाती है। सितंबर 2013 तक पूरे भारत में भाजपा के विधायकों की संख्या केवल 773 थी, जो आज बढ़कर 1,798 के आंकड़े को पार कर गई है। यह लगभग तीन गुना की बढ़त है, जो यह साबित करती है कि पार्टी ने न केवल केंद्र में अपनी सत्ता बरकरार रखी है, बल्कि राज्यों की विधानसभाओं में भी अपनी पकड़ को बेहद मजबूत किया है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में 47 से 257 सीटों का सफर और बंगाल में शून्य से 199 तक पहुँचना पार्टी की रणनीतिक जीत का परिणाम है।
राज्यों का तुलनात्मक विवरण (2013 बनाम 2026)
| राज्य/क्षेत्र | 2013 की सीटें | 2026 की सीटें | विकास की स्थिति |
| संपूर्ण भारत (Total) | 773 | 1,798+ | 3 गुना से ज्यादा वृद्धि |
| पश्चिम बंगाल | 0 | 199 | शून्य से शिखर तक |
| उत्तर प्रदेश | 47 | 257 | सबसे मजबूत आधार |
| असम | 5 | 82 | पूर्वोत्तर का प्रवेश द्वार |
| गुजरात | 115 | 161 | रिकॉर्डतोड़ पकड़ |
| त्रिपुरा | 0 | 32 | ऐतिहासिक बदलाव |
भौगोलिक और जनसांख्यिकीय प्रभुत्व
वर्तमान में भाजपा और एनडीए का शासन देश के लगभग 72 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्रफल पर फैला हुआ है। प्रशासनिक दृष्टि से यह एक विशाल उपलब्धि है क्योंकि देश की करीब 78 प्रतिशत आबादी अब उन राज्यों में रहती है जहाँ मोदी सरकार की नीतियों का सीधा क्रियान्वयन हो रहा है। उत्तर में जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड से लेकर पूर्वोत्तर के असम, मणिपुर और अरुणाचल तक, और पश्चिम में गुजरात से लेकर दक्षिण के पुडुचेरी और आंध्र प्रदेश तक एनडीए की उपस्थिति एक ‘अखिल भारतीय’ शक्ति के रूप में उभरी है।
एक नए राजनीतिक युग की शुरुआत
4 मई 2026 को मतगणना के साथ ही यह स्पष्ट हो गया है कि प्रधानमंत्री मोदी ने भाजपा को एक ऐसी स्थिति में पहुँचा दिया है जहाँ वह देश की सबसे प्रभावी और विस्तृत राजनीतिक शक्ति बन चुकी है। राज्यों में विधायकों की बढ़ती संख्या और लगातार नए क्षेत्रों में सरकार बनाने की क्षमता ने विपक्ष के सामने बड़ी चुनौती पेश की है। यह चुनावी आंकड़े केवल जीत की कहानी नहीं कहते, बल्कि उस संगठनात्मक मजबूती और विकासवादी राजनीति की पुष्टि करते हैं जिसने भारत की राजनीति को एक नया चेहरा दिया है।
