नैनीताल, 5 जून: विश्व पर्यावरण दिवस के पावन अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने जनपद नैनीताल को 96 करोड़ 71 लाख रुपये की 13 महत्वपूर्ण विकास योजनाओं की बड़ी सौगात दी है। इस विशेष कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने 67 करोड़ रुपये की लागत वाली 6 विकास योजनाओं का लोकार्पण किया, जबकि 29.71 करोड़ रुपये की लागत वाली 7 नई योजनाओं का विधि-विधान से शिलान्यास किया।
भीमताल क्षेत्र के लिए मुख्यमंत्री की बड़ी घोषणाएं
मुख्यमंत्री धामी ने स्थानीय जनता की आवश्यकताओं को देखते हुए भीमताल और उसके आस-पास के क्षेत्रों के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं:
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भीमताल में स्थानीय सैनिकों और व्यापारियों की सुविधा के लिए एक आधुनिक बहुउद्देश्यीय भवन का निर्माण किया जाएगा।
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क्षेत्र के प्रसिद्ध भीमेश्वर मंदिर एवं ओखलकांडा के पशुपतिनाथ मंदिर को राज्य सरकार के महत्वाकांक्षी ‘मंदिर माला मिशन’ (मानसाखंड मंदिर माला मिशन) से जोड़ा जाएगा।
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रामगढ़ ब्लॉक के ओढ़ाखांन से मुक्तेश्वर मोटर मार्ग और जीप मार्ग का मिलान किया जाएगा।
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रामगढ़ उप तहसील का संचालन शीघ्र अति शीघ्र प्रारंभ किया जाएगा।
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क्षेत्र में विकास प्राधिकरण से जुड़ी स्थानीय समस्याओं के स्थाई समाधान हेतु एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया जाएगा, जो जल्द अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
“पर्यावरण दिवस केवल औपचारिकता नहीं, आत्मचिंतन का दिन है”
विश्व पर्यावरण दिवस की शुभकामनाएं देते हुए मुख्यमंत्री ने नैनीताल की प्राकृतिक सुंदरता का जिक्र किया। उन्होंने कहा, “यहाँ की सुंदर झील, चारों ओर फैली हरियाली और पर्वतों की अद्भुत श्रृंखला हमें केवल आनंद का अनुभव ही नहीं कराती, बल्कि यह याद दिलाती है कि प्रकृति और पर्यावरण ही हमारा वर्तमान और भविष्य हैं।”
सीएम धामी ने जोर देकर कहा कि आज का दिन केवल पौधे लगाने या औपचारिक कार्यक्रमों को करने का नहीं है, बल्कि यह आत्मचिंतन करने का दिन है। हमें स्वयं से यह सवाल पूछना होगा कि हम अपनी आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ नदियाँ और शुद्ध वातावरण सौंपकर जा रहे हैं, या फिर प्रदूषण और जल संकट से भरा एक अंधकारमय भविष्य।
वैश्विक जलवायु परिवर्तन एक बड़ी चुनौती
जलवायु परिवर्तन (Climate Change) पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अब केवल वैज्ञानिकों की चर्चा का विषय नहीं रह गया है, बल्कि हमारे रोजमर्रा के जीवन की वास्तविकता बन चुका है। बदलता मौसम, बढ़ता तापमान, अनियमित वर्षा, सूखते जल स्रोत और पिघलते ग्लेशियर हमें लगातार चेतावनी दे रहे हैं। इसका सीधा असर हमारे जल स्रोतों, खेती, जैव विविधता और राज्य की आर्थिकी के मुख्य आधार ‘पर्यटन’ पर पड़ रहा है। देवभूमि उत्तराखंड वह पवित्र स्थान है जहाँ से गंगा-यमुना जैसी जीवनदायिनी नदियाँ निकलती हैं, इसलिए पर्यावरण का संरक्षण हमारी संस्कृति और आस्था का मूल आधार है।
‘प्रकृति भी और प्रगति भी’ के मंत्र पर बढ़ रहा देश
मुख्यमंत्री ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन की सराहना करते हुए कहा कि भारत ने पूरी दुनिया को संदेश दिया है कि विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। देश आज ‘प्रकृति भी और प्रगति भी’ के मूल मंत्र को लेकर आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री के ‘मिशन लाइफ’ (Mission LiFE) ने साबित किया है कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि जब करोड़ों लोग अपनी जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव करते हैं, तो बड़े परिवर्तन अपने आप संभव हो जाते हैं।
‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान को जनआंदोलन बनाने की अपील
मुख्यमंत्री धामी ने प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किए गए ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान का उल्लेख करते हुए इसे भावनाओं से जुड़ा एक जनआंदोलन बताया। उन्होंने उत्तराखंड के प्रत्येक परिवार से भावुक अपील की कि वे अपनी माँ के नाम पर एक पौधा अवश्य लगाएं और न सिर्फ उसे रोपें, बल्कि उसकी देखभाल कर उसे एक मजबूत वृक्ष बनाएं।
लेख के अंत में उत्तराखंड के गौरवशाली इतिहास को याद करते हुए सीएम धामी ने कहा कि जब पूरी दुनिया जंगलों की रक्षा का पाठ सीख रही थी, तब उत्तराखंड की मातृशक्ति ने गौरा देवी के नेतृत्व में ऐतिहासिक ‘चिपको आंदोलन’ के माध्यम से विश्व को जनशक्ति का संदेश दिया था। आज हमें पर्यावरण को बचाने के लिए फिर से उसी सामूहिक चेतना और भावना को जगाने की बेहद आवश्यकता है।
