गैरसैंण में नया इतिहास: एक साल में पहली बार दो विधानसभा सत्र, धामी सरकार के कार्यकाल में बढ़ी ग्रीष्मकालीन राजधानी की भूमिका

भराड़ीसैंण में मार्च के बजट सत्र के बाद अक्टूबर में फिर शुरू हुआ विधानसभा सत्र, पर्वतीय क्षेत्रों के विकास और जनभावनाओं को प्राथमिकता देने पर जोर

देहरादून/गैरसैंण। उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में वर्ष 2026 में पहली बार एक ही साल के भीतर गैरसैंण के भराड़ीसैंण स्थित विधानसभा भवन में दो विधानसभा सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। मंगलवार से शुरू हुए विधानसभा सत्र के साथ ही ग्रीष्मकालीन राजधानी के रूप में गैरसैंण की भूमिका को विस्तार देने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

इससे पहले मार्च 2026 में भराड़ीसैंण में विधानसभा का बजट सत्र आयोजित किया गया था। अब अक्टूबर में दूसरी बार विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने से गैरसैंण राज्य की विधायी गतिविधियों के केंद्र में आया है। यह घटनाक्रम पर्वतीय क्षेत्रों की समस्याओं, स्थानीय जनअपेक्षाओं और विकास से जुड़े मुद्दों को सदन में प्रमुखता से उठाने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।

2014 में शुरू हुआ था गैरसैंण में विधानसभा सत्रों का सिलसिला

गैरसैंण में विधानसभा सत्र आयोजित करने की शुरुआत वर्ष 2014 में हुई थी। उस वर्ष यहां पहली बार तीन दिवसीय विधानसभा सत्र आयोजित किया गया। इसके बाद वर्ष 2015 और 2016 में दो-दो दिन तथा वर्ष 2017 में दो दिवसीय सत्र हुआ। वर्ष 2018 में विधानसभा की कार्यवाही छह दिन तक चली, जबकि 2019 में यहां कोई सत्र आयोजित नहीं किया गया।

वर्ष 2020 में पांच दिवसीय सत्र और वर्ष 2021 में एक से छह मार्च तक छह दिवसीय बजट सत्र आयोजित हुआ। वर्ष 2022 में गैरसैंण में विधानसभा सत्र नहीं हुआ। इसके बाद वर्ष 2023 में चार दिन और 2024 में तीन दिवसीय सत्र आयोजित किया गया।

वर्ष 2025 में गैरसैंण में बजट सत्र और मानसून सत्र आयोजित किए गए। वहीं, वर्ष 2026 में मार्च के बजट सत्र के बाद अक्टूबर में दूसरी बार विधानसभा सत्र आयोजित होने से यहां विधायी गतिविधियों को निरंतरता देने का नया उदाहरण सामने आया है।

पर्वतीय क्षेत्रों की समस्याओं को मिलेगी प्राथमिकता

गैरसैंण उत्तराखंड की जनभावनाओं, सांस्कृतिक पहचान और पर्वतीय अस्मिता से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थान है। भराड़ीसैंण में विधानसभा सत्र आयोजित होने से पर्वतीय क्षेत्रों की बुनियादी सुविधाओं, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और स्थानीय विकास जैसे विषयों को सदन के माध्यम से उठाने का अवसर मिलता है।

राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी के रूप में गैरसैंण की भूमिका को मजबूत करना लंबे समय से प्रदेश की जनभावनाओं से जुड़ा विषय रहा है। ऐसे में एक ही वर्ष में दो विधानसभा सत्रों का आयोजन इस दिशा में महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।

जनभावनाओं के अनुरूप विकास सरकार की प्रतिबद्धता: धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि गैरसैंण उत्तराखंड की जनभावनाओं और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। सरकार का प्रयास है कि ग्रीष्मकालीन राजधानी भराड़ीसैंण में विधानसभा सत्रों के आयोजन के माध्यम से पर्वतीय क्षेत्रों की समस्याओं, जनअपेक्षाओं और विकास से जुड़े विषयों को प्राथमिकता दी जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गैरसैंण की भूमिका को सशक्त बनाना और प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों के संतुलित विकास को गति देना राज्य सरकार की प्रतिबद्धता है। सरकार जनभावनाओं के अनुरूप विकास और सुशासन के संकल्प के साथ निरंतर कार्य कर रही है।

गैरसैंण की भूमिका को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम

एक ही साल में दो बार विधानसभा सत्र आयोजित होना गैरसैंण को राज्य की विधायी गतिविधियों से अधिक मजबूती से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे ग्रीष्मकालीन राजधानी की प्रासंगिकता बढ़ने के साथ ही पर्वतीय क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक और प्रशासनिक प्राथमिकताओं में स्थान देने का अवसर भी मिलता है।

मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में वर्ष 2026 में गैरसैंण में दो विधानसभा सत्रों का आयोजन राज्य की राजधानी व्यवस्था और पर्वतीय विकास से जुड़े विमर्श को नई दिशा देने वाला घटनाक्रम बनकर सामने आया है।