Khatima: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी का एक बेहद सादगी भरा और प्रेरणादायक रूप सामने आया है। सीएम धामी अपने पैतृक गांव नंगला तराई में खेतों में पारंपरिक तरीके से खेती करते नजर आए। मुख्यमंत्री को इस तरह जमीन से जुड़कर और अपनी माटी के बीच काम करते देख न केवल गांव के लोग बेहद उत्साहित हैं, बल्कि उनका यह कदम राज्य के कृषि क्षेत्र और किसानों के मनोबल को बढ़ाने के लिए एक मील का पत्थर साबित हो रहा है।
श्रम का सम्मान: कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता
खेतों में पसीना बहाते हुए सीएम धामी ने प्रदेश की जनता और विशेषकर युवाओं को एक बेहद कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता है। अपनी माटी से जुड़ना, खेती करना और खेतों में काम करना हमारे लिए गौरव की बात है। मुख्यमंत्री ने स्वयं खेतों में उतरकर एक मिसाल पेश की है, जिसका मुख्य उद्देश्य समाज में श्रम के प्रति सम्मान बढ़ाना और युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ना है।
रासायनिक खाद के खिलाफ चेताया, कम फर्टिलाइजर के उपयोग पर दिया जोर
मुख्यमंत्री ने खेतों और मिट्टी की सेहत को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आज के समय में अधिक पैदावार की अंधी होड़ में किसान खेतों में भारी मात्रा में रासायनिक खाद (केमिकल फर्टिलाइजर) का उपयोग कर रहे हैं। यह रासायनिक चक्र हमारी उपजाऊ मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरा शक्ति को धीरे-धीरे पूरी तरह नष्ट कर रहा है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे खेतों को उपजाऊ बनाए रखने के लिए कम से कम फर्टिलाइजर का उपयोग करें और जैविक या प्राकृतिक खेती की ओर अपने कदम बढ़ाएं।
पीएम मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को बढ़ाया आगे
खेती के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विजन का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश और प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने का पीएम मोदी का संकल्प बिल्कुल सही दिशा में है और हमें इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ना चाहिए। सीएम धामी ने इस बात पर जोर दिया कि जब तक हमारा किसान और ग्रामीण क्षेत्र आत्मनिर्भर नहीं होगा, तब तक एक सशक्त और समृद्ध राष्ट्र की कल्पना अधूरी है। उन्होंने सभी से इस आत्मनिर्भरता के संकल्प में सहभागी बनने का आह्वान किया।
