नई दिल्ली | देश के राजनीतिक गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। कांग्रेस ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। पार्टी ने देशभर में महंगाई, बेरोजगारी, परीक्षा घोटालों, सामाजिक असमानता और केंद्र सरकार की विदेश नीति के खिलाफ एक बड़े और व्यापक आंदोलन का आधिकारिक ऐलान किया है।
पार्टी ने अगले तीन महीनों तक राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक जनसंपर्क और विरोध अभियान (National Protest Campaign) चलाने का फैसला किया है, जिसके तहत कांग्रेस के हर छोटे-बड़े नेता और कार्यकर्ता को जमीन पर उतरने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।
एआईसीसी (AICC) मुख्यालय में बनी तीन महीने की रणनीति
इस बड़े राष्ट्रीय अभियान की विस्तृत जानकारी कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने गुरुवार (11 जून) को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) मुख्यालय में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक के बाद साझा की। इस महत्वपूर्ण बैठक में पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने, आगामी आंदोलनों की रूपरेखा तय करने और आगामी राज्यसभा चुनाव से जुड़े रणनीतिक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए केसी वेणुगोपाल ने कहा:
“अगले तीन महीनों तक कांग्रेस राष्ट्रीय स्तर पर एक सघन अभियान चलाएगी। पार्टी का हर नेता और कार्यकर्ता सीधे जनता के बीच जाएगा और सड़कों पर उतरकर आम लोगों के अधिकारों और उनके हक की आवाज को पुरजोर तरीके से उठाएगा।”
मल्लिकार्जुन खड़गे का ‘X’ पर बड़ा हमला: युवाओं का भरोसा डगमगाया
अभियान के उद्देश्यों को स्पष्ट करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पहले ट्विटर) पर एक विस्तृत पोस्ट साझा की। उन्होंने केंद्र सरकार को घेरते हुए निम्नलिखित प्रमुख बिंदु उठाए:
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गंभीर चुनौतियां: आज पूरा देश रिकॉर्ड तोड़ महंगाई, बढ़ती बेरोजगारी, परीक्षा घोटालों और सामाजिक असमानता जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है।
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पेपर लीक से युवा परेशान: नीट (NEET) और विभिन्न सरकारी भर्ती परीक्षाओं में लगातार हो रही पेपर लीक की घटनाओं तथा शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विवादों ने देश के लाखों युवाओं और उनके परिवारों का भरोसा पूरी तरह डगमगा दिया है।
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छात्रों के साथ राहुल गांधी: राहुल गांधी ने इन प्रभावित छात्रों और युवाओं से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर उनकी चिंताओं को समझा है और उनकी आवाज को मजबूती से देश के सामने रखा है।
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संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप: खड़गे ने आरोप लगाया कि जिन लोकतांत्रिक संस्थाओं और व्यवस्थाओं को बनाने में देश को दशकों लगे, वर्तमान सरकार उन्हें कमजोर कर रही है। ऐसे में कांग्रेस की जिम्मेदारी केवल राजनीतिक संघर्ष तक सीमित नहीं है, बल्कि संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय की रक्षा करना उनका परम कर्तव्य है।
विदेश नीति और किसानों के मुद्दे पर केंद्र को घेरा
बैठक के बाद कांग्रेस ने केवल घरेलू मुद्दों पर ही नहीं, बल्कि केंद्र सरकार की विदेश और व्यापार नीति पर भी तीखा निशाना साधा।
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खाड़ी देशों का संकट: केसी वेणुगोपाल ने विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि खाड़ी क्षेत्र में जारी भू-राजनीतिक संघर्ष के बीच तीन भारतीय नागरिकों की मौत हो चुकी है, लेकिन इस गंभीर मुद्दे पर सरकार का रुख और रणनीति अब तक स्पष्ट नहीं दिख रही है।
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भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: कांग्रेस ने दावा किया कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर सरकार जिस तरह की जल्दबाजी दिखा रही है, वह भारतीय किसानों के हितों को भारी नुकसान पहुंचा सकती है। पार्टी इस समझौते के प्रावधानों पर भी नजर रखे हुए है और इसे जनता के बीच ले जाएगी।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय: संसद से सड़क तक घेराबंदी की तैयारी
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि तीन महीने का यह लंबा राष्ट्रीय अभियान साफ संकेत देता है कि कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनावों और संसद के आगामी सत्रों से पहले जमीन पर एक मजबूत माहौल तैयार करना चाहती है। पेपर लीक और महंगाई जैसे सीधे आम जनता और युवाओं से जुड़े मुद्दों को उठाकर कांग्रेस सीधे मोदी सरकार की घेराबंदी करने की रणनीति पर काम कर रही है, जिससे आने वाले दिनों में देश का सियासी पारा चढ़ना तय है।
